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हाईकोर्ट : प्राथमिकी दर्ज करने में देरी होने मात्र से विवेचना की नहीं की जा सकती अनदेखी

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 30 Sep 2022 12:37 AM IST
सार

याची जसवंत राय चूड़ामणि ट्रस्ट सोसायटी मेरठ द्वारा संचालित मैटर्निटी अस्पताल की प्रबंध समिति की अध्यक्ष थी तो उसने स्वयं अस्पताल का काफी हिस्सा श्रेया मेडिकल प्रा. लि. की डायरेक्टर मृदुल शर्मा को पट्टे पर दे दिया।

Prayagraj News :  इलाहाबाद हाईकोर्ट
Prayagraj News : इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि प्राथमिकी दर्ज करने में छह साल की देरी मात्र से विवेचना की अनदेखी कर पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द नहीं की जा सकती। कोर्ट ने कहा याची पर प्रथमदृष्टया कपट व बेईमानी से अस्पताल का बड़ा हिस्सा लीज पर देने का अपराध बनता है। ऐसे में कोर्ट की अंतर्निहित शक्तियों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अचानक आपराधिक केस की मौत नहीं की जा सकती। कोर्ट ने आपराधिक केस रद्द करने की मांग में दाखिल याचिका खारिज कर दी है।




यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने श्रीमती शैला गुप्ता की याचिका पर दिया है। याची जसवंत राय चूड़ामणि ट्रस्ट सोसायटी मेरठ द्वारा संचालित मैटर्निटी अस्पताल की प्रबंध समिति की अध्यक्ष थी तो उसने स्वयं अस्पताल का काफी हिस्सा श्रेया मेडिकल प्रा. लि. की डायरेक्टर मृदुल शर्मा को पट्टे पर दे दिया। जिसको लेकर सिविल लाइंस थाना मेरठ में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की जिस पर कोर्ट ने संज्ञान भी ले लिया है। याची पर बेईमानी से गवन व अस्पताल की जमीन का लीज कर हड़पने का भी आरोप है।

कोर्ट ने कहा निराधार, निरर्थक, मनगढ़ंत आपराधिक केस में ही विशेष स्थिति में हस्तक्षेप किया जा सकता है। वर्तमान केस रद्द करने का कोई आधार नहीं है। याची का कहना था वह अस्पताल का संचालन कर रही थी। अस्पताल प्रबंध समिति की अध्यक्ष थी। ट्रस्ट को कोई नुक्सान या स्वयं को फायदा पहुंचाने का काम नहीं किया है। उसकी 90 साल की आयु है। कैंसर से पीड़ित हैं। छ: साल बाद प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। याची ने भी राजीव गुप्ता व अन्य लोगों के खिलाफ  फर्जी दस्तावेज व जाली हस्ताक्षर से आपराधिक केस दर्ज कराने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई है। उसने कोई अपराध नहीं किया है। किंतु कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया।
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