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राजा मानसिंह हत्याकांडः सभी दोषियों को आजीवन कारावास, 35 साल बाद मिला इंसाफ

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा Published by: Abhishek Saxena Updated Wed, 22 Jul 2020 01:21 PM IST

सार

  • 35 वर्ष बाद आया निर्णय
  • जिला जज की अदालत ने सुनाया फैसला
  • सभी को भेजा जेल
राजा मान सिंह की फाइल फोटो
राजा मान सिंह की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

भरतपुर के राजा मानसिंह और उनके दो साथियों के हत्यारे 11 पुलिसकर्मियों को बुधवार को जिला जज ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोषी पुलिसकर्मियों में राजस्थान पुलिस के तत्कालीन एक डीएसपी, दो उपनिरीक्षकों सहित 11 पुलिस और आरएसीकर्मी शामिल हैं। एक दिन पहले मंगलवार को न्यायालय ने सभी को दोषी करार दिया था।
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सजा सुनाए जाने के बाद सभी दोषियों को पुलिस सुरक्षा में अस्थाई जेल भेज दिया गया। सनद रहे कि वर्ष 1985 के विधानसभा चुनाव के दौरान राजस्थान पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान राजा मानसिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी। वह उस समय चुनाव प्रचार के लिए जा रहे थे।

 



बुधवार का दिन राजा मानसिंह हत्याकांड से जुड़े सभी लोगों के लिए महत्वपूर्ण था। हत्याकांड के सभी अभियुक्त कोर्ट में मौजूद थे और सजा सुनने का इंतजार कर रहे थे। दोपहर करीब 12:30 बजे जिला जज साधना रानी ठाकुर ने एक दिन पहले दोषी करार दिए गए राजा मानसिंह हत्याकांड के 11 अभियुक्तों की सजा के निर्णय पर सुनवाई शुरू की। 

 

राजा मानसिंह हत्याकांड के दोषी कान सिंह भाटी डिप्टी एसपी को ले जाती पुलिस
राजा मानसिंह हत्याकांड के दोषी कान सिंह भाटी डिप्टी एसपी को ले जाती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
जिला जज ने अदालत में हत्या के सभी अभियुक्तों को आजीवन कारावास और एक को छोड़कर सभी को 12-12 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने मुख्य अभियुक्त राजस्थान पुलिस के डीएसपी कान सिंह भाटी को एक केस में बरी किए जाने के चलते 11 हजार रुपये का जुर्माने की सजा सुनाई।

सजा के निर्णय पर मुख्य अभियुक्त कान सिंह भाटी और अन्य के अधिवक्ता नवीन सक्सेना ने सजा कम करने के लिए न्यायाधीश के समक्ष कई प्रकार की दलीलें भी रखीं।

न्यायालय में सजा सुनाए जाने के बाद सभी 11 अभियुक्तों को जेल भेज दिया। इस दौरान न्यायालय में मौजूद रहे वादी पक्ष के अधिवक्ता डीजीसी शिवराम तरकर तथा नारायन सिंह विप्लवी ने बताया कि न्यायालय ने सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

राजा मानसिंह हत्याकांड में इन्हें मिली सजा
1. कान सिंह भाटी पुत्र चांद सिंह, तत्कालीन क्षेत्राधिकारी डीग, जिला भरतपुर, निवासी हड्डा हाउस, एनवर्सर बीकानेर, राजस्थान। 

2. वीरेंद्र सिंह पुत्र जगदेव सिंह, तत्कालीन एसएचओ डीग, जिला भरतपुर, निवासी बहरोर जाट, थाना मंडाबार जिला अलवर। 

3. रवि शेखर मिश्रा पुत्र लक्ष्मीस्वरूप मिश्रा, इंस्पेक्टर/सेकेंड ऑफिसर, निवासी 44, संजय कॉलोनी, नेहरू नगर, जयपुर राजस्थान।

4. सुखराम पुत्र रूरा राम, तत्कालीन कांस्टेबल नंबर 780, पुलिस लाइन, जिला भरतपुर, निवासी भूड़ा दरवाजा, थाना डीग, जिला भरतपुर। 

5. जीवन राम पुत्र सूरा राम, तत्कालीन हेड कांस्टेबल 98 ई कंपनी छठवीं बटालियन आरएसी भरतपुर। निवासी गांव बरानेकुर्द भोपालगढ़ जोधपुर। 

6. भंवर सिंह पुत्र राणीदान सिंह, तत्कालीन हेड कांस्टेबल नंबर 82 बी कंपनी, छठवीं बटालियन आरएसी भरतपुर। निवासी गांव चांदनी थाना शंकरा जोधपुर। 

7. हरि सिंह पुत्र बेरिसाल सिंह, तत्कालीन हेड कांस्टेबल नंबर 596 ई कंपनी, छठवीं बटालियन आरएसी भरतपुर, निवासी ग्राम धीरा थाना डांचू, जोधपुर। 

8. शेर सिंह पुत्र माधो सिंह, तत्कालीन कांस्टेबल नंबर 704, ई कंपनी, छठवीं बटालियन आरएसी भरतपुर, निवासी ग्राम निम्बारा थाना सुरपालिया जिला नागौर, राजस्थान। 

9. छत्तर सिंह पुत्र लाल सिंह, तत्कालीन कांस्टेबल नंबर 772 ई कंपनी बटालियन आरएसी भरतपुर, निवासी ग्राम कटुकाला, थाना शेरगढ़ जिला जोधपुर राजस्थान।

10. पदमा राम पुत्र हीरा राम, तत्कालीन कांस्टेबल नंबर 605 ई कंपनी, छठवीं बटालियन, आरएसी भरतपुर। निवासी ग्राम सुखमंडला, थाना देचू, जिला जोधपुर, राजस्थान।

11. जगमोहन पुत्र बदन सिंह, तत्कालीन कांस्टेबल नंबर 784 ई कंपनी छठवीं बटालियन आरएसी भरतपुर, निवासी खाका वाली, थाना नगर जिला भरतपुर, राजस्थान।
 

चार हुए बरी और तीन की हो चुकी है मौत
सीबीआई द्वारा कुल 18 के खिलाफ चार्जशीट दी गई थी, जिनमें से एएसआई नेकीराम, कांस्टेबल कुलदीप और सीताराम की मौत हो चुकी है। सीओ कान सिंह भाटी के चालक महेंद्र सिंह को जिला जज की अदालत पहले ही बरी कर चुकी थी। मंगलवार को कुल 14 पर सुनवाई के दौरान जिला जज ने केस के जांचकर्ता कान सिंह सिरवी और जीडी लेखक हरिकिशन और गोविंद राम को बरी कर दिया।

बता दें कि मंगलवार को भरतपुर के राजा मानसिंह और दो अन्य की हत्या के मामले में 11 पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया गया था। 21 फरवरी 1985 को हुए इस बहुचर्चित हत्याकांड की सुनवाई के दौरान 1700 तारीखें पड़ीं और 25 जिला जज बदल गए।

वर्ष 1990 में यह केस मथुरा जिला जज की अदालत में स्थानांतरित किया गया था। 35 साल बाद 21 जुलाई 2020 (मंगलवार) को राजा मानसिंह हत्याकांड में निर्णय हो सका था। वादी पक्ष के अधिवक्ता नारायन सिंह विप्लवी ने बताया कि अब तक आठ दफा फाइनल बहस हुई और कुल 78 गवाह पेश हुए, जिनमें से 61 गवाह वादी पक्ष ने तो 17 गवाह बचाव पक्ष ने पेश किए।

 
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