मेजर ध्यानचंद: स्मृतियां संजोना तो दूर हॉकी के जादूगर का मोहल्ला तक भूल गए लोग

राजीव पाण्डेय, प्रयागराज Published by: प्राची प्रियम Updated Sun, 29 Aug 2021 07:23 AM IST

सार

केंद्र सरकार ने हाल में राजीव गांधी खेल रत्न सम्मान भले ही मेजर ध्यान चंद के नाम कर दिया हो, लेकिन अभी तक उनकी याद में शहर में न कोई स्टेडियम बन सका न ही कोई स्मारक। हालत यह है कि अब उनका मोहल्ला तक लोगों को ठीक से याद नहीं रह गया है।
 
हॉकी के जादूगर 'मेजर ध्यानचंद'
हॉकी के जादूगर 'मेजर ध्यानचंद' - फोटो : social media
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विस्तार

देश को हॉकी का जादूगर देने वाली संगमनगरी अपने ही लाल की स्मृतियों को अब तक नहीं संजो सकी है। केंद्र सरकार ने हाल में राजीव गांधी खेल रत्न सम्मान भले ही मेजर ध्यान चंद के नाम कर दिया हो, लेकिन अभी तक उनकी याद में शहर में न कोई स्टेडियम बन सका न ही कोई स्मारक। अतीत की धुंधली स्मृतियों की पीड़ा तो इससे भी बढ़कर है। हालत यह है कि अब उनका मोहल्ला तक लोगों को ठीक से याद नहीं रह गया है। कुछ हॉकी खिलाड़ी उनका जन्म मुट्ठीगंज बताते हैं तो कुछ ओल्ड कैंट।
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116 साल पहले 29 अगस्त 1905 को मेजर ध्यानचंद इसी शहर में पैदा हुए थे। उन दिनों ब्रिटिश-इंडियन आर्मी में क्लर्क के पद पर तैनात रहे उनके पिता समेश्वर दत्त सिंह ने बेटे को संस्कार और अनुशासन के खांचे में गढ़ना शुरू किया, लेकिन तबादले की वजह से उन्हें शहर छोड़ना पड़ गया। जन्म के महज छह-सात वर्ष बाद ही मेजर ध्यानचंद के पिता का तबादला झांसी हो गया। 


इसके बाद वह झांसी चले गए। पढ़ाई के साथ साथ खेल का अधिकतर समय उनका झांसी में ही गुजरा। कहा जा रहा है कि इसी वजह से प्रयागराज में मेजर ध्यानचंद का जन्म स्थान लोगों को ठीक से याद नहीं है। उनके परिवार से जुडे़ रहे कई हॉकी खिलाड़ी भी जन्मस्थान के बारे में सटीक जानकारी नहीं रखते। 

पूर्व राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी श्यामबाबू गुप्ता बताते हैं कि वह मध्य भारत और इंडियन ऑडिट टीम से खेलते थे। मेजर ध्यानचंद के भाई रूप सिंह उनकी टीम के कोच थे। उनके जन्मस्थान के बारे में चर्चा है कि वह मुट्ठीगंज मोहल्ले में पैदा हुए थे। यहां किसी मंदिर के पास ही उनके पिता रहते थे। जबकि, हॉकी खिलाड़ी रहे शाहिद कमाल खान बताते हैं कि कई पुराने खिलाड़ियों से जानकारी करने पर पता चला कि उनके पिता सेना में थे और ओल्ड कैंट मोहल्ले में ही उनका जन्म हुआ था।

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