शारदीय नवरात्र 2021: इस बार आठ दिन के होंगे नवरात्रि, डोली पर आएंगी मातारानी, ऐसे करें आराधना

न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 26 Sep 2021 03:01 PM IST

सार

ज्योतिषाचार्य के अनुसार शारदीय नवरात्रि में मां की साधना, उपासना व मनोकामना पूर्ति के लिए नव कन्याओं को नवदुर्गा के स्वरूप में तिथि, वार व नक्षत्र के अनुसार नैवेद्य अर्पण करने से वांछित फल की प्राप्ति के साथ मां की कृपा बनी रहती है।
शारदीय नवरात्रि 2021
शारदीय नवरात्रि 2021 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

सात अक्तूबर (गुरुवार) से शारदीय नवरात्रि शुरू हो रहे हैं। इस बार आठ दिन के नवरात्रि में मां भगवती डोली पर सवार होकर पधारेंगी। देवी भागवत व ज्योतिर्ग्रन्थों के अनुसार शनिवार और मंगलवार नवरात्रि आरंभ हो तो मां का वाहन अश्व होता है। सोमवार व रविवार को हो तो हाथी। गुरुवार व शुक्रवार को नवरात्रि का आरंभ हो तो मां डोली पर सवार होकर आती हैं।
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ज्योतिषाचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा वैदिक ने बताया कि इस वर्ष नवरात्रि आठ दिन के होंगे। नवरात्र की तिथियों का घटना व श्राद्ध की तिथियों का बढ़ना अशुभ है। अच्छा संकेत नहीं है। तृतीया और चतुर्थी दोनों एक ही दिन है। नौ अक्तूबर शनिवार को प्रातः 7.48 बजे तक तृतीया है बाद में चतुर्थी प्रारंभ हो जाएगी। 15 अक्तूबर को दोपहर में दशमी है। इसलिए दशहरा पूजन शुक्रवार को मनाया जाएगा। चित्रा नक्षत्र व वैधृति योग के चलते घट स्थापना ब्रह्ममुहूर्त अथवा अभिजीत मुहूर्त में ही शुभ रहेगी।  

ऐसे करें मां भगवती की आराधना
सात अक्तूबर गुरुवार, प्रतिपदा तिथि व चित्रा नक्षत्र:- इस दिन मां शैलपुत्री के रूप में दो वर्ष की कन्या का गाय के घी से निर्मित हलवा व मालपूए का भोग लगाए। 

आठ अक्तूबर शुक्रवार, द्वितीया तिथि स्वाति नक्षत्र:- विजय प्राप्ति व सर्वकार्य सिद्धि के लिए तीन वर्ष की कन्या का मां ब्रह्मचारिणी के रूप में पूजा कर मिश्री व शक्कर ने बने पदार्थ का भोग लगाए।

नौ अक्तूबर तृतीया व चतुर्थी तिथि शनिवार विशाखा/अनुराधा नक्षत्र:-दुखों के नाश व सांसारिक कष्टों से मुक्ति के लिए चार व पांच वर्ष की कन्या का मां चंद्रघंटा/कुष्मांडा के रूप में पूजन कर दूध से निर्मित पदार्थों व मालपुए का भोग अर्पित करें।  

10 अक्तूबर रविवार पंचमी तिथि व अनुराधा नक्षत्र:- विद्यार्थियों को परीक्षा में सफलता व मनोकामना पूर्ति के लिए छह वर्ष की कन्या का मां स्कंदमाता के स्वरूप में पूजन कर माखन का भोग लगाएं।
 

11 अक्टूबर सोमवार षष्ठी तिथि व ज्येष्ठा नक्षत्र:- चारों पुरुषार्थ व रूप लावण्य की प्राप्ति के लिए सात वर्ष की कन्या का मां कात्यायनी के स्वरूप में पूजन कर मिश्री व शहद का भोग समर्पित करें। 

12 अक्तूबर मंगलवार, सप्तमी तिथि व मूल नक्षत्र:- नवग्रह जनित बाधाएं व शत्रुओं के नाश के लिए आठ वर्ष की कन्या का मां कालरात्रि के स्वरूप में पूजा अर्चना कर दाख, गुड़ व शक्कर का नैवेद्य अर्पित करें।

13 अक्तूबर बुधवार अष्टमी तिथि व पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र:- नौ वर्ष की कन्या का महागौरी स्वरूप में पूजन कर गाय के घी से निर्मित पदार्थ व  श्रीफल का भोग लगाये।

14 अक्तूबर गुरुवार, नवमी तिथि व उत्तराषाढ़ा नक्षत्र :- परिवार में सुख समृद्धि, भय नाश व मनोकामना पूर्ति के लिए 10 वर्ष की कन्या का मां सिद्धिदात्री व नवदुर्गा स्वरूप में पूजन कर खीर, हलवा व सूखे मेवे का भोग लगाए। 

अष्टमी व नवमी को कुलदेवी पूजन का भी विधान है। नवरात्रि में अभ्यंग स्नान, घट स्थापना, ज्वारे का रोपण, प्रतिमा पूजा, चंडीपाठ, उपवास व हवन पूजन का ही विशेष महत्व है। सभी क्रियाएं शुद्धता, पवित्रता के श्रद्धा भक्ति पूर्वक से किये जाने से ही वांछित फल की प्राप्ति सम्भव है।
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