श्री पारस अस्पताल दमघोंटू मॉकड्रिल प्रकरण: बिना जांच भर्ती मरीजों का किया कोरोना का इलाज

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Fri, 16 Jul 2021 12:16 AM IST

सार

26 अप्रैल की सुबह पांच मिनट की मॉकड्रिल में 22 मौतों के आरोप लगे। प्रशासनिक जांच में 16 मौतों की पुष्टि की गई। 26 व 27 अप्रैल को जिन 16 मौतों के आंकड़े प्रशासन ने जारी किए हैं उनमें पांच मरीज ऐसे हैं जिनकी कोविड जांच नहीं की गई। 
श्री पारस अस्पताल आगरा
श्री पारस अस्पताल आगरा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

श्री पारस अस्पताल में संक्रमितों के उपचार में भी लापरवाही बरती गई। बिना जांच भर्ती मरीजों का कोविड इलाज किया गया। रेमडेसिविर से लेकर ऑक्सीजन व अन्य दवाओं के नाम पर लाखों रुपये का बिल बना। आरोप है कि कोरोना मृत्यु के आंकड़े छिपाने के लिए यह बाजीगरी की गई। ऐसे में अस्पताल संचालक के साथ प्रशासन व स्वास्थ विभाग की भूमिका भी संदिग्ध हो गई है।
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26 अप्रैल की सुबह पांच मिनट की मॉकड्रिल में 22 मौतों के आरोप लगे। प्रशासनिक जांच में 16 मौतों की पुष्टि की गई। 26 व 27 अप्रैल को जिन 16 मौतों के आंकड़े प्रशासन ने जारी किए हैं उनमें पांच मरीज ऐसे हैं जिनकी कोविड जांच नहीं की गई। छीपीटोला निवासी 79 वर्षीय वृद्ध की दो दिन में मौत हो गई। ऑक्सीजन सेचुरेशन 42 था।
आकस्मिक वार्ड में भर्ती कोविड संदिग्ध बुजुर्ग ने 26 अप्रैल को दम तोड़ दिया। मौत का कारण श्वसन तंत्र फेल होना व मधुमेह बताया गया। शिकोहाबाद निवासी 60 वर्षीय महिला के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। तीन दिन भर्ती मरीज महिला की 26 अप्रैल को मृत्यु हो गई। महिला की कोरोना जांच नहीं की गई। 
 

मैनपुरी निवासी 26 वर्षीय सनोज कुमार को तेज बुखार, सांस की तकलीफ थी, लेकिन उसका भी बिना जांच के किए कोविड इलाज किया गया। दो दिन में युवक की मृत्यु हो गई। ये महज चंद उदाहरण है आंकड़ों की विडंबना के। जिनसे साबित हो रहा है कि संक्रमण की वास्तविक स्थिति छिपाने में भी श्री पारस प्रबंधन ने कसर नहीं छोड़ी। 

पिछले साल भी छिपाई थी हकीकत
ताजनगरी में जब पहली बार संक्रमण ने दस्तक दी, तब श्री पारस अस्पताल ने संक्रमितों के बारे में प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग को नहीं बताया था। पिछले साल भी हकीकत छिपाई। 11 जिलों में मरीज मिले तब संक्रमण फैलाने पर अस्पताल सील किया किया था। छह महीने तक श्री पारस सील रहा। महामारी एक्ट का मुकदमा लंबित है।

सोशल मीडिया पर जारी है ‘न्यायनीति’
पिछले 15 दिनों से श्री पारस को लेकर पीड़ितों ने सोशल मीडिया पर न्यायनीति के नाम से मुहिम छेड़ रखी है। जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों से सवाल पूछे जा रहे हैं। 15 दिन में 25 हजार से अधिक लोग इस पेज का लाइक कर चुके हैं।
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