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CoronaVirus: फिरोजाबाद में कोरोना से पहली मौत, संक्रमण से पीड़ित इमाम ने तोड़ा दम

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद Published by: Abhishek Saxena Updated Mon, 20 Apr 2020 12:22 AM IST

सार

जिले में संक्रमित मरीजों की संख्या अब 46 हो गई है।  
इमाम का फाइल फोटो
इमाम का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

फिरोजाबाद की एक प्रमुख मस्जिद के इमाम की रविवार सुबह मृत्यु हो गई। उनकी कोरोना संक्रमण की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर शनिवार शाम को क्वारंटीन वार्ड से उन्हें आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया था। रविवार को सुबह हृदय गति रुकने से उनकी मृत्यु हो गई। वो उच्च रक्तचाप के मरीज थे।
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सुहाग नगरी में कोरोना संक्रमित व्यक्ति की यह पहली मौत है। उधर, नए मरीजों के मिलने का सिलसिला थम नहीं रहा है। रविवार को कोरोना के छह मामले और मिले हैं। जिले में अब संक्रमित मरीजों की संख्या 46 हो गई है। नए मरीजों के संपर्क में आने वालों के बारे में स्वास्थ्य विभाग जानकारी जुटा रहा है। 


हॉटस्पॉट क्षेत्र में रहते थे इमाम

हॉटस्पॉट क्षेत्र शीशग्रान स्थित मस्जिद के इमाम 16 अप्रैल को क्वारंटीन (एकांतवास) में रखे गए थे। अचानक उनकी तबीयत खराब हुई थी। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उन्हें मेडिकल कॉलेज में क्वारंटीन कराया था। कोरोना की आशंका पर उनका नमूना जांच के लिए भेजा था। जांच रिपोर्ट में इमाम को कोरोना संक्रमित पाया गया। उन्हें क्वारंटीन वार्ड से आइसोलेशन वार्ड में रात को ही शिफ्ट किया गया। 
 

मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा ने बताया कि शीशग्रान स्थित मस्जिद के इमाम (65 वर्ष) उच्च रक्तचाप के मरीज थे। उन्हें तबीयत खराब होने पर क्वारंटीन में रखा गया था। रविवार को सुबह 6.40 पर हृदय गति रुकने से उनकी मृत्यु हो गई। वो पहले से अस्वस्थ्य थे और कोरोना संक्रमण का शिकार भी हो गए थे। इमाम का आवास भी हॉट स्पॉट एरिया में है। 

शीशग्रान कब्रिस्तान में किया गया दफीना, सोशल मीडिया पर जताया शोक  

मस्जिद के इमाम की मृत्यु की खबर से समाज के लोग व्यथित हो गए। शहर के प्रमुख इमामों में उनकी गिनती थी। सोशल मीडिया पर उनके इंतकाल पर शोक व्यक्त किया गया। लोगों ने उनके व्यक्तित्तव के बारे में भी सोशल मीडिया पर जानकारी साझा की। कौमी एकता का उन्होंने हमेशा संदेश दिया।

सांप्रदायिक सौहार्द के लिए प्रशासन भी उनके सुझावों पर गौर फरमाता था। लॉकडाउन के कारण पांच लोग ही उनके अंतिम संस्कार के दौरान मौजूद रहे। प्रशासन की देखरेख में शीशग्रान स्थित कब्रिस्तान में उनका दफीना किया गया। ताबूत में रख कर एंबुलेंस से शव सीधे कब्रिस्तान भेजा गया। शव स्पर्श करने की इजाजत किसी को नहीं दी गई।
 
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