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हाईकोर्ट: पीड़ित पक्ष को नोटिस बगैर जमानत अर्जी पर नहीं हो सकती सुनवाई

 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किशोर न्याय कानून के तहत जमानत अर्जी की सुनवाई से पहले पीड़ित/शिकायतकर्ता को सुनवाई का अवसर दिया जाना जरूरी है। हाईकोर्ट में दाखिल पुनरीक्षण अर्जी पर जमानत पर रिहा करने की सुनवाई बिना शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किए नहीं की जा सकती। कोर्ट ने शिकायतकर्ता विपक्षी को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा है।

यह आदेश न्यायमूर्ति डॉ. वाई के श्रीवास्तव ने हत्या के आरोपी नाबालिग की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि किशोर न्याय कानून के तहत गिरफ्तारी के बाद किशोर आरोपी को लॉकअप या जेल नहीं भेजा जाएगा। उसे बाल कल्याण पुलिस को सौंपा जाएगा और 24 घंटे में बोर्ड के सामने पेश किया जाएगा, जहां से उसे प्रोवेशन अधिकारी के संरक्षण में सुरक्षा के साथ आश्रय स्थल में रखा जाएगा।

कोर्ट ने कहा कि किशोर अभियुक्त को जमानत पर रिहा करने से इनकार किया जा सकता है। ऐसा करते समय देखा जाएगा कि छूटने के बाद वह कहीं अपराधियों से मिल तो नहीं जाएगा। उसे नैतिक, शारीरिक व मानसिक खतरा तो नहीं होगा। रिहाई न्याय हित के विरुद्ध तो नहीं है। कोर्ट ने कहा कि किशोर को गैर जमानती अपराध में जमानत पाने का विधिक अधिकार नहीं है। यह न्यायाधीश के विवेक पर निर्भर करता है।

मथुरा के वृंदावन थानाक्षेत्र में पीट पीट कर मार डालने के आरोप में 22 सितंबर 20 को एफआईआर दर्ज कराई गई। आरोपी मृतक को तब तक पीटते रहे जब तक मौत नहीं हो गयी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पाया गया कि सिर में गंभीर चोटें के कारण मौत हुई। पुलिस ने याची सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। किशोर न्याय बोर्ड ने याची की आयु 16 वर्ष 6 माह 16 दिन बताई।

जिला प्रोबेशन अधिकारी ने बोर्ड को रिपोर्ट दी कि याची पर परिवार का नियंत्रण नहीं है। उसके अपराधियों के साथ जाने की संभावना है। इसपर कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर दी, अपील भी खारिज हो गई। हाईकोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की गई थी। सवाल उठा कि क्या बिना पीड़ित पक्ष को नोटिस जारी किए जमानत अर्जी की सुनवाई की जा सकती है। कोर्ट ने कहा जमानत अर्जी पर पीड़ित पक्ष को सुना जाना जरूरी है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट : गोवध निरोधक कानून में वाहन जब्त करने का कोर्ट को अधिकार

 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि गोवध निरोधक कानून के तहत कोर्ट को वाहन जब्त करने का आदेश देने का अधिकार है। इसलिए जब्त वाहन को मुक्त करने की अर्जी खारिज करने के अधीनस्थ अदालतों के आदेश विधि सम्मत है।

हाईकोर्ट ने जब्त वाहन मुक्त कराने की अर्जियों पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि कानून के तहत कोर्ट को वाहन को जब्त करने का अधिकार है। यह आदेश न्यायमूर्ति डा वाईके श्रीवास्तव ने यास मोहम्मद की याचिका पर दिया है।


गोवध निरोधक कानून के तहत बलिया के बैरिया थाने में 21 सितंबर2020 को एफआईआर दर्ज कराई गई थी। याची ने जब्त वाहन को मुक्त कराने की अर्जी दाखिल की। जिसे एसीजेएम बलिया ने खारिज कर दी। पुनरीक्षण अर्जी भी खारिज कर दी गई।

