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इस वर्ष गणेश चतुर्थी पर बप्पा के घर में आगमन से होंगी ये राशियां धनवान
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सवारियों से भरा अप्पे पलटा, परीक्षा देने जा रही प्रतियोगी छात्रा की मौत

 कीडगंज में हर्षवर्धन चौराहे के समीप रविवार सुबह सवारियों से भरा अप्पे अनियंत्रित होकर पलट गया। इसके नीचे दबने से प्रवक्ता भर्ती परीक्षा देने जा रही प्रतियोगी छात्रा रेनू यादव(32) की मौत हो गई जबकि छह अन्य यात्री जख्मी हो गए। पुलिस ने घायलों को स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय भेजा।

आंबेडकर नगर के टांडा में जनार्दनपुर गांव निवासी रेनू पत्नी रणविजय के एक पुत्र और एक पुत्री है। पति खेती करके परिवार का भरण-पोषण करता था। वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करती थी और कर्नलगंज स्थित सलोरी में कमरा लेकर रहती थी। उसके बच्चे पति के साथ गांव में रहते हैं। रविवार को वह प्रवक्ता भर्ती परीक्षा में शामिल होने के लिए अप्पे से नैनी जा रही थी।

हर्षवर्धन चौराहे के समीप अचानक अप्पे अनियंत्रित होकर पलट गया और सवारियां नीचे दब गईं। चीखपुकार मची तो आसपास के लोग जुटे और घायलों को बाहर निकाला। लेकिन तब तक रेनू की मौत हो चुकी थी। इस दौरान छह अन्य यात्री घायल भी हुए जिन्हें एसआरएन भेजकर प्राथमिक उपचार कराया गया। 
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‘प्रो. ओपी मालवीय एवं भारती देवी स्मृति सम्मान’ से नवाजी गईं कथा लेखिका ममता कालिया और नीलाक्षी सिंह

संस्था सरोकार की ओर से प्रो.ओमप्रकाश मालवीय और भारती देवी मालवीय की स्मृति में रविवार को आयोजित समारोह में वर्ष 2020 के लिए कथा लेखिका ममता कालिया और वर्ष 2021 के लिए नीलाक्षी सिंह को ‘प्रो. ओपी मालवीय एवं भारती देवी स्मृति सम्मान’ दिया गया।

इसके तहत अंगवस्त्रम ओढ़ाने के बाद उन्हें स्मृति चिन्ह सहित पच्चीस हज़ार रुपये की धनराशि प्रदान की गई।  कथाकार विभूति नारायण राय की ओर से विषय प्रवर्तन के बाद कथालेखिका ममता कालिया ने कहा, इलाहाबाद शहर में ऐसा कोई नहीं है जो रचनाकार या कलाकार न हो. यह शहर एक तरह का प्रशिक्षण केंद्र है. आप यहां लेखन के सारे दांव पेच सीख सकते हैं।

आलोचक-संपादक अखिलेश ने कहा, ममता जी सठोत्तरी पीढ़ी की महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं. जब भी आधुनिक हिंदी साहित्य का इतिहास लिखा जाएगा, उनके अवदान के बिना अधूरा रहेगा। भूगोल को शिद्दत से महसूस करने और उसे रचनाओं में स्थापित करने वाली वह विरली रचनाकार हैं।

प्रो श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा, ममता जी महादेवी की आधुनिक वैचारिक भूमिका में हैं। इस शहर ने उनके व्यक्तित्व को रचनात्मक विस्तार दिया है। उन्होंने रविंद्र कालिया और इलाहाबाद दोनों ही से प्रेम किया है। प्रो.अनिता गोपेश ने कहा, जैसे ममता जी इलाहाबाद को चाहती हैं, वैसे ही इलाहाबाद भी उन्हें चाहता है। सबकी अपनी-अपनी ममता हैं।

