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इन तीन राशियों के लिए निवेश का शुभ समय, भाग्यफल से जानें अन्य राशियों का हाल
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शादीशुदा बालिग पर अपहरण की एफआईआर रद्द, कोर्ट ने कहा- सुखी वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप गलत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि दो बालिगों के परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी करने पर अभियोजन को अपहरण का केस चलाने की अनुमति देना न केवल कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है वरन सुखी वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप करना है। ऐसा एफआईआर रद्द होने योग्य है।

कोर्ट ने इटावा की कोतवाली में अपहरण के आरोप में दर्ज प्राथमिकी व कार्यवाही को रद्द कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति डा. केजे ठाकर तथा न्यायमूर्ति अजीत सिंह की खंडपीठ ने कपिल व अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। याची अधिवक्ता दिनेश कुमार मिश्र का कहना था कि पीड़िता की उम्र 19 साल व याची की उम्र 23 साल है। दोनों बालिग हैं और अपनी मर्जी से शादी की है। किंतु लड़की के परिवार वालों ने अपहरण का केस दर्ज कराया है। याची पर अपहरण का कोई केस बनता ही नहीं है। इस पर सहमत होते हुए कोर्ट ने दर्ज एफआईआर और कार्यवाही रद्द कर दी है।
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फौजी की पिस्टल से चली गोली, एक ही हालत गंभीर

नवाबगंज थाना क्षेत्र के खागलपुर गांव में सोमवार की दोपहर फौजी अशोक कुमार गौतम ने पिस्टल से फायर कर दिया। हादसे में मिथिलेश विश्वकर्मा गंभीर रूप से घायल हो गया। ग्रामीणों ने अशोक को घेरा तो वह एक घर में घुस गया। घर पर पथराव और तोड़फोड़ कर दिया गया। पुलिस को फौजी अशोक गौतम को वहां से निकालने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। पथराव में एक दरोगा और सिपाही भी जख्मी हो गए। घटना गांव में पंचायत के दौरान हुई थी।

 उल्दा महेशगंज निवासी अशोक कुमार गौतम फौज में हवलदार है। वह बारामुला में तैनात है। पंचायत चुनाव से पहले वह छुट्टयों पर गांव आया था। सोमवार की सुबह अशोक के छोटे भाई की बाइक गांव के ही मिथिलेश विश्वकर्मा के परिवार एक लड़के से भिड़ गई थी। दोनों में झगड़ा हो गया। उस समय तो लोगों ने छुड़वा दिया लेकिन मामला न बढ़े, इस कारण मिथिलेश ने अशोक गौतम को खागलपुर में अपनी दुकान पर पंचायत के लिए बुलवाया था। मिथिलेश के समर्थन में गांव का पूर्व प्रधान भी बैठा था। वहीं बातचीत में विवाद शुरू हो गया। झगड़ा हुआ तो मिथिलेश और पूर्व प्रधान की ओर से कई लोग इकट्ठे हो गए। अशोक अकेला पड़ा तो उसने अपनी लाइसेंसी पिस्टल निकाल ली।

यह देखकर ग्रामीण और उग्र हो गए। चारों ओर से खुद को घिरा देखकर अशोक ने पहले हवाई फायर किया फिर मिथिलेश पर फायर कर दिया। मिथिलेश को गोली लगी वह गिरा तो ग्रामीणों ने उसे दौड़ा लिया। अशोक ने फिर हवाई फायरिंग और एक घर में घुसकर अंदर से कुंडी बंद कर ली। बाहर भीड़ ने घर पर पथराव शुरू कर दिया। तोड़फोड़ होती देखकर घर के मालिक ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस पहुंची और अशोक को बाहर निकाला। उसको देखकर ग्रामीणों ने फिर पथराव कर दिया जिसमें दरोगा धीरेंद्र कुमार और सिपाही ओम प्रकाश सिंह जख्मी हो गए। किसी तरह अशोक को बचाकर पुलिस थाने ले गई। मिथिलेश को तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई थी। इंस्पेक्टर नवाबगंज ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर पिस्टल बरामद कर ली गई है।