दोनों आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि कानून के तहत गाय, बैल, सांड़ को वध के लिए वाहन से ले जाना अपराध है, जो दंडनीय है। वाहन जब्त किया जा सकता है।
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नरेंद्र गिरि मौत प्रकरण : शक की सुई विद्यार्थियों-सेवादारों की ओर, महंत की मौत के समय मठ में नहीं था कोई साधु

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत के पीछे सेवादारों और विद्यार्थियों की ओर शक की सुई घूमने लगी है। इसलिए कि उस दिन बाघंबरी मठ में निरंजनी अखाड़े का कोई साधु मौजूद नहीं था। एक साधु था भी तो वह बड़े हनुमान मंदिर की व्यवस्था में लगा था। ऐसे में मौत का राज उन्हीं विद्यार्थियों, सेवादारों के बीच माना जा रहा है,जो महंत की सेवा में होने के साथ ही उनके करीब भी थे।

शाम पांच बजे मठ के आगंतुक कक्ष में मौत के दिन महंत की दिनचर्या आम दिनों की तरह सामान्य होने की बात कही जा रही है। किसी वजह से उनके असहज होने या फिर डिप्रेशन में रहने की बात इसलिए भी किसी को हजम नहीं हो रही है, क्योंकि एक दिन पहले ही डिप्टी सीएम केशव मौर्य की मौजूदगी में भाजपा सरकार में विकास और कानून-व्यवस्था, हिंदुत्व की रक्षा को लेकर उन्होंने एक न्यूज चैनल को साक्षात्कार दिया था, जिसमें वह बेहद प्रसन्न मुद्रा में नजर आ रहे हैं।
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नरेंद्र गिरि की मौत का मामला : आखिरी वसीयत बदलवाने का था महंत पर दबाव

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत के पीछे बाघंबरी गद्दी मठ की आखिरी वसीयत भी हो सकती है। इस दूसरी और आखिरी वसीयत की महंत को आखिर जरूरत क्यों पड़ी? अपने पहले उत्तराधिकारी को लेकर उनका भरोसा कब और किन वजहों से टूटा? इस पूरे रहस्य को उनके प्रिय शिष्य आनंद गिरि के आस्ट्रेलिया कनेक्शन से जोड़कर देखा जा रहा है। पता चला है कि इसी आखिरी वसीयत को बदलने के लिए महंत पर दबाव बनाया जा रहा था। किसी भी हद तक जाकर महंत को वसीयत बदलने के लिए मजबूर करने वाले कौन थे? अब यह बड़ा सवाल हो गया है।

मठ की अपार संपदा को लेकर महंत की आखिरी वसीयत ही इस विवाद की जड़ बताई जा रही है। सर्वोच्च धार्मिक संस्था अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष के तौर पर नरेंद्र गिरि ताकतवर भी थे और बेशुमार दौलत वाली गद्दी पर आसीन होने की वजह से वैभवशाली भी थे। वर्ष 2000 में पहली बार उनके शिष्य बने राजस्थान के भीलवाड़ा निवासी अशोक कुमार चोटिया निरंजनी अखाड़े में संन्यास दीक्षा ग्रहण करने के बाद आनंद गिरि बनकर उनकी सेवा में लग गए। 

तब मठ के संपत्ति विवाद में कई बार साहस दिखाकर वह महंत नरेंद्र गिरि का दिल जीतने में कामयाब हो गए थे। इसी करीबी की वजह से वर्ष 2011 में महंत नरेंद्र गिरि ने आनंद को अपना उत्तराधिकारी बना दिया। इसके लिए उन्होंने आनंद के नाम वसीयत कर दी। इस बीच आनंद गिरि की बढ़ती महत्वाकांक्षा ने गुरु से दूरियां बनानी शुरू कर दीं। इस रिश्ते में दरार कुंभ-2019 से ही आनी शुरू हो गई थी। इस बीच आस्ट्रेलिया में दो विदेशी महिलाओं से अभद्रता के आरोप में आनंद गिरि की गिरफ्तारी ने गुरु-शिष्य के रिश्ते की जड़ों में मट्ठा डालने का काम किया। बदनामी के वजह से यह दूरियां महंत के दिल तक बन गईं। 