कथालेखिका नीलाक्षी सिंह की कहानियों पर कथाकार प्रीति चौधरी, मनोज पांडे और प्रो. राजकुमार ने अपनी बात रखी.  खेला उपन्यास इस बात का नए ढंग से आख्यान करता है कि उपभोक्तावादी दौर में स्त्री जीवन कैसा होगा। दूसरे सत्र में सचिव डॉ.अंकिता चतुर्वेदी की देखरेख में सांगीतिक संध्या के तहत प्रवीण कश्यप का गायन और अराध्या प्रवीण ने तबला वादन प्रस्तुत करके समा बांधा।

आर्यकन्या इंटर कॉलेज प्रेक्षागृह में प्रो.राजेंद्र कुमार की अध्यक्षता में हुए समारोह का संचालन और प्रकर्ष मालवीय ने स्वागत किया। प्रेमशंकर ने किया. कार्यक्रम में प्रो.हेरंब चतुर्वेदी, श्री प्रकाश शुक्ल, यश मालवीय, प्रवीण शेखर, डॉ.मधु शुक्ला, डॉ.संजू शुक्ला,जयकृष्ण राय तुषार आदि मौजूद थे।

 
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पितृपक्ष: संगम तट पर पखवारे भर होगा मोक्ष के लिए पिंडदान

पूर्णिमा के श्राद्ध के साथ कल से शुरू होगा पितृपक्ष, पिंडदान और तर्पण-अर्पण से तृप्त होंगी पूर्वजों की आत्माएं इस दौरान पिंडदान के साथ ही अन्न, वस्त्र और पूर्वजों की प्रिय वस्तुओं का भी दान होगा। पितृपक्ष आरंभ होने से पहले ही तीर्थपुरोहितों की चौकियों पर वंशजों की भीड़ लगने लगी है। पितरों को समर्पित इस पक्ष में सात पीढ़ियों के नाम से तर्पण-अर्पण और श्राद्ध होगा।

गंगा, यमुना, विलुप्त सरस्वती के संगम तट पर पितृपक्ष में श्राद्ध और पिंडदान से पूर्वजों को मोक्ष मिलने की पौराणिक अवधारणा रही है। माना जाता है कि संगम तट पर पिंडदान करने से पितरों को शांति मिल जाती है। ऐसे में सोमवार को पूर्णिमा तिथि पर सुबह से ही संगम तट पर पिंडदान, तर्पण का सिलसिला शुरू होगा। पूर्णिमा पर अकाल मृत्यु की वजह से भटकती आत्माओं की शांति के लिए विधि-विधान से पूजन और पिंडदान की परंपरा है।

ऐसे में संगम तट पर पिंडदान के लिए देश के कई हिस्सों से लोग पहुंचेंगे। वेदियों पर ध्वजा, पताका सजाकर मंत्रोच्चार के बीच पिंडदान और तर्पण कर अपने पूर्वजों को लोग श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे। पुराणों के अनुसार त्रिवेणी संगम पर पिंडदान और तर्पण करने से पूर्वजों की आत्माओं को शांति मिलती है। यहां तर्पण और पिंडदान किए बिना दिवंगत की आत्मा अतृप्त रहती है। पितृपक्ष में पिंडदान करने से पूर्वज प्रसन्न होकर वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

पिंडदान नहीं करने से वंशजों को शारीरिक, मानसिक, आर्थिक कष्टों का सामना करना पड़ता है। यही वजह है कि देश भर से लोग लोग पिंडदान के लिए संगमनगरी पहुंच रहे हैं। तीर्थ पुरोहित राजमणि तिवारी बताते हैं कि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने के लिए पितृपक्ष की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। ज्योतिषाचार्य पं ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार पितृदोष से मुक्ति के बिना परिवार में सुख-समृद्धि नहीं आती। ऐसे में किसी की अकाल मृत्यु, माता-पिता व मातृ-पितृ पक्ष के किसी अन्य परिजन की मृत्यु के श्राद्ध और पिंडदान करने के ही दोष से मुक्ति मिलती है।