फौजी समेत पांच के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज
मिथिलेश विश्वकर्मा के भाई विमलेश की तहरीर पर पुलिस ने फौजी अशोक कुमार गौतम, उसके पिता जियालाल, विशाल, राजेंद्र और अजय कुमार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इंस्पेक्टर ने बताया कि तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर जांच की जा रही है।

पंचायत चुनाव के बाद से ही दो पक्षों में चल रही थी तनातनी
पंचायत चुनाव के बाद से ही गांव के दो पक्षों में तनातनी चल रही थी। कई दिन से वे एक दूसरे पर कमेंट कर रहे थे। सोमवार की सुबह जब फौजी के भाई और मिथिलिेश के परिवार के लड़के की बाइक आपस में भिड़ी तो झगड़ा हो गया।

मामूली विवाद में गांव में छोटी सी पंचायत हो रही थी। उसी में झगड़ा हो गया। आरोपी की फायरिंग से एक युवक घायल हो गया। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। धवल जायसवाल, एसपी गंगापार।
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भाजपा में शामिल जिला पंचायत सदस्यों की सूची पर सवाल, तीन पहुंचे सपा कार्यालय

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की मौजूदगी में 15 जिला पंचायत सदस्यों के भाजपा में शामिल होने के दावे पर सपा ने सवाल उठाए हैं। जिलाध्यक्ष योगेश चंद्र यादव ने भाजपा की ओर से जारी सूची को गुमराह करने वाला बताया। उन्होंने दावा किया कि इनमें तीन सदस्य सोमवार को पार्टी कार्यालय पहुंचे और सपा के प्रति पूरी आस्था व्यक्त की। दो अन्य सदस्य भी उनके संपर्क में हैं।

उप मुख्यमंत्री की मौजूदगी में कई जिला पंचायत सदस्यों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। भाजपा की ओर से 15 सदस्यों की सूची भी जारी की गई। इसके विपरीत सपा जिलाध्यक्ष का कहना है कि जिला पंचायत की वार्ड संख्या 41 से विजयी शकुंतला यादव, वार्ड 44 से विष्णु कुमार यादव एवं 45 से जीते रावेंद्र सिंह ने समाजवादी टोपी पहनकर फोटो खिंचवाई और शपथ ली कि वह हमेशा सपा के सिपाही रहेंगे।

उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में सपा समर्थित उम्मीदवार को वोट देने और प्रचार करने की बात कही। योगेश यादव ने दावा किया कि अध्यक्ष पद पर सपा समर्थित उम्मीदवार को 60 से अधिक मत मिलेंगे। एमएलसी डॉ.मान सिंह यादव का कहना था कि हार की डर से बौखलाए भाजपाई जोड़तोड़ में जुटे हैं लेकिन उनका मंसूबा पूरा नहीं होगा। पूर्व प्रदेश प्रवक्ता केके श्रीवास्तव, महानगर अध्यक्ष सैयद इफ्तेख़ार हुसैन, नरेंद्र सिंह, दान बहादुर मधुर आदि ने भी भाजपा की सूची पर सवाल उठाए।

सपा एक-दो दिनों में घोषित कर सकती है अध्यक्ष पद का प्रत्याशी

सपा की ओर से जिला पंचायत अध्यक्ष पद के प्रत्याशी की घोषणा एक-दो दिन में किए जाने की उम्मीद है। भाजपा की ओर से 15 सदस्यों के समर्थन के बाद सपा के सामने अपने किले को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए विगत 20 वर्षों की लड़ाई को देखें तो सदस्यों की आस्था सूबे में सत्ता परिवर्तन के साथ बदलती रही है। ऐसे में सपा की चिंता और बढ़ गई है। इसलिए अध्यक्ष पद के उम्मीदवार की तलाश तेज कर दी गई है। तोड़फोड़ को रोका जा सके। इस दौड़ में दो नाम काफी आगे बताए जा रहे हैं। इनमें से एक महिला जिला पंचायत सदस्य के पिता सपा में बड़े नेता हैं। इसके अलावा उनके पति बड़े व्यवसायी हैं। वहीं दूसरे दावेदार पार्टी के वरिष्ठ नेता रेवती रमण सिंह के करीबी हैं।