शायद यही वजह थी कि चार जून 2020 को महंत नरेंद्र गिरि ने आनंद गिरि के हक में किए गए उत्तराधिकार को निरस्त करते हुए बलवीर गिरि के नाम दूसरी वसीयत कर दी। इसी दूसरी वसीयत का जिक्र उनके सुसाइड नोट में भी है। अब कहा जा रहा है कि इसी दूसरी वसीयत को बदलवाने के लिए महंत पर दबाव बनाया जा रहा था। इस वसीयत को बदलने के लिए महंत को मजबूर करने की कोशिशें की जा रही थीं। इस कुचक्र में मठ के कौन-कौन से लोग शामिल थे, यह जांच का हिस्सा है।

सुसाइड नोट पर महाराज की असली हैंडराइटिंग बता चुके हैं बलवीर
महंत की मौत के दूसरे दिन मठ पहुंचने वाले बलवीर गिरि ने दावा किया था कि सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग उनके गुरु महंत नरेंद्र गिरि की ही है। उस पर किए गए हस्ताक्षर को भी वह नरेंद्र गिरि का ही बता रहे थे। लेकिन बाद में वह अपने बयान से पलट गए और कहने लगे कि वह अपने गुरु का हस्ताक्षर नहीं पहचानते। बलवीर गिरि उत्तराखंड के निवासी हैं। वह वर्ष 2005 में निरंजनी अखाड़े में संन्यास ग्रहणकर साधु बने। वर्ष भर से बलवीर गिरि मठ की गतिविधियों में काफी सक्रिय हो गए थे और उनका दखल भी बढ़ गया था। 
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नरेंद्र गिरी मौत मामलाः आनंदगिरी, आद्या और संदीप काे कस्टडी रिमांड में लेकर सीबीआई ने शुरू की पूछताछ

महंत नरेंद्र गिरि खुदकुशी कांड में तीनों आरोपियों को मंगलवार की सुबह कस्टडी रिमांड में लेकर सीबीआई ने पूछताछ शुरू कर दी। तीनों को सुबह साढ़े नौ बजे नैनी जेल से पुलिस लाइन ले जाया गया। तीनों से सीबीआई की टीम ने दिन भर पूछताछ की। इस दौरान उनके वकीलों को भी मिलने की अनुमति नहीं दी गई थी। 

सीबीआई की अर्जी पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने तीनों आरोपियों की कस्टडी रिमांड 28 सितंबर की सुबह नौ बजे से चार अक्टूबर की शाम पांच बजे तक दी है। सीबीआई मंगलवार की सुबह करीब 9 : 20 बजे पहुंची और दस मिनट बाद तीनों आरोपियों को वज्र वाहन में बिठाकर पुलिस लाइन ले गई।

इससे पहले आनंद गिरि समेत तीनों आरोपियों का जेल स्थित अस्पताल में मेडिकल और कोरोना का परीक्षण करा दिया गया था। सीबीआई ने आनंद गिरि, आद्या तिवारी और संदीप तिवारी से दिन भर पूछताछ की। तीनों से तथाकथित वीडियो, ब्लैकमेलिंग, मठ से जुड़े विवाद और महंत से संबंध खराब होने के कारणों के बोर में भी विस्तार से पूछताछ की गई। पहले तीनों को साथ बैठाया गया था। बाद में अलग अलग पूछताछ की गई। इस दौरान आरोपियों के वकीलों को भी वहां नहीं आने दिया गया था। न ही किसी स्थानीय अधिकारी वहां मौजूद रहने की परमीशन दी गई थी। 

आरोपियों को लेकर हरिद्वार जा सकती है सीबीआई 

प्रयागराज। सीबीआई तीनों आरोपियों को लेकर हरिद्वार जा सकती है। सीबीआई ने अदालत को दी गई अर्जी में कहा था कि आरोपियों से इलेक्ट्रानिक उपकरण बरामद करना केस के खुलासे के लिए बहुत जरूरी है। आनंद गिरि के हरिद्वार स्थित आश्रम से मोबाइल लैपटॉप बरामद करने के लिए पुलिस आरोपियों को लेकर वहां जा सकती है। 
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नरेंद्र गिरी मौत मामलाः सीबीआई ने आद्या और संदीप से पूछा, महंत से क्या दुश्मनी थी?