पूर्णिमा का प्रथम श्राद्ध आज
 सोमवार को पूर्णिमा का पहला श्राद्ध होगा। इसी के साथ पितृपक्ष शुरू हो जाएगा। 21 को प्रतिपदा होगी। इसी क्रम में 22 को द्वितीया, 23 को तृतीया, 24 को चतुर्थी, 25 को पंचमी, 26 को षष्ठी, 27 को सप्तमी, 28 को कोई श्राद्ध नहीं होगा। 29 को अष्टमी, 30 को मातृ नवमी, एक अक्तूबर को दशमी, दो को एकादशी, तीन को द्वादशी, चार को त्रयोदशी, पांच को चतुर्दशी और छह अक्तूबर को अमावस्या श्राद्ध के साथ पितृ विसर्जन होगा।
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नरेंद्र गिरि: कमरे में मिला छह पेज का सुसाइड नोट, सवाल- आखिर किस अपमान से आहत थे महंत

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि जिस कमरे में फंदे पर लटके मिले, वहां छह पेज का सुसाइड नोट मिला है। पुलिस के मुताबिक, इस सुसाइड नोट में मठ और अखाड़े के उत्तराधिकारियों के नाम लिखे गए हैं। सबसे खास बात यह है कि इसमें कभी महंत के बेहद करीबी रहे आनंद गिरि के अलावा लेटे हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी व उनके बेटे संदीप तिवारी का नाम भी है। साथ ही सम्मान व अपमान को लेकर भी कुछ बातें लिखी हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर महंत किस अपमान को लेकर आहत थे?

पुलिस के मौके पर पहुंचने से पहले ही शव उतारा जा चुका था। सूत्रों के मुताबिक, महंत के शव के पास ही बिस्तर पर सुसाइड नोट पड़ा था। छह पेज के इस सुसाइड नोट में वसीयतनामे से लेकर अन्य कई बातें लिखीं थीं। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि इसमें महंत के सबसे करीबी शिष्य रहे आनंद गिरि, लेटे हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी व उनके बेटे संदीप तिवारी के नाम के साथ लिखा है कि वह इनके व्यवहार से आहत थे। सुसाइड नोट में लिखा है कि उन्होंने पूरा जीवन सम्मान के साथ जिया। उनके दामन में कभी किसी तरह का दाग नहीं रहा। लेकिन कुछ लोगों ने उन्हें मिथ्या आरोप लगाकर अपमानित किया। जिससे वह बेहद दुखी हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि  आखिर वह कौन सा अपमान था जिसने महंत को इस कदर आहत कर दिया।

आनंद, आद्या या संदीप, कौन किस बात के लिए कर रहा था परेशान?
सुसाइड नोट में लिखी बातें सामने आने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं जिनका जवाब किसी के पास नहीं है। इन सवालों से सबसे ज्यादा घेरे में आनंद गिरि, बड़े हनुमान मंदिर के मुख्य ख्पुजारी आद्या तिवारी व उनके बेटे संदीप तिवारी की भूमिका है। किसकी भूमिका को लेकर क्या उठ रहे हैं सवाल, नीचे पढ़िए...  

योग गुरु आनंद गिरि
बात आनंद गिरि की करें तो सवाल उठता है कि क्या वह किसी बात को लेकर महंत को परेशान कर रहे थे। गौरतलब है कि कुछ समय पहले आनंद गिरि को अखाड़े से निष्कासित किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर एक के बाद एक कई वीडियो वायरल हुए थे। जिसमें अखाड़े व मठ की संपत्तियों के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए थे। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष के कई शिष्यों के पास करोड़ों की संपत्ति होने से संबंधित तस्वीरें भी वायरल हुई थीं। आरोप लगा था कि अखाड़ा परिषद अध्यक्ष की छवि धूमिल करने को लेकर साजिशन ऐसा किया गया। जिसका खुद अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने खंडन करते हुए कहा था कि यह सभी आरोप बेबुनियाद हैं। ऐसें में सबसे बड़ा सवाल यह है कि  क्या आनंद गिरि किसी बात को लेकर महंत को परेशान कर रहे थे? 

