जांच में नियमों की अनदेखी से बच गए घोटालेबाज प्रधान और सचिव

Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 13 Jul 2021 10:54 PM IST
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मैनपुरी। ग्राम पंचायतों में किए गए फर्जीवाड़े की शिकायत पर ग्राम प्रधान और सचिव के खिलाफ जांचें कराई गईं। इन जांचों में फर्जीवाड़ा साबित भी हुआ, लेकिन इसके बाद भी कार्रवाई नहीं की जा सकी। इसके पीछे जांच समिति गठित करने के दौरान पंचायती राज अधिनियम का पालन नहीं किया गया। ऐसे में इन मामलों में दोषी पूर्व प्रधान और तत्कालीन सचिवों पर कार्रवाई नहीं की जा सकी।
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जिले की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए आई निधि का फर्जीवाड़ा करने की शिकायतें प्रशासन से की जाती हैं। जिन शिकायतों में शपथ पत्र दिया जाता है उनमें प्रधान के खिलाफ जांच के आदेश दिए जाते हैं। जिले में एक दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों में शिकायत पर जांच समिति गठित कर जांच कराने के आदेश दिए गए थे। जांच की जब रिपोर्ट आई तो घोटाला भी साबित हो गया। लेकिन पूर्व प्रधान और तत्कालीन सचिव पर कार्रवाई के लिए फाइलें भेजी गईं तो पता चला कि ये जांचें नियम के अनुसार नहीं कराई गईं।

नियमानुसार ग्राम प्रधान के विरुद्घ अंतिम जांच के लिए पंचायत राज अधिनियम के तहत जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही जांच कराई जाती हैं। इससे नीचे का कोई भी अधिकारी अगर जांच समिति गठित करता है तो वह जांच मान्य नहीं है। क्योंकि प्रधान एक जनप्रतिनिधि है और उसके विरुद्घ जिला मजिस्ट्रेट ही कोई जांच या कार्रवाई प्रस्तावित कर सकता है। जिले में एक साल पहले जिन ग्राम पंचायतों में जांच के आदेश दिए गए वे भी मुख्य विकास अधिकारी के आदेश से दिए गए। ऐसे में अब जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई नहीं हो पा रही है। पंचायत राज विभाग की अनेदखी के कारण दोषी प्रधान और सचिव बच जा रहे हैं।
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दोबारा कराई जाएगी जांच
जांच रिपोर्ट आने के बाद भले ही घोटाला साबित हो गया है लेकिन अब मामले की फिर से जांच कराई जाएगी। इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट की ओर से जांच के लिए आदेश देते हुए समिति का गठन किया जाएगा। ये समिति कई महीनों के बाद जांच कर अपनी रिपोर्ट देगी। इसके बाद कोई कार्रवाई की जा सकेगी।
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वर्जन
ग्राम पंचायतों की जांच के आदेश में नियमों की अनदेखी पूर्व में की गई है। ऐसे सभी मामले मेरी तैनाती से पूर्व के हैं। इन्हें संशोधित कर नियमानुसार जांच के आदेश जारी कराए जा रहे हैं।
-ईशा प्रिया, सीडीओ।
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फोटो-22
केस एक:
विकास खंड सुल्तानगंज की ग्राम पंचायत सुल्तानगंज में फर्जीवाड़े की शिकायत की गई थी। मामले की जांच तत्कालीन जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी यश कुमार वर्मा की अध्यक्षता में गठित समिति ने की। जांच रिपोर्ट में 15 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा सामने आया। लेकिन नियमों की अनदेखी के चलते दोषी पूर्व प्रधान और तत्कालीन सचिव पर कार्रवाई नहीं की जा सकी।
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केस दो:
विकास खंड सुल्तानगंज की ग्राम पंचायत जसरथपुर में फर्जीवाड़े की शिकायत पर जांच कराई गई थी। सहायक अभियंता लघु सिंचाई की अध्यक्षता में गठित समिति ने मामले की जांच की। जांच में नौ लाख रुपये का फर्जीवाड़ा साबित हुआ। इसमें भी नियमों की अनदेखी के चलते दोषी पूर्व प्रधान और तत्कालीन सचिव पर कार्रवाई नहीं हो सकी।

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