सीबीआई ने पुलिस लाइन में आद्या तिवारी और उसके बेटे संदीप से भी पूछताछ की। दोनों के नाम सुसाइड नोट में हैं। सीबीआई ने पूछा कि उनकी महंत से क्या दुश्मनी थी। दोनों रोने लगे, बोले ‘हमारी बड़े महाराज से कोई दुश्मनी नहीं थी। वही हमारे अन्नदाता थे’। महंत ने सुसाइड नोट में उनके नाम क्यों और कैसे लिख दिए, वे नहीं जानते। 

नैनी के रहने वाले आद्या तिवारी हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी थे। भगवान की आरती, प्रसाद और चढ़ावा की जिम्मेदारी उनकी ही थी। संदीप की बाहर फूल माला और प्रसाद की दुकान थी। जब नरेंद्र गिरि और आनंद गिरि के रिश्ते में बिगड़े तो संदीप खुलकर आनंद गिरि के साथ हो गया था। आनंद और संदीप की उम्र लगभग समान है। इसी कारण उनमें दोस्ती का रिश्ता हो गया था।

इसी के बाद नरेंद्र गिरि का संदीप और आद्या से रिश्तों में बिगाड़ होेने लगा था। महंत ने पहले संदीप को मंदिर के बाहर दुकान हटवा दी फिर आद्या से कहा कि वह अब बूढ़े हो गए हैं। उनसे आरती, चढ़ावा और प्रसाद की जिम्मेदारी छीन ली गई हालांकि मंदिर आने से आद्या को नहीं रोका गया था। आद्या और संदीप ने बताया कि उनकी महंत से कोई दुश्मनी नहीं है। वे आनंद गिरि से बात जरूर करते थे लेकिन उनकी दुश्मनी के बारे में उनसे कोई मतलब नहीं था। 
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नरेंद्र गिरी मौत मामलाः सीबीआई टीम ने चार घंटे तक की मठ के कमरे की जांच

सीबीआई की एक टीम आरोपियों से पूछताछ में जुटी थी तो दूसरी टीम मंगलवार की सुबह मठ पहुंच गई थी। सीबीआई की फोरेंसिक विंग ने मठ के उस कमरे में चार घंटे तक जांच की जहां महंत ने फांसी लगाई थी। टीम उनके निजी कक्ष में भी गई। वहां भी कई घंटे तक सीबीआई जांच करती रही।

 सीबीआई टीम ने तीनों आरोपियों को आज ही कस्टडी रिमांड में लिया था। इसके बाद भी दिन में एक टीम सुबह मठ पहुंच गई थी। टीम सबसे पहले गेस्ट हाउस के उस कमरे में गई थी, जहां उनकी लाश फंदे से लटकी मिली थी। कमरे में सीबीआई चार घंटे तक रही। इसके बाद सीबीआई महंत के निजी कक्ष में गई। वहां भी टीम ने घंटों छानबीन की। सीबीआई की टीम ने इस दौरान सेवादारों से कुछ सवाल भी पूछे थे। सूत्रों के मुताबिक सीबीआई की फोरेंसिक जांच पूरी हो गई थी। आज कुछ वस्तुओं की दोबारा फोरेंसिक जांच की गई। 
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति का खाका तैयार, 2023 से होगी लागू, ‘राष्ट्र सेवा’ होगा अनिवार्य विषय

मठ बाद्यम्बरी गद्दी।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) और इसके संघटक महाविद्यालयों में ‘राष्ट्र सेवा’ अनिवार्य विषय होगा और इस विषय की परीक्षा प्रत्येक छात्रों को उत्तीर्ण करनी होगी। यह जानकारी कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने मंगलवार को सभी संघटक महाविद्यालयों के प्राचार्यों के साथ हुई बैठक में दी। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति का खाका तैयार कर लिया गया है और इसके तहत नया सिलेबस वर्ष 2023 से लागू किया जाएगा।

