महंत नरेंद्र गिरि का सुसाइड नोट: 14 बार आनंद गिरि का जिक्र, लिखा- मैं बदनाम हो जाऊंगा, सच्चाई तो बाद में पता चलेगी

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: कुमार संभव Updated Tue, 21 Sep 2021 08:52 PM IST

सार

Narendra Giri's suicide note: निरंजनी अखाड़े के महंत और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि की मौत के एक दिन बाद उनका सुसाइड नोट सामने आया है। आखिर 11 पन्नों में दिवंगत महंत ने क्या बातें लिखी हैं?
महंत नरेंद्र गिरि का सुसाइड नोट
महंत नरेंद्र गिरि का सुसाइड नोट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

प्रयागराज में बाघंबरी गद्दी मठ के गेस्ट हाउस में मंगलवार को महंत नरेंद्र गिरि का शव मिला था। उनके शिष्यों के मुताबिक, महंत का शव फंदे पर लटका मिला था। एक दिन बाद उनका लिखा 11 पेज का सुसाइड नोट सामने आया है। इसमें महंत नरेंद्र गिरि ने बताया है कि आखिर किन कारणों से वे आत्महत्या करने को मजबूर हुए और अपने इस कदम के पीछे वे किसे जिम्मेदार मानते हैं।
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सात बार आत्महत्या का जिक्र

महंत नरेंद्र गिरि के लिखे सुसाइड नोट में सात बार आत्महत्या शब्द का जिक्र है। उन्होंने लिखा है, ''मैं महंत नरेंद्र गिरि वैसे तो 13 सितंबर 2021 को आत्महत्या करने जा रहा था, लेकिन हिम्मत नहीं कर पाया। आज जब हरिद्वार से सूचना मिली कि एक-दो दिन में आनंद गिरि कम्प्यूटर के माध्यम से मोबाइल से किसी लड़की या महिला के गलत काम करते हुए मेरी फोटो लगाकर फोटो वायरल कर देगा तो मैंने सोचा कहां-कहां सफाई दूंगा, एक बार तो बदनाम हो जाऊंगा। सच्चाई तो लोगों को बाद में पता चल जाएगी, लेकिन मेरा नाम बदनाम हो जाएगा।''

उन्होंने लिखा, ''...मैं पहले ही आत्महत्या करने जा रहा था, लेकिन हिम्मत नहीं कर पा रहा था। आज मैं हिम्मत हार गया और आत्महत्या कर रहा हूं। प्रयागराज के सभी पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारियों से अनुरोध करता हूं कि मेरी आत्महत्या के जिम्मेदार उपरोक्त लोगों पर कार्रवाई की जाए, जिससे मेरी आत्मा को शांति मिले।''

14 बार आनंद गिरि का जिक्र

आनंद गिरि के बारे में और क्या आरोप लगाए?

  • 'आनंद गिरि, आद्या प्रसाद तिवारी और संदीप तिवारी ने मिलकर मेरे साथ विश्वासघात किया। जान से मारने का प्रयास किया।'
  • 'सोशल मीडिया, फेसबुक और समाचार पत्रों में आनंद गिरि ने मेरे चरित्र के ऊपर मनगढ़ंत आरोप लगाए। मैं मरने जा रहा हूं।'
  • 'आनंद गिरि द्वारा जो भी आरोप लगाए गए, उससे मेरी और मठ-मंदिर की बदनामी हुई। मैं बहुत आहत हूं। मैं आत्महत्या करने जा रहा हूं।'
  • 'मेरे मरने की सम्पूर्ण जिम्मेदार आनंद गिरि, आद्या प्रसाद तिवारी, जो मंदिर में पुजारी है, आद्या प्रसाद तिवारी का बेटा संदीप तिवारी की होगी।' 
  • 'मैं समाज में हमेशा शान से जिया, लेकिन आनंद गिरि मुझे गलत तरीके से बदनाम किया।'
  • 'एक ऑडियो कैसेट आनंद गिरि ने जारी किया था, उससे मेरी बदनामी हुई। आज मैं हिम्मत हार गया और आत्महत्या कर रहा हूं।'

दो पेन का इस्तेमाल

सुसाइड नोट देखकर लगता है कि इसे लिखने में दो अलग-अलग पेन का इस्तेमाल किया गया है। वहीं, 11 में से 10 पन्नों में तो उन्होंने आखिर में 'महंत नरेन्द्र गिरि' लिखकर दस्तखत किए हैं, लेकिन एक पन्ने के आखिर में उन्होंने 'म नरेन्द्र गिरि' लिखा है। पुलिस इस सुसाइड नोट की लिखावट की जांच कर रही है।
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