भाजपा की राह अब भी आसान नहीं

15 जिला पंचायत सदस्यों के शामिल होने के बाद भी भाजपा की अध्यक्ष पद पर काबिज होने की राह आसान नहीं दिख रही। पार्टी के 14 समर्थित प्रत्याशी विजयी हुए हैं। 15 लोगों के शामिल होने का पार्टी का दावा सच है तब भी कुल सख्या 29 सदस्य हो पाएंगे। जबकि, अध्यक्ष पद पर जीत के लिए कुल 43 सदस्यों का समर्थन चाहिए।
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हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी : राम भरोसे चल रही है उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के छोटे शहरों, कस्बों व ग्रामीण इलाकों में संक्रमण तेजी से बढ़ने तथा मरीजों के इलाज में हो रही लापरवाही पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि सूबे की स्वास्थ्य व्यवस्था राम भरोसे चल रही है। इसमें तत्काल सुधार की आवश्यकता है। कोर्ट ने मेरठ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कोविड मरीज संतोष कुमार के लापता होने में डाक्टरों और मेडिकल स्टॉफ की लापरवाही को गंभीर मानते हुए अपर मुख्य सचिव चिकित्सा व स्वास्थ्य को जिम्मेदारी तय करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को चार माह में प्रदेश के अस्पतालों में चिकित्सकीय ढांचा सुधारने और पांच मेडिकल कॉलेजों को एसजीपीजीआई स्तर का संस्थान बनाने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया है। 
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इलाहाबाद हाईकोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट

खत्म होने का नाम नहीं ले रहा अखाड़े का दंगल : आनंद गिरी बोले- गुरुजी के आचरण, महंगे शौक से बर्बाद हो रहा मठ

योगगुरु स्वामी आनंद गिरि ने अपने गुरु अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के नए चौंकाने वाले शौक से लेकर उनके आचरण तक पर अंगुली उठाई है। उनका कहना है कि मठ, अखाड़े की बेशकीमती जमीन बेचकर करोड़ों रुपये कहां खर्च करते थे, पता नहीं। सीएम को भेजे पत्र में उन्होंने कहा, वर्ष भर पहले पैसे की जरूरत बताकर लीज निरस्त कराने के लिए दबाव बनाने पर बोले थे, जमीन तो बेचनी ही पड़ेगी। उनके ड्राइवर और सुरक्षा गार्ड के नाम करोड़ों के मकान, फ्लैट हैं।

सिपाही अजय सिंह के नाम मठ के पास बिकी जमीन पर दो बड़े फ्लैट हैं। उसके नाम पर कई बेनामी संपत्ति भी खरीदी गई है। विपिन सिंह ड्राइवर को बड़ा मकान बनाकर दिया है। इससे पहले विद्यार्थी रामकृष्ण पांडेय को बड़ा मकान बनाकर देने के साथ ही मंदिर में दुकान भी दी गई। विद्यार्थी विवेक मिश्रा, मनीष शुक्ला के नाम से भी बड़ी जमीन खरीदवाने सहित उसे एक बड़ा मकान बनाकर दे दिया। अभिषेक मिश्रा को भी एक बड़ा मकान बनवा कर दिया है। मिथिलेश पांडेय को भी एक मकान और जमीन खरीदने के लिए पैसे दिए।
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स्टेज पर लगे ठुमके, कोरोना का खतरा दरकिनार कर उमड़ी भीड़

कोरोना संक्रमण  का खतरा गांवों में लगातार बढ़ रहा है लेकिन लोग इससे बचाव को लेकर जागरूक नहीं हो रहे हैं। मांडा और घूरपुर में शादी समारोह के दौरान आयोजित ऑर्केस्ट्रा डांस देखने ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान कोरोना गाइडलाइन का जमकर उल्लंघन हुआ। दोनों ही मामलों में मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। 

सोमवार को दोनों मामलों का खुलासा वीडियो वायरल होने के बाद हुआ। पहला मामला मांडा के गरेथा गांव का है जहां दिघिया चौकी अंतर्गत गरेथा गांव में डांसरों के ठुमके देखने ग्रामीणों का हुजूम उमड़ा। यहां भोला पाल पुत्र छोटे लाल पाल के घर शादी समारोह के दौरान बिना अनुमति आर्केस्ट्रा आयोजित किया गया था।

वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी का शांतिभंग में चालान कर दिया। उधर वायरल दूसरा वीडियो घूरपुर के जसरा स्थित पचखरा गांव का है। यहां प्रीतिभोज के दौरान आर्केस्ट्रा आयोजित हुआ जिसमें डांसरों के ठुमके देखने के लिए लोग उमड़े। इस दौरान न लोगों ने मास्क लगाया था और न ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया गया। एसपी  यमुनापार सौरभ दीक्षित ने बताया कि दोनों ही मामलों में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जांच पड़ताल की जा रही है।
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प्रयागराज में दिखा चक्रवाती तूफान ताउते का असर

समय से करीब एक महीने पहले देश के दक्षिणी राज्यों में तबाही मचाने वाले चक्रवाती तूफान ताउते का स्थानीय असर सोमवार को आंधी और बारिश के रूप में सामने आया। दिन में धूप-छांव का मौसम फिर शाम को तेज आंधी ने मौसम बदल दिया। कहीं-कहीं बूंदाबांदी हुई और कई इलाकों में गरज चमक के साथ तेज बारिश हुई। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि ताउते का प्रभाव अगले तीन से चार दिन तक रहेगा। मौसम विज्ञानी प्रोफेसर एचएन मिश्रा के मुताबिक इस सप्ताह मौसमी उठापटक बनी रहेगी। आंधी-तूफान, गरज चमक संग बारिश के आसार हैं। बूंदाबांदी से उमस हावी रहेगी। 

अमर उजाला ने चक्रवाती झंझावत की सक्रियता की खबर प्रकाशित सोमवार के अंक में बता दिया था कि मौसम में बदलाव होगा। इसके प्रभाव से केरल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात सहित अन्य प्रदेशोें में न केवल मौसम बदला बल्कि तबाही भी हुई। सोमवार को दिन भर बदरी, घमसी बनी रही। एक से दो बार सूरज निकला पर बादलों ने धूप पर ब्रेक लगाए रखी।

उमस भरे मौसम में किसी तरह दिन बीता पर शाम को तेज हवाएं देखते ही देखते आंधी में बदल गईं। अधिकतर इलाकों  में बिजली गुल हो गई। उमस भरी गर्मी से लोग परेशान रहे। आधे घंटे बाद राहत दी बारिश ने लेकिन बौछारें कमजोर रहीं। गंगापार और यमुनापार के कई इलाकों में तेज बारिश हुई। शहर में कहीं-कहीं बूंदाबांदी ही हुई। कहीं-कहीं दस से बीस मिनट तक बौछारें पड़ीं। रात में तापक्रम बढ़ने से उमस हावी रही।

मई में रात के न्यूनतम तापमान का रिकार्ड, पारा 28.4 

मई महीने में तापमान घटते-बढ़ते स्तर पर मापा गया। अधिकतम तापमान    24 घंटे में करीब दो डिग्री कम होकर 41.5 डिग्री से 39.5 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 27.4 डिग्री से बढ़कर 28.4 डिग्री सेल्सियस मापा गया। रात का यह न्यूनतम तापमान इस सीजन के रिकार्ड स्तर पर रहा। इससे पहले दो मई को 27.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। 

15 दिन बाद बंगाल की खाड़ी से आएगा चक्रवाती असर

मौसम विज्ञानी प्रोफेसर एचएन मिश्रा के मुताबिक चक्रवाती तूफान ताउते की आशंका थी, अब यह कुछ दिन असर दिखाएगा, लेकिन कम होगा। 15 दिन बाद बंगाल की खाड़ी से आने वाले चक्रवाती झंझावत का प्रभाव उत्तर भारत के कई राज्यों में दिखेगा। यह ताउते से ज्यादा विकराल हो सकता है। तब तेज बारिश, आंधी-तूफान ज्यादा तबाही मचा सकते हैं।
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Prayagraj Corona Update: नए संक्रमितों की संख्या घटी, मौतें भी कम

prayagraj news : सोमवार की शाम को आई तेज आंधी।
कोरोना के मामले एक दिन बढ़ रहे हैं तो दूसरे दिन कम हो रहे हैं। सोमवार को भी ऐसा ही देखा गया। रविवार के मुकाबले सोमवार को 28 मरीज कम मिले। इससे स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली है। मरने वालों का आंकड़ा भी एक दिन पहले के मुकाबले सोमवार को कम रहा। कुल पांच लोगों की मौत हुई। कोरोना के नोडल अधिकारी ने इसकी पुष्टि की। 

