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तुरकिया कांड में हत्यारे को सजा-ए-मौत

तुरकिया कांड में हत्यारे को सजा-ए-मौत Updated Tue, 21 Mar 2017 12:40 AM IST
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तुरकिया कांड में हत्यारे को सजा-ए-मौत
तुरकिया कांड में हत्यारे को सजा-ए-मौत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अछनेरा के तुरकिया गांव में नौ मई 2012 को नाबालिग दोस्त के साथ मिलकर भाई-भाभी और उनके चार मासूम बच्चों को कुल्हाड़ी से काटकर मौत के घाट उतार देने वाले  गंभीर सिंह (40) को सजा-ए-मौत दी गई है। उसने इलाके को बुरी तरह दहला देने वाला यह नरसंहार एक बीघा जमीन के लिए अंजाम दिया था। दूसरे आरोपी का केस अभी जुवेनाइल कोर्ट में विचाराधीन है। गंभीर की बहन गायत्री भी नामजद कराई गई थी। वह साक्ष्य अभाव में बरी हो गई है।
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गंभीर ने खाने में नशीला पदार्थ मिलाकर सत्यभान (35), उसकी पत्नी पुष्पा (30), बेटे कन्हैया (पांच), बेटी आरती (चार), गुड़िया (तीन ) और प्रिया (दो) को बेहोश किया था। इसके बाद उसके दोस्त ने कटार से एक एक कर उनके गले काटे। गंभीर ने सभी को कुल्हाड़ी से काट डाला था।

 पुलिस जांच में खुलासा हुआ था कि सत्यभान ने गंभीर की एक बीघा जमीन हड़प ली थी। इसी को हासिल करने के लिए वह खूनी बन गया।  सामूहिक हत्याकांड की रिपोर्ट सत्यभान के अरदाया गांव निवासी साले महावीर ने गंभीर, उसकी बहन गायत्री और नाबालिग दोस्त के खिलाफ नामजद दर्ज कराई थी। केस एडीजे दिनेश कुमार शर्मा की अदालत में चला। उन्होंने सजा सुनाई।

मां के खून से भी रंगे हैं गंभीर के हाथ
आगरा। राजस्थान की सीमा से सटे अछनेरा के गांव तुरकिया के फौजी शिव सिंह के तीन बेटों में सबसे बड़ा सत्यभान, दूसरे नंबर का गंभीर, सबसे छोटा कान्हा थे। एक बेटी है गायत्री। शिव सिंह की कुल चार बीघा जमीन थी। तीन भाइयों के हिस्से में एक एक बीघा आ रही थी। सत्यभान की शादी हुई थी। गंभीर और कान्हा अविवाहित थे। सत्यभान और गंभीर ने घर के विवाद में 2006 में अपनी मां की हत्या कर दी थी। इसमें दोनों जेल गए थे। सत्यभान की जमानत पहले हो गई थी। गंभीर की बाद में। गंभीर को जेल में रहते पैसे की जरूरत हुई तो सत्यभान ने उसकी मदद की। इसके बदले उसकी एक बीघा जमीन रख ली। जेल से छूटने पर गंभीर ने जमीन वापस मांगी। सत्यभान ने देने से मना कर दिया। इसी पर उसने यह नरसंहार कर डाला।

11 साल बाद टूटी जज की कलम
आगरा में सजा ए मौत का फैसला 11 साल बाद सुनाया गया है। वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने बताया कि इससे पहले 2006 में हत्या के मामले में भी फांसी की सजा दी गई थी। तब के बाद अब जज साहब ने मृत्युदंड के आदेश पर हस्ताक्षर करते ही कलम तोड़ी है।


वंशनाश का किया था एलान
गांव के लोग बताते हैं कि जमीन न मिलने पर गंभीर आपा खो बैठा था। वह भाई को धमकी दे रहा था। एक बार तो उसने गुस्से में सत्यभान को उसका वंशनाश करने की धमकी दे डाली थी।

बेहोश करके किया था खून
गंभीर ने धोखे से खाने में नशीला पदार्थ मिला दिया था। इसे खाने से सत्यभान, उसकी पत्नी और चार बच्चे बेहोश हो गए। इसके बाद उनका दिन में एक -एक कर खून कर दिया।

स्मैक पीकर आया था दरिंदा
गंभीर सिंह स्मैक का आदी था। वह उस दिन भी स्मैक पीकर आया था। उसने कुबूलनामे में बताया कि न तो खून करते वक्त उसके हाथ कांपे, न मासूमों को काटने में कलेजा।

कुल्हाड़ी से काटता चला गया
गंभीर ने पुलिस को बताया था कि उसका दोस्त एक एक कर सभी के गले कटार से काटता गया। वह सभी को कुल्हाड़ी से काटता रहा। बेहोशी के चलते उनकी चीख नहीं निकली।

छत तक पहुंची थीं खून की छींटें 
जिस कमरे में खून किया, उसका फर्श खून से रंग गया था। दीवारों पर खून के छींटे थे। छत तक खून की छींटें पहुंची थीं। जो जहां सो रहा था, उसे वहीं पर काट दिया गया था।

इनकी ली थी जान
सत्यभान ( 35 वर्ष) भाई
पुष्पा ( 30)  भाभी
कन्हैया ( पांच) भतीजा
आरती ( चार) भतीजी
 गुड़िया ( तीन ) भतीजी
प्रिया ( दो) भतीजी
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