आद्या तिवारी व संदीप तिवारी
इसके बाद लेटे हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या तिवारी व उनके बेटे संदीप तिवारी का नाम आता है। सुसाइड नोट में यह भी लिखा है कि महंत इनके व्यवहार से आहत थे। चर्चा इस बात की भी रही कि महंत से आद्या तिवारी का लेनदेन का कुछ मामला था, जिसे लेकर पिछले कुछ समय से उनके बीच मनमुटाव हुआ था। तो एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या आद्या व उनके बेटे संदीप की किसी बात को लेकर अखाड़ा परिषद अध्यक्ष परेशान थे। हालांकि हिरासत में लिए जाने के दौरान आद्या तिवारी ने इन बातों का खंडन किया और साफ कहा कि उनका अखाड़ा परिषद अध्यक्ष से किसी तरह का विवाद नहीं था।

अन्य शिष्यों से कोई लेना-देना नहीं, न किए जाएं परेशान
सुसाइड नोट में उन्होंने यह भी लिखा है कि उनके अन्य शिष्यों का उनकी मौत से कोई लेना-देना नहीं है, ऐसे में उन्हें परेशान न किया जाए। इसके अलावा विस्तार से यह लिखा है कि उनके न रहने के बाद मठ, अखाड़ा व हनुमान मंदिर में किसकी क्या भूमिका होगी। पुलिस अफसरों ने भी इस बात की पुष्टि की। आईजी रेंज केपी सिंह ने सुसाइड नोट में आनंद गिरि व वसीयतनामे के जिक्र के बात की पुष्टि की। हालांकि उन्होंने इससे ज्यादा कुछ बताने से इंकार किया। उनका कहना था कि मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल इससे ज्यादा कुछ बता पाना संभव नहीं है।

सुसाइड नोट कितना सही, फोरेंसिक जांच से खुलेगा राज
अखाड़ा परिषद की संदिग्ध हाल में मौत के बाद फिलहाल जो भी आशंकाएं, निष्कर्ष निकाले जा रहे हैं, उसका मूल मौके से बरामद सुसाइड नोट है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि सुसाइड नोट की प्रमाणिकता भी तब तक संदेह से परे नहीं है जब तक कि फोरेंसिक जांच न हो जाए। फोरेंसिक जांच के दौरान हैंडराइटिंग मिलान में ही यह साफ हो पाएगा कि सुसाइड नोट अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने ही लिखा या नहीं। फिलहाल फोरेंसिक टीम ने इसे कब्जे में ले लिया है। साथ ही अखाड़ा परिषद अध्यक्ष की हैंडराइटिंग का सैंपल भी एकत्र कर लिया गया। 
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नरेंद्र गिरि सुसाइड केस नरेंद्र गिरि सुसाइड केस

Narendra giri Death Case : अखाड़ा परिषद अध्यक्ष के मौत के मामले में पुलिस ने शिष्य आनंद गिरी सहित तीन को किया गिरफ्तार

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस ने उनके शिष्य योग गुरु आनंद गिरी और संगम स्थित लेटे हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या तिवारी और उसके बेटे संदीप तिवारी हो हिरासत में ले लिया है। तीनों से कड़ी पूछताछ की जा रही है। महंत नरेंद्र गिरी ने अपने सुसाइड नोट में इन तीनों का उल्लेख किया है और लिखा था कि इनके द्वारा परेशान करने के चलते वह मानसिक रूप से काफी परेशान चल रहे हैं। उन्हें सम्मान से जीने नहीं दिया जा रहा है। 