नोडल अधिकारी डॉ. ऋषि सहाय ने बताया कि सोमवार को जिले में कुल 10558 लोगों की कोरोना की जांच कराई गई। इसमें से कुल 164 नए संक्रमित मिले हैं। इसमें ग्रामीण इलाकों में 42 और शहरी इलाकों में 80 संक्रमित पाए गए। जबकि, एंटीजन जांच 4348 लोगों की, आरटीपीसीआर 4348 और 145 की ट्रनॉट से जांच हुई है। 209 लोगों ने प्राईवेट लैब में जांच कराई है। नए संक्रमितों की संख्या लगातार कम होने से स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय सहित निजी अस्पतालों में बेड खाली हो गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ऐसे निजी कोविड अस्पतालों को चिन्हित कर रहा है, जहां कोरोना के अब गिने-चुने मरीज रह गए हैं।
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वैक्सीन की दूसरी डोज के लिए सेंटरों पर हंगामा, पोर्टल ने दिया जवाब तो सैकड़ों लौटे

कोविशील्ड की दूसरी डोज लगवाने को लेकर सोमवार को टीकाकरण केंद्रों पर जमकर हंगामा हुआ। पोर्टल ने भी छह हफ्ते में दूसरी डोज लगाने को लेकर आवेदन को स्वीकार ही नहीं किया। इससे सेंटर्स पर पहुंचे बड़े-बूढ़े लोगों को परेशानी हुई और उन्हें बिना टीका लगवाए ही मायूस लौटना पड़ा। हालांकि जो लोग कोवैक्सीन की दूसरी डोज लगवाने पहुंचे, उनको निराश नहीं होना पड़ा। उधर, टीके की प्रथम डोज लगवाने को लेकर भी केंद्रों पर भीड़ नजर आई।

इसकी वजह से सामाजिक दूरी की धज्जियां उड़ीं। मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से लेकर कॉल्विन, डफरिन, दारागंज पीएचसी सहित ग्रामीण क्षेत्रों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भीड़ देखी गई। दूसरे जिले से भी लोग टीका लगवाने पहुंचे थे। शहरों में सेंटर न मिलने से शहरी ग्रामीण इलाकों के सेंटर्स पर टीका लगवाया। जबकि, ग्रामीणों में इसका उत्साह बहुत ही कम देखा गया। कई सेंटरों से यह भी शिकायतें सामने आईं कि रजिस्ट्रेशन कोवैक्सीन का हुआ लेकिन कोविशील्ड लगा दिया गया। कोविशील्ड जिन्हें लगी, उन्हें दूसरे टीके की डोज के लिए 12 से 16 हफ्ते का समय दिया गया। जबकि कोवैक्सीन की दूसरी डोज के लिए 28 दिन का समय आवंटित किया गया।
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कोविड घाट पर बेटी ने पिता को दी मुखाग्नि, अदा किया बेटे का फर्ज

बचपन में जिन बांहों में खेली-कूदी आज उसे ही मुखाग्नि देकर बेटी ने अपने को महरूम कर लिया। महामारी का ऐसा झटका लगा कि सिर से बाप का साया उठ गया। मां ने तो पहले ही साथ छोड़ दिया था। अब पिता के न होने से बेटी अनाथ हो गई। सोमवार को दारागंज घाट पर यह नजारा देखने वालों का कलेजा कांप उठा। 