कुलपति ने बताया कि छात्रों के लिए विषय में पढ़ाई के साथ भ्रमण भी अनिवार्य  होगा। इसके लिए एनईपी ने 100 से अधिक जगहों की एक लिस्ट जारी की है, जहां छात्रों को लेकर जाया जा सकता है। भ्रमण शिक्षण के घंटे में जोड़ा जाएगा। कुलपति ने कहा कि संघटक कॉलेज विश्वविद्यालय के सिलेबस को ही लागू करेंगे।

इसमें वे उन इलेक्टिव पाठ्यक्रमों का चुनाव कर सकते हैं, जिन्हें पढ़ाने के लिए उनके पास शिक्षक और आवश्यक संसाधन मौजूद हैं। नए विषयों में कोर्स चलाने के लिए भी कॉलेज आवेदन भी कर सकते हैं और यदि वे कुछ ऐसे इंटीग्रेटेड कोर्स बनाना चाहिए जिसको वह अपने कॉलेज में चलाना चाहते हैं तो वे भी कर सकते हैं।  

डीनआर एंड दी और एनईपी कमेटी के चेयरमैन प्रोफेसर एसआई रिजवी ने नई शिक्षा नीति में हुई प्रगति के बारे में प्राचार्यों को अवगत कराया और इस विषय में उनके सुझाव भी आमंत्रित किए। उन्होंने बताया कि कई कॉलेजों में खेल के मैदान की सुविधा नहीं है और नई शिक्षा नीति में खेल एक महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए छात्रों को यह सुविधा दी जा सकती है कि अगर वे खेल के प्रशिक्षण और प्रतिभागिता से जुड़े हुए अधिकृत संस्थानों के सर्टिफिकेट लाते हैं तो इसे उनके क्रेडिट अंकों में जोड़ा जा सकेगा। 
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UPPSC: स्वास्थ्य विभाग को मिले 25 पब्लिक हेल्थ स्पेशियलिस्ट

 उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने मंगलवार को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा विभाग के तहत एलोपैथिक चिकित्साधिकारी, श्रेणी-2 (लेवल-2) पब्लिक हेल्थ स्पेशियलिस्ट के 30 पदों पर सीधी भर्ती का अंतिम चयन परिणाम जारी कर दिया। इनमें 13 पद अनारक्षित, आठ पद अन्य पिछड़ा वर्ग, छह पद अनुसूचित जाति एवं तीन पद आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित है। हालांकि अभ्यर्थी उपलब्ध न होने के कारण आयोग ने 25 पदों ही अभ्यर्थियों को अंतिम रूप से चयनित घोषित किया है।

इन पदों पर भर्ती के लिए इंटरव्यू 13, 14 एवं 15 सितंबर को आयोजित किए गए थे। साक्षात्कार के बाद आयोग ने 25 अभ्यर्थियों को श्रेष्ठताक्रम के अनुसार सफल घोषित किया है। इनमें वर्तिका अग्रवाल, उत्सव राज, अंकिता सिंह, स्मिता यादव, समीना अहमद, लाल दिवाकर सिंह, अशोक कुमार पटेल, खान इकबाल अकील, आकाश कुमार सिंह, अभिनव सिंह, कल्पना कुमारी, प्रेरणा श्रीवास्तव, पल्लवी पांडेय, दीपशिखा वर्मा, अरुण कुमार यादव, करन चौधरी, घोस अहमद, दीपेंद्र कुमार वर्मा, विजयश्री वर्मा, सुमैया अहमद, राकेश कुमार चक्रवर्ती, निशांत सिंह, अभिषेक कुमार बर्मन, रोहितास एवं प्रदीप कुमार चौधरी के नाम शामिल हैं।

आयोग के उप सचिव विनोद कुमार सिंह के अनुसार अभ्यर्थी उपलब्ध न होने के कारण अनुसूचित जाति के दो पद और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित तीन पद खाली रह गए। इन पदों पर भर्ती के लिए पुनर्विज्ञापन की संस्तुति की गई है।
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नरेंद्र गिरि की मौत मामले की सीबीआई जांच की हाईकोर्ट से निगरानी की मांग,  महिला अधिवक्ता ने दाखिल की पत्र याचिका

