श्री पारस अस्पताल दमघोंटू मॉकड्रिल: डॉ. अरिन्जय जैन ने अदालत में किया आत्मसमर्पण, मिली जमानत

अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Wed, 27 Oct 2021 12:04 AM IST

सार

श्री पारस अस्पताल का ऑक्सीजन मॉकड्रिल का वीडियो वायरल होने के बाद आईएमए की कमेटी भी गठित की गई थी। लेकिन कमेटी ने भी मेहरबानी दिखाई। 
आगरा दीवानी में वकीलों के साथ डॉ. अरिंजय जैन (दाएं से पहले)
आगरा दीवानी में वकीलों के साथ डॉ. अरिंजय जैन (दाएं से पहले) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

आगरा के बाईपास स्थित श्री पारस अस्पताल में ऑक्सीजन की मॉकड्रिल के वायरल वीडियो मामले में संचालक डॉक्टर अरिन्जय जैन ने मंगलवार को कोर्ट में समर्पण किया। सीजेएम प्रदीप कुमार सिंह ने आरोपी के 20-20 हजार रुपये के दो-दो जमानती और इतनी राशि का व्यक्तिगत बंध पत्र (मुचलका) प्रस्तुत करने पर रिहाई के आदेश कर दिए। इस मामले में उप चिकित्सा अधिकारी ने मुकदमा दर्ज कराया था। 
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सात जून को श्री पारस अस्पताल के संचालक डॉ. अरिन्जय जैन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसमें ऑक्सीजन की कमी और मॉकड्रिल की बात कही थी। वीडियो वायरल होने के बाद कई पीड़ित सामने आए थे। उन्होंने ऑक्सीजन की कमी से मरीजों की मौत का आरोप लगाया था। कोर्ट में प्रार्थनापत्र देकर मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी।


प्रशासन ने कहा था, ऑक्सीजन की नहीं थी कमी 
आठ जून को वीडियो के मामले में उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आरके अग्निहोत्री ने थाना न्यू आगरा में मुकदमा दर्ज कराया। इसमें कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से वीडियो वायरल हुआ। इसमें डॉक्टर अरिन्जय जैन ने ऑक्सीजन की कमी को लेकर कहा था कि मोदी नगर, गाजियाबाद स्थित प्लांट पर भी ऑक्सीजन नहीं है। मॉकड्रिल की बात कही थी, जबकि जिला प्रशासन की ओर से अस्पतालों को पर्याप्त आक्सीजन उपलब्ध कराई गई थी। डॉ. अरिन्जय जैन के कथित बयान से आम जनमानस में भ्रम की स्थिति पैदा हुई। 
 

पुलिस ने थाने से दी थी जमानत
उप चिकित्सा अधिकारी की तहरीर पर थाना न्यू आगरा में श्री पारस अस्पताल के संचालक डॉ. अरिन्जय जैन के खिलाफ धारा 188, 505, आपदा अधिनियम की धारा 52, 54 और महामारी अधिनियम की धारा-तीन के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। 19 जून को मामले में सात साल से कम सजा का प्रावधान होने पर डॉ. अरिन्जय जैन को थाने से जमानत दे दी गई। इसके बाद पुलिस ने पिछले दिनों कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया। सीजेएम ने आरोपपत्र पर संज्ञान लेते हुए आरोपी को मुकदमे के विचारण के लिए कोर्ट में तलब किया था। आरोपी डॉ. अरिन्जय जैन ने वरिष्ठ अधिवक्ता केके शर्मा और सुब्रत मेहरा के माध्यम से कोर्ट में कथन किया कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है। उस पर मॉकड्रिल कर 22 लोगों की हत्या का आरोप आधारहीन है। मेडिकल बोर्ड की जांच रिपोर्ट पेश की। आरोपी ने खुद को बीमार भी बताया। सीजेएम ने आरोपी के को 20-20 हजार के दो-दो जमानती और इसी राशि का व्यक्तिगत बंधपत्र पर रिहाई के आदेश किए। 

डीवीआर और मोबाइल की रिपोर्ट भी नहीं ले पाई पुलिस 
डॉ. अरिन्जय जैन के खिलाफ दर्ज केस में पुलिस ने शुरू से ही लापरवाही बरती। अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों के डीवीआर को जब्त नहीं किया गया। इस संबंध में मामला मीडिया में आने के बाद पुलिस हरकत में आई। डीवीआर को जब्त किया गया। कई दिन तक डीवीआर लखनऊ से लेकर आगरा लैब के बीच घूमती रही। बाद में डीवीआर को लखनऊ फॉरेंसिक लैब भेजा गया। इसकी रिपोर्ट अब तक नहीं आ सकी है। वहीं पुलिस ने एक युवक और सराफ का मोबाइल भी जब्त किया था। इन मोबाइल से ही वीडियो बनाने का शक था। वीडियो को फॉरेंसिक लैब भेजा गया। मगर, अब तक इन मोबाइल की रिपोर्ट नहीं आ सकी है। 

आगरा: श्री पारस अस्पताल पर आईएमए भी मेहरबान, महीनेभर में जारी नहीं की दमघोंटू मॉकड्रिल की रिपोर्ट
 
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