नैनी के रहने वाले श्याम सुंदर तिवारी की तबीयत कई दिन पहले ही खराब हो गई थी। सोमवार को उनका निधन हो गया। श्याम सुंदर को कोई बेटा न होने से उनकी छोटी बेटी पूर्णिमा तिवारी ने ही अपने पिता को न केवल मुखाग्नि दी बल्कि अंतिम संस्कार की सारी प्रक्रिया पूरी की। पिता के जाने के बाद पूर्णिमा अब बिल्कुल अकेले हो गई है। हालांकि, उसकी बड़ी बहन है लेकिन शादी होने के बाद वह अपने घर पर है। पूर्णिमा की मां पहले ही दुनिया छोड़ गईं। सोमवार को घाट पर बेटी के आंसुओं को देखकर हर कोई पसीज गया।

पूर्णिमा को भी नहीं पता था कि उसे अभी यह सब देखना पड़ेगा। पिता की चिता को उसे ही दाग देना पड़ेगा। पूर्णिमा ने बताया कि पिता श्याम सुंदर टीएसएल के कर्मचारी थे। सेवानिवृत हो चुके हैं। उनके जाने के बाद अब वह बिल्कुल ही अकेली हो गई है। पिता और माता के दुलार में पली-बड़ी पूर्णिमा सोमवार को उस चीता में आ लगा रही थी, जिसके हाथों में वह फूल सी गुड़िया बनकर खेली थी। यह हृदय विदारक घटना देखकर हर कोई वहां हैरान-परेशान था। समझ में नहीं आ रहा था कि इस महामारी में क्या हो रहा है। ईश्वर पूर्णिमा को इस आपदा को सहन करने की शक्ति दें।
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इतिहास हो गए इतिहासबोध लाल बहादुर, कई विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती हैं उनकी किताबें

जानेमाने इतिहासकार और साहित्यकार प्रो.लाल बहादुर वर्मा नहीं रहे। रविवार की देर रात देहरादून के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। कोरोना से ठीक हो गए थे लेकिन किडनी की बीमारी से पीड़ित थे। रविवार की रात उनकी डायलसिस होनी थी, लेकिन किसी वजह से नहीं हो पाई और देर रात वह चल बसे। प्रयागराज से उनका करीबी नाता रहा। तकरीबन चार वर्ष पहले वह देहरादून आ गए थे।

प्रो.वर्मा उन गिने-चुने लोगों में से थे, जिनकी किताबें देश के अधिकतर विश्वविद्यालयों के किसी न किसी पाठ्यक्त्रस्म में पढ़ाई जा रही हैं। वह लंबे समय तक इलाहाबाद में रहे, तकरीबन चार वर्ष पहले देहरादून शिफ्ट हो गए थे। ‘इतिहासबोध’ पत्रिका बहुत दिनों तक प्रकाशित करने के बाद अब इसे बुलेटिन के तौर पर समय-समय पर प्रकाशित कर रहे थे। प्रो.वर्मा की हिन्दी, अंग्रेजी और फ्रेंच भाषा में डेढ़ दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। इसके अलावा कई किताबों का अंग्रेजी औऐर फ्रेंच में अनुवाद भी हुआ। बीसवीं सदी के लोकप्रिय इतिहासकार एरिक हाब्सबॉम की इतिहास शृंखला ‘द एज आफ रिवोल्यूशन’ का अनुवाद काफी चर्चित रहा।

सफरनामा: एक नजर
10 जनवरी 1938 को बिहार के छपरा में जन्मे प्रो.वर्मा ने 1953 में हाईस्कूल की परीक्षा जयपुरिया स्कूल आनंदनगर, गोरखपुर, इंटरमीडिएट की परीक्षा 1955 में सेंट एंड्रूज कालेज और स्नातक 1957 में किया। वह छात्रसंघ के अध्यक्ष भी रहे। लखनऊ विश्वविद्यालय से 1959 में स्नातकोत्तर के बाद 1964 में गोरखपुर विश्वविद्यालय से प्रो.हरिशंकर श्रीवास्तव के निर्देशन में ‘एंग्लो इंडियन कम्युनिटी इन नाइनटिन सेंचुरी इंडिया’ पर शोध किया।