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत के मामले में सीबीआई जांच की न्यायिक निगरानी (ज्यूडिशियल मानीटरिंग) किए जाने की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। हाईकोर्ट की महिला वकील सहर नक़वी की तरफ से दाखिल पत्र याचिका में सीबीआई की जांच को हाईकोर्ट की निगरानी में ही कराए जाने की अपील की गई है। याचिका को हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस और रजिस्ट्रार जनरल को ई मेल के ज़रिए भेजा जा चुका है।

याचिका में कहा गया है कि महंत नरेंद्र गिरि और उनके मठ व अखाड़े के दुनिया भर में लाखों की संख्या में अनुयायी थे। लाखों लोगों की आस्था महंत नरेंद्र गिरि के साथ जुडी हुई थी। महंत का शव जिस तरह संदिग्ध हालत में पाया गया था और पुलिस के पहुंचने से पहले ही घटनास्थल पर छेड़छाड़ हुई थी, उससे तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं। कई लोग इस मामले में आशंका जता रहे हैं।

देश की सबसे बड़ी और भरोसेमंद कही जाने वाली जांच एजेंसी सीबीआई पर ज़्यादातर लोगों को भरोसा तो है, लेकिन कुछ लोगों के मन में जांच को लेकर आशंका भी है। कुछ लोग इस बात को लेकर आशंकित हैं कि सीबीआई किसी दबाव में आ सकती है या कुछ तथ्यों की अनदेखी कर जल्दबाजी व लापरवाही में जांच कर सकती है।

ऐसे में सच का सामने आ पाना और महंत की मौत के गुनहगार का राजफाश होने में मुश्किल हो सकती है। कहा गया कि सीबीआई जांच का नतीजा जो भी आएगा, उस पर कुछ लोग यकीन नहीं कर पाएंगे और उस पर सवाल खड़े करेंगे। ऐसे में हाईकोर्ट अगर अपनी निगरानी में सीबीआई से जांच कराएगा तो और समय -समय पर उससे प्रोग्रेस रिपोर्ट मांगकर ज़रूरी दिशा- निर्देश देता रहेगा तो जांच रिपोर्ट पर  उंगली नहीं उठाएगा।
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इलाहाबाद हाईकोर्टः डीएम गौतमबुद्ध नगर की निष्क्रियता से हाईकोर्ट में बढ़ रहे अनावश्यक मुकदमे

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी( रेरा) द्वारा जारी रिकवरी प्रमाण पत्र पर कोई कार्रवाई न करने पर डीएम गौतमबुद्ध नगर सुहास एलवाई को 4 अक्तूबर को अदालत में तलब कर लिया है । कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा डीएम की निष्क्त्रिस्यता से हाईकोर्ट में अनावश्यक मुकदमों का बोझ बढ़ रहा है। क्योंकि जिलाधिकारी रेरा द्वारा जारी रिकवरी सर्टिफिकेट को लेकर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं ।

गौतमबुद्ध नगर की प्रिया कपार्टी की याचिका पर कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति एमएन भंडारी और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की पीठ सुनवाई कर रही है। याची ने इको विलेज प्रोजेक्ट 4 ग्रेटर नोएडा में फ्लैट आवंटन के लिए एडवांस रकम जमा की थी। प्रोजेक्ट असफल हो गया और प्रमोटर समय पर कब्जा नहीं दे सके, जिस कारण याची ने रेरा में परिवाद दाखिल किया।

रेरा ने अग्रिम भुगतान की गई रकम वापसी के लिए रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किया। रिकवरी जिला प्रशासन के माध्यम से होनी है, मगर प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। याची ने हाईकोर्ट की शरण ली। कोर्ट का कहना था कि मामला 2 साल से अधिक पुराना है। रेरा ने रिकवरी का आदेश दिया, मगर कोई कार्रवाई नहीं की गई। कोर्ट ने डीएम को रिकवरी के सभी लंबित मामलों में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट के साथ 4 अक्तूबर को हाजिर होने का निर्देश दिया है।
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यूपीपीएसीः  एपीएस भर्ती के विवाद में फंसेगा नया विज्ञापन

