चांदनी रात में कल से होगा ताज का दीदार

Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sun, 17 Oct 2021 02:12 AM IST
Taj will be visible from tomorrow in the moonlit night
Taj will be visible from tomorrow in the moonlit night - फोटो : a
विज्ञापन
ख़बर सुनें
आगरा। शरद पूर्णिमा पर चांदनी रात में ताजमहल का दीदार सोमवार से शुरू हो जाएगा। चांदनी में नहाए संगमरमरी शाहकार की एक झलक पाने के लिए सैलानी पूरे साल इस दिन के इंतजार में रहते हैं। इस बार पांच दिन की जगह शरद पूर्णिमा पर चार दिन ही दीदार किया जा सकेगा। दरअसल, पांचवें दिन शुक्रवार है, जिस वजह से ताजमहल बंद रहेगा। सोमवार से बृहस्पतिवार के बीच रात में 8:30 बजे से 11 बजे तक कुल पांच स्लॉट में ताजमहल में रात्रि दर्शन के लिए पर्यटक प्रवेश कर पाएंगे।
विज्ञापन

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के रिकॉर्ड में इस बार शरद पूर्णिमा 20 अक्तूबर को है। कोरोना प्रोटोकॉल और पाबंदियों क े कारण इस बार पांच स्लॉट ही रहेंगे। 30 मिनट के स्लॉट में 50-50 पर्यटकों के बैच को प्रवेश दिया जाएगा। नाइट कर्फ्यू में ढील मिलने पर स्लॉट की संख्या 5 से बढ़कर 8 हो सकती है लेकिन अभी तक एएसआई पांच स्लॉट की बुकिंग ही करने जा रहा है।

सफेद संगमरमर से तामीर ताजमहल पर जब शरद पूर्णिमा पर चांद की दूधिया रोशनी पड़ती है तो इसका सौंदर्य और निखर उठता है। ताज की पच्चीकारी में रंगीन कीमती पत्थर लगे हैं जो चांद की रोशनी एक खास एंगल पर पड़ने पर चमकते हैं। इन नगीनों का चमकना ‘चमकी’ के नाम से चर्चित हो गया। वर्ष 1984 में ताजमहल के रात में बंद होने से पहले शरद पूर्णिमा पर पूरी रात चमकी का मेला लगता था, जो पांच नहीं बल्कि सात दिनों तक चलता था।
शरद पूर्णिमा पर पांच दिनों तक ताजमहल रात में पर्यटकों के लिए खोला जाता है। सोमवार से ताज का रात्रि दर्शन शुरू हो जाएगा लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक एक दिन पहले टिकटों की बुकिंग शुरू हो जाएगी। अधीक्षण पुरातत्वविद् राजकुमार पटेल के मुताबिक रविवार को एएसआई के माल रोड स्थित ऑफिस पर बने काउंटर से टिकटों की बिक्री शुरू हो जाएगी। भारतीय पर्यटकों को रात्रि दर्शन के लिए 510 रुपये, विदेशी पर्यटकों को 750 रुपये और 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए 500 रुपये का टिकट खरीदना होगा।
शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता और छात्र संघ के अध्यक्ष रह चुके अचल शर्मा बताते हैं कि 1960-70 के दशक में शरद पूर्णिमा पर ताज पर लक्खी मेला लगता था। इसमें शरद पूर्णिमा से एक दिन पहले और एक दिन बाद तक इतनी भीड़ रहती थी कि ताज में प्रवेश के लिए घंटों तक इंतजार करना होता था। ताजमहल के रॉयल गेट के बाहर फोरकोर्ट में जो चार बागीचे हैं, उनमें रेहड़ी वाले, खोमचे वाले आलू टिक्की और खाने-पीने का सामान बेचते थे। अंदर पूरी रात परिवार के साथ लोग चमकी के मेले में रहते थे। तब युवाओं की आवाजें ‘चमकी, वो चमकी’ की आती रहती थीं। यह बताते हुए उनका चेहरा चमकी की यादों ने चमक गया। चेहरे पर मुस्कराहट आ गई।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00