संगमनगरी को आहत कर गया उनका जाना

इतिहासकार और संस्कृतकर्मी प्रो.लाल बहादुर वर्मा का जाना संगमनगरी को आहत कर गया है। गीतकार यश मालवीय ने कहा, वह एक जिंदादिल इंसान थे, पर्वों को जीने वाले, दोस्ती निभाने और युवाओं को प्रोत्साहित करने वाले, उनके खुद लौटकर आने के बजाय उनके जाने की खबर दुखद है। पड़ोसी डॉ.नीरज त्रिपाठी ने कहा, अनगिनत यादें हैं, उत्सवधर्मिता से भरपूर उनके व्यक्तित्व  और सान्निध्य की। युवा सृजन संवाद के अध्यक्ष प्रो.संतोष भदौरिया बोले, इतिहास को पढ़ने-समझने की वैज्ञानिक दृष्टि और उसे रोचक बनाने की कला में सिद्धहस्त प्रो.वर्मा ने अनेक पीढ़ियों से दोस्ती की,उसे निभाया और सिखाया । रंगनिर्देेशक अनिल रंजन भौमिक ने कहा, वह हम सभी के हौसला थे,मार्गदर्शक,बड़े भाई जैसे थे। उनसे सकारात्मक ऊर्जा मिलती थी। डॉ.जूही शुक्ला बोलीं, कला और सौन्दर्य के प्रति उनकी अनोखी दृष्टि थी।

प्रलेस संयोजक संध्या नवोदिता ने कहा, वह दुनिया बदलने के लिए इतिहास लिखते थे। उन्होंने युवाओं को समाज बदलने के आंदोलन से जुड़ने को प्रेरित किया। डॉ.श्लेष गौतम ने कहा, अद्भुत जिजीविषा-जीवटता,संघर्ष क्षमता और अक्षय ऊर्जा के सजीव स्रोत थे प्रो.वर्मा। स्वराज विद्यापीठ के स्वप्निल श्रीवास्तव ने कहा, उनमें अद्भुत रचनात्मकता थी, वह  इतिहास, साहित्य, नाटक, गीत, शोध- शिक्षण, आंदोलन, यात्राएं, आत्मकथा और तमाम मुहिमों के जनक थे। साहित्यकार रविनंदन सिंह ने कहा, वह एक साथ वैश्विक चिंतक, इतिहासकार, साहित्यकार, संस्कृतिकर्मी एवं बुद्धिधर्मी थे। वहीं गुफ्तगू के अध्यक्ष इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी ने कहा, हमने एक ऐसा इतिहासकार खो दिया है, जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती। प्रो. एए फ़ातमी, प्रभाशंकर शर्मा, नरेश महरानी, संजय सक्सेना, अनिल मानव, मनमोहन सिंह तन्हा, डॉ.नीलिमा ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।
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सीबीएसई की तर्ज पर यूपी बोर्ड भी दसवीं के बच्चों का रिजल्ट जारी करेगा

सीबीएसई की तर्ज पर यूपी बोर्ड ने भी दसवीं (हाईस्कूल) का परीक्षाफल जारी करने की तैयारी शुरू कर दी है। बोर्ड के सचिव दिव्यकांत शुक्ल की ओर से प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र भेजकर उनके हाईस्कूल के छात्रों के छमाही एवं प्री बोर्ड के अंक वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया है। निर्देश पर जिला  विद्यालय निरीक्षकों ने स्कूलों के प्रधानाचार्यों को पत्र भेजकर 18 मई तक अंक अपलोड करने के लिए कहा है। 

सचिव दिव्यकां की ओर से कहा गया है कि 18 मई तक छमाही एवं प्री बोर्ड परीक्षा के अंक वेबसाइट https://upmsp.edu.in/ पर अपलोड किए जाएं। इससे पहले सीबीएसई ने इंटरनल असेसमेंट के आधार पर दसवीं के छात्रों का रिजल्ट तैयार करने का निर्णय लिया है।

