महान क्रांतिकारी महावीर सिंह राठौर की जयंती आज, सेल्युलर जेल में भूख हड़ताल पर रहते हुए निकले थे प्राण

Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Thu, 16 Sep 2021 12:04 AM IST
कासगंज। स्वतंत्रत संग्राम सेनानी अमर बलिदानी महावीर सिंह राठौर
कासगंज। स्वतंत्रत संग्राम सेनानी अमर बलिदानी महावीर सिंह राठौर - फोटो : KASGANJ
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कासगंज। आजादी के आंदोलन में जिले के स्वतंत्रता सेनानियों की एक से बढ़कर एक भूमिका रही। इनमें पटियाली तहसील क्षेत्र के शाहपुर टहला गांव में जन्में शहीद महावीर सिंह राठौर का नाम स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में सम्मान के साथ लिया जाता है। बालपन से ही कुछ कर गुजरने की इच्छा ने उन्हें महान बलिदानी बना दिया। शहीद भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव के साथ उन्होंने क्रांति की पटकथा में कई अध्याय जोड़े। वे दिल्ली असेंबली में बम फेंकने एवं ब्रिटीश अफसर सांडर्स के हत्याकांड में शामिल रहे।
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महावीर सिंह किशोर उम्र से ही स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सेदारी करने लगे। किशोर उम्र में बच्चों की टोलियां बनाकर उन्होंने अमन सभा में ब्रिटिश अफसरों के सामने अंग्रेजी हुकूमत के विरोध में नारे लगाए और महात्मा गांधी के समर्थन में नारेबाजी की। इस वाकये के बाद ब्रिटिश हुकूमत ने उन्हें विद्रोही घोषित कर दिया। महावीर सिंह के मन में धधकी आजादी की ज्वाला और तेज होने लगी और वे निरंतर आजादी की धुन में लगे रहे। इंटरमीडिएट की शिक्षा हासिल करने के बाद वह उच्च शिक्षा के लिए कानपुर के डीएवी कॉलेज में पहुंचे। जहां चंद्रशेखर आजाद के संपर्क में आए और उनकी सोशलिस्ट रिपब्लिक एसोसिएशन के सदस्य बन गए। यहीं उनका परिचय भगत सिंह से हुआ और स्वतंत्रता सेनानियों का कारवां बढ़ता चला गया।

1929 में दिल्ली की असेंबली में बम फेंका गया और अंग्रेजी अफसर सांडर्स की हत्या की गई। इन दोनों ही मामलों में भगत सिंह, राजगुरु सुखदेव, बटुकेश्वर दत्त सहित उन्हें गिरफ्तार किया गया। मुकदमे की सुनवाई लाहौर में हुई। इस मामले में महावीर सिंह को भगत सिंह का सहयोग करने में आजीवन कारावास का दंड सुनाया गया।
ब्रिटीश सरकार ने उन्हें पंजाब, तमिलनाडु की जेलों में रखा। इसके बाद 1933 में उन्हें अंडमान की सेल्यूलर जेल में रखा गया। क्रांतिकारियों के साथ अंडमान की जेल में महावीर सिंह ने भूख हड़ताल की। अंग्रेजों ने भूख हड़ताल छुड़वाने के लिए उनके मुंह में जबरन दूध डालने का प्रयास किया, लेकिन महावीर सिंह निरंतर विरोध करते रहे। जिससे दूध उनके फेफड़ों में चला गया और उनकी मौत हो गई। अंग्रेजों ने उनका शव पत्थरों से बांधकर समुद्र में प्रवाहित कर दिया। इस तरह से 16 सितंबर 1904 में जन्मे महावीर सिंह 29 वर्ष की अल्पायु में ही वीरगति को प्राप्त हो गए।
कई जगह लगी हैं प्रतिमाएं
बलिदानी महावीर सिंह राठौर की शहादत की स्मृति में देश के कई हिस्सों में प्रतिमाएं लगी हुई हैं। उनके गांव शाहपुर टहला में प्रतिमा लगी हुई है वहीं पटियाली में भी प्रतिमा स्थापित है। अंडमान की सेल्यूलर जेल में भी प्रतिमा स्थापित है। स्वतंत्रता आंदोलन के जानकार अमित तिवारी ने बताया कि अब शहीद के वशंज राजस्थान में रहते हैं जहां बड़े कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं। जन्मस्थली के नाते शहीद महावीर सिंह हमारे जिले के गौरव हैं।
कासगंज। स्वतंत्रत संग्राम सेनानी अमर बलिदानी महावीर सिंह राठौर की प्रतिमा
कासगंज। स्वतंत्रत संग्राम सेनानी अमर बलिदानी महावीर सिंह राठौर की प्रतिमा- फोटो : KASGANJ

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