बेहतर अनुभव के लिए एप चुनें।
INSTALL APP

कासगंज: लॉकडाउन में छूटी सिविल इंजीनियर की नौकरी, अपनाई मल्चिंग विधि से खेती, बचा रहे पानी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज Published by: Abhishek Saxena Updated Thu, 15 Jul 2021 06:30 PM IST

सार

मल्चिंग खेतीबाड़ी की आधुनिक विधि है। इससे खेतों में क्यारियां बनाई जाती हैं और उनमें मल्चिंग पॉलिथीन बिछाई जाती है जिससे पानी पॉलिथीन पर चढ़कर बेवजह नहीं बहता। 
विज्ञापन
मल्चिंग विधि से खेती
मल्चिंग विधि से खेती - फोटो : अमर उजाला
ख़बर सुनें

विस्तार

लॉकडाउन में गांव महावर निवासी डोरीलाल की निजी कंपनी की सिविल इंजीनियर की नौकरी छूट गई। उन्होंने जल और पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देते हुए मल्चिंग विधि को अपनाते हुए खेती शुरू की। किसान डोरीलाल ने इंटरमीडिएट (कृषि) के बाद सिविल इंजीनियर का डिप्लोमा किया। दो साल पहले नोएडा की निजी कंपनी में उन्हें सिविल इंजीनियर के पद पर नौकरी मिल गई। पिछले साल लॉकडाउन में कंपनी बंद हो गई और वे बेरोजगार हो गए। इसके बाद गांव लौट आए। उन्होंने इंटरमीडिएट में जैविक खेती और सिंचाई के दौरान पानी के संरक्षण की जो विधियां सीखी थीं, उन्हें अपनाया। खेती के लिए मल्चिंग विधि अपनाकर वह मिर्च आदि फसल तैयार कर रहे हैं। इस विधि से खेती में न केवल पानी की बचत होती है बल्कि पौधे की जड़ का विकास होता है। मिट्टी भी सख्त नहीं होती और नमी रहती है। पैदावार भी सामान्य की अपेक्षा अधिक होती है। 
विज्ञापन


क्या है मल्चिंग विधि
मल्चिंग खेतीबाड़ी की आधुनिक विधि है। इससे खेतों में क्यारियां बनाई जाती हैं और उनमें मल्चिंग पॉलिथीन बिछाई जाती है जिससे पानी पॉलिथीन पर चढ़कर बेवजह नहीं बहता। सीधे पौधे की जड़ तक जाता है। इससे लगभग 50 फीसद तक पानी की बचत होती है जबकि सामान्य विधि से सिंचाई करने पर पानी फैलकर बर्बाद हो जाता है। 


किसानों की बात-
- मल्चिंग विधि से खेती करने पर पानी का संरक्षण होता है। हमने इसी विधि से खेतीबाड़ी कर रहे हैं। इससे पानी तो संरक्षित होता ही है, फसल भी अच्छी पैदा होती है।- डोरीलाल, किसान।
- मैं भी मल्चिंग विधि से खेती की योजना बना रहा हूं क्योंकि पानी के संरक्षण के लिए मल्चिंग विधि बहुत बेहतर विधि है। इस विधि से खेती करने पर कई लाभ होते हैं। - चंद्रभान, किसान।

- किसान डोरीलाल मल्चिंग विधि से खेती कर रहे हैं। इस विधि से खेती करने पर यह पाया गया है कि पानी का बचाव होता है और पानी बेवजह नहीं बहता। - सुमित चौहान, जिला कृषि अधिकारी।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X