बोर्ड के एक अधिकारी की मानें तो प्रदेश के बहुत कम स्कूलों में छमाही और प्री बोर्ड परीक्षा कराई गई है। ऐसे में स्कूलों के बाद छमाही एवं प्री बोर्ड परीक्षा के अंक नहीं हैं। अब स्कूल स्कूल वाले बोर्ड की ओर से छमाही एवं प्री बोर्ड के अंक मांगे जाने के बाद जल्दबाजी में अंक तो भेज देंगे परंतु उसमें कोई सच्चाई नहीं होगी। स्कूलों के इस नियम के चलते बोर्ड परीक्षा में अच्छे प्रदर्शन करने वाले बच्चों को औसत के आधार पर अंक देकर पास कर दिया जाएगा। इससे मेरिट वाले बच्चों को लाभ नुकसान होगा।
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कभी न लौटकर आने के लिए अलविदा कह गए इतिहासकार लाल बहादुर वर्मा

सिर्फ चार महीने और मौत को मात दे देते तो जानेमाने इतिहासकार-साहित्यकार प्रोफेसर लाल बहादुर वर्मा को प्रयागराज से विदा हुए पूरे पांच बरस हो जाते। ‘इलाहाबाद से जाया ही नहीं जा सकता है’ कहने वाले प्रो.लाल बहादुर ने वर्ष 2016 की सितंबर के दूसरे रविवार की रात जब उदास और बेमन से इलाहाबाद को अलविदा कहते हुए दूरंतो से दिल्ली की राह पकड़ ली, तब किसने सोचा था, उनका यह ‘अलविदा’ कहना अंतिम रूप से अलविदा हो जाएगा।

वह शायद यहां से कभी नहीं जाते लेकिन सांस्कृतिक विरासत के संवाहक और सेमिनारों, गोष्ठियों का एक जरूरी चेहरा बने लाल बहादुर कैंसर से पीड़ित पत्नी के बेहतर इलाज के लिए पहले दिल्ली और फिर देहरादून जा बसे। मेहंदौरी वाला  मकान पहले ही बेच चुके थे जहां न जाने कितनी गोष्ठियों और वैचारिक बहसें हुईं। दोस्त बने और उनके साथ ठहाके लगे। हालांकि जाने से पहले वह कमरे में सजीं किताबें और पत्रिकाएं ठेले पर लादकर दोस्तों के घर पहुंचा चुके थे।

वैसे विस्थापन, वफादार कनीज की तरह जिंदगी भर उनका दामन थामे रहा। शुरुआत गोरखपुर से करने के बाद वह शोध के लिए पेरिस गए। गोरखपुर वापसी के बाद फिर मणिपुर और अंत में इलाहाबाद आकर विश्वविद्यालय में सात वर्षों तक अध्यापन सहित संगमनगरी में पूरे 25 बरस बिताए सो यहां से उनका गहरा जुड़ाव रहा। इसीलिए तकरीबन 79 वर्ष की उम्र में यहां से विदा होते वक्त विस्थापन का दर्द उनके चेहरे पर साफ झलकता रहा।

कहते थे, ‘यह तो लवकुशों का शहर है, यहां किसी का भी अश्वमेध घोड़ा रोका जा सकता है पर उनकी जिंदगी का अश्वमेध बेलगाम हो गया। प्रयागराज से उन्हें बेहद लगाव था। कहा था, इलाहाबाद में रहते तो सौ बरस जरूर जीते। अभी बहुत कुछ लिखना बाकी है। मेरे जीवन का महत्वपूर्ण सृजनात्मक काम यहीं हुआ। यहीं मुझे चीजों को समझने का सलीका आया। विवशता में जा रहा हूं लेकिन यहां से संबंध टूटेगा नहीं, बीच-बीच में आता रहूंगा। लेकिन, अब उनके साथ उनके वायदे भी विलीन हो गए, उन्हीं की तरह अनंत में!

एक्टिविज्म है दोस्त बनाना
बकौल लाल बहादुर,मैं अकादमिक और साहित्यिक होते हुए भी एक्टिविस्ट रहा हूं। जब गोरखपुर में था, तब भी, जब इलाहाबाद में था, तब भी और अब जबकि देहरादून में रहता हूं तब भी। हालांकि अब मैं बूढ़ा और रिटायर हो गया हूं। मैं एक काम हमेशा करता रहा हूं, दोस्ती करना। आज की दुनिया में जबकि दुश्मनियां बढ़ाई जा रही हैं, दोस्त बनाना एक तरह का एक्टिविज्म है, एक तरह का विद्रोह है, एक तरह के विपक्ष का निर्माण है।
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