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Mainpuri: सेवानिवृत्त लेखाकार ने फर्जी मेडिकल बिल लगाकर भुगतान के लिए किया आवेदन, जांच में खुला मामला

संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 28 Sep 2022 05:26 AM IST
सार

सेवानिवृत्त लेखाकार ने अपनी आंखों का उपचार कराया था। इस पर हुए खर्च के भुगतान के लिए फर्जी बिल लगाकर आवदेन कर दिया। जांच में मामला पकड़ा गया। सीडीओ ने एफआईआर के निर्देश दिए हैं।

विकास भवन, मैनपुरी
विकास भवन, मैनपुरी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मैनपुरी के जिला विकास अधिकारी कार्यालय के सेवानिवृत्त लेखाकार ने फर्जी मेडिकल बिल लगाकर भुगतान के लिए आवेदन कर दिया। आवेदन के बाद पूर्व में जांच के बाद बिल निरस्त कर दिए थे। इसके बाद फिर से सेवानिवृत्त लेखाकार ने ऑनलाइन पोर्टल पर इसकी शिकायत कर दी। मुख्य विकास अधिकारी विनोद कुमार ने मामले में संबंधित सेवानिवृत्त लेखाकार के विरुद्ध एफआईआर कराने के निर्देश दिए हैं। 



रामवीर सिंह जिला विकास अधिकारी कार्यालय में लेखाकार के पद पर कार्यरत थे। अपनी सेवाएं देने के बाद वह 30 अप्रैल 2016 को सेवानिवृत्त हो गए। इसके बाद नौ जुलाई 2021 को उन्होंने अपनी आंखों का उपचार कराया था। इस पर हुए खर्च के भुगतान के लिए 27 दिसंबर 2021 को उन्होंने जिला विकास अधिकारी कार्यालय में आवेदन किया गया था। आवेदन में कुल 66669 रुपये के बिल संलग्न किए थे। जांच में यह बिल फर्जी पाते हुए तत्कालीन जिला विकास अधिकारी पीके राय ने उन्हें निरस्त कर दिया था। इसके बाद कई बार सेवानिवृत्त लेखाकार ने शिकायतें की, लेकिन बिल भुगतान नहीं किया गया। 

सेवानिवृत्त लेखाकार के खिलाफ एफआईआर के निर्देश 

अब तत्कालीन जिला विकास अधिकारी पीके राय के स्थानांतरण के बाद फिर से सेवानिवृत्त लेखाकार ने शिकायतें करना शुरू कर दिया। हाल ही में सेवानिवृत्त लेखाकार ने ऑनलाइन शिकायत कर भुगतान कराने के लिए कहा था। मुख्य विकास अधिकारी विनोद कुमार ने जब इसकी पत्रावली मंगाई तो पूरा मामला सामने आ गया। उन्होंने सेवानिवृत्त लेखाकार के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश संबंधित पटल सहायक को दिए हैं।

आवेदन में मिली थी कई कमियां 

तत्कालीन जिला विकास अधिकारी पीके राय ने सेवानिवृत्त लेखाकार रामवीर सिंह द्वारा भुगतान के लिए लगाए गए मेडिकल बिल और अभिलेखों की जांच की गई थी। तीन मार्च 2022 को जारी आदेश में तत्कालीन जिला विकास अधिकारी पीके राय ने ये स्पष्ट लिखा है कि बिल की धनराशि और आवदेन में दर्ज धनराशि में काफी अंतर था। वहीं अन्य कमियां भी मिली थीं। इसके बाद ही आवेदन निरस्त किया गया था। 

मुख्य विकास अधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि सेवानिवृत्त लेखाकार ने उपचार पर हुए खर्च के भुगतान के लिए पूर्व में आवेदन किया था। जांच में तत्कालनी जिला विकास अधिकारी ने बिल फर्जी पाए थे। इसके बाद भी सेवानिवृत्त लेखाकार ने दोबारा बिल भुगतान के लिए ऑनलाइन शिकायत की। इस पर संबंधित के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। 
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