अपर निजी सचिव (एपीएस) भर्ती के विवाद में नया विज्ञापन फंसेगा। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएसी) ने पाठ्यक्रम संशोधन का प्रस्ताव शासन को भेजा था, जिसे मंजूरी मिलने का इंतजार है।

इसी बीच एपीएस भर्ती-2010 और एपीएस भर्ती-2013 को लेकर विवाद हो गया। ऐसे में अगर शासन ने पाठ्यक्रम संशोधन को मंजूरी मिलती है तो अन्य विवादों के कारण आयोग के लिए नई भर्ती का विज्ञापन जारी कर पाना मुश्किल होगा। वहीं, अभ्यर्थी लगातार मांग कर रहे हैं कि नई भर्ती का विज्ञापन शीघ्र जारी किया जाएगा।

एपीएस भर्ती-2010 मामले में सीबीआई की ओर से आयोग के पूर्व परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। आरोप है कि इस भर्ती में शॉर्ट हैंड में गलती पर अतिरिक्त छूट देकर कुछ अभ्यर्थियों को अनावश्यक रूप से फायदा पहुंचाया गया।

एफआईआर दर्ज होने के बाद आयोग ने एपीएस भर्ती-2013 के तहत दो चरणों की परीक्षा निरस्त कर दी, क्योंकि इस भर्ती में भी कुछ अभ्यर्थियों को शॉर्ट हैंड में गलती पर अतिरिक्त छूट का लाभ दिया गया। हालांकि आयोग ने यह परीक्षा आठ साल बाद निरस्त की, जब इस भर्ती के तहत आखिरी चरण की कंप्यूटर ज्ञान परीक्षा बाकी रह गई थी। आयोग ने परीक्षा निरस्त करते हुए संशोधित विज्ञापन भी जारी कर दिया है।

इस बीच आठ साल से भर्ती पूरी होने का इंतजार कर रहे तमाम अभ्यर्थी अब ओवरएज होने की दहलीज पर हैं। ये अभ्यर्थी मांग कर रहे हैं कि आयोग नई भर्ती का विज्ञापन शीघ्र जारी करे। अगर नई भर्ती का विज्ञापन जारी होने में देर हुई तो ओवरएज होने वाले तमाम अभ्यर्थियों के लिए भविष्य के रास्ते बंद हो जाएंगे।

आयोग को तकरीबन ढाई सौ पदों का अधियाचन मिल चुका है। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय का आरोप है कि आयोग की लापरवाही के कारण एपीएस भर्ती के अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लगा है। प्रशांत ने आयोग के अध्यक्ष से मांग की है कि स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट की जाए और नई भर्ती शीघ्र शुरू की जाए।
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हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा टीईटी कब तक मान्य

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के प्रमाणपत्र की वैधता कितने समय तक के लिए मान्य है । कोर्ट ने 18 अक्तूबर को राज्य सरकार और एनसीटीई को इस मामले में जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

बस्ती के सुशील कुमार आजाद की याचिका पर न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने सुनवाई की । याचिका पक्ष रख रहे अधिवक्ता प्रभाकर अवस्थी और ऋषि श्रीवास्तव का कहना था की एनसीटीई ने 9 जून 21 के पत्र से सभी राज्यों को टीईटी प्रमाण पत्र की मान्यता से संबंधित नियमों को तय करने का अधिकार दिया है। यह बताया गया है कि प्रमाण पत्र की मान्यता अधिकतम 7 वर्ष तक के लिए बढ़ाई जा सकती है ।

अधिवक्ता का कहना था कि 16 जून 21 को जारी शासनादेश में कहा गया है कि राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि प्रमाण पत्र की वैधता किसी निश्चित समय सीमा के लिए नहीं होगी, बल्कि यह अभ्यर्थी के पूरे जीवन के लिए मान्य होगा। याची ने 2011 में टीईटी उत्तीर्ण किया. इसलिए उक्त शासनादेश के आलोक में उसके प्रमाण पत्र को मान्य किया जाए। कोर्ट ने राज्य सरकार के वकील को इस मामले में 18 अक्तूबर तक जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
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