प्रयागराज पुलिस ने जार्जटाउन थाने में आनंद गिरी के खिलाफ धारा 306 यानी आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में मुकदमा दर्ज किया है। इसी धारा में अन्य दोनों आरोपियों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है। 


सुसाइड नोट बरामद, अपने शिष्य पर परेशान करने का  लगाया आरोप
महंत नरेंद्र गिरि ने सोमवार को संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। उनका शव अल्लापुर स्थित बाघंबरी मठ स्थित उनके आवास में मिला। शाम को सूचना मिलते ही हड़कंप मच गया। पुलिस ने सूचना मिलते ही मठ को सीज कर दिया। जिले के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए थे। वहां से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है जिसमें उन्होंने अपने शिष्य आनंद गिरि पर परेशान करने का आरोप लगाया है। वहीं दूसरी आरे महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य आनंद गिरि को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी वसीयत की जानकारी भी इसी में दी। पुलिस का इस संबंध में कहना है कि वो अभी इसे विस्तार से देख रहे हैं और उसके बाद ही स्थिति को साफ किया जा सकेगा।  

आनंद गिरि ने खुद को बताया बेकसूर, बोले गुरू जी की हुई है हत्या
हिरासत में लिए जाने के पहले आनंद गिरि मीडिया के सामने आए और उन्होंने कहा कि इस बात में उन्हें कोई शक नहीं कि उनके गुरू  महंत नरेंद्र गिरि की हत्या की गई है। इसमें कौन लोग शामिल है, इस बात का खुलासा होना चाहिए। कई लोग ऐसे हैं जिन पर उन्हें शक है और सच्चाई सामने आनी चाहिए। मैं अगर दोषी पाया जाता हूं तो फिर मुझे भी सजा मिलनी चाहिए।

सूचना पर जिले के सभी आलाधिकारी मौके पर
संगम स्थित बड़े हनुमान मंदिर के मुख्य व्यवस्थापक और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि अल्लापुर स्थित बाघंबरी मठ स्थित आवास में रहते थे। सोमवार की शाम सेवादार उनके कमरे में पहुंचा तो उसके होश उड़ गए। महंत नरेंद्र गिरि का शव फांसी पर लटक रहा था। पूरे मठ में हड़कंप मच गया। सूचना पर जिले के सभी आलाधिकारी मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने मठ को सीज कर दिया था। 

शिष्य आनंद गिरि से विवाद के बाद चर्चा में आए
मौके पर फोरेंसिक टीम और फील्ड यूनिट भी जांच कर रही थी। डीएम ने लखनऊ में उच्चाधिकारियों को प्रारंभिक सूचना से अवगत कराया। महंत नरेंद्र गिरि हाल में ही अपने शिष्य आनंद गिरि से विवाद में चर्चा में आए थे। हालांकि वह विवाद आनंद गिरि के माफी मांगने के बाद खत्म हो गया था लेकिन मठ और मंदिर में आनंद का प्रवेश नहीं हो पाया था। इसके अलावा जाहिरा तौर पर कोई बड़ा विवाद अभी सामने नहीं आया। 

महंत गिरी की मौत दुखद, जांच की जरूरत: इंद्रेश कुमार
नरेंद्र गिरी की मौत पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने गहरी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने महंत नरेंद्र गिरी की मौत को काफी दुखद एवं विचलित करने वाला बताया। इंद्रेश कुमार ने कहा कि आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति समर्पित रहते हुए महंत गिरी ने संत समाज की अनेक धाराओं को एक साथ जोड़ने में बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रभु उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान दें। साथ ही साथ वरिष्ठ आरएसएस नेता ने महंत गिरी की विवादास्पद मौत पर सवाल उठाते हुए जांच कराए जाने की जरूरत बताया।
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नरेंद्र गिरी आत्महत्या मामला : बाघंबरी मठ के विद्यार्थियों पर महंत की मेहरबानी भी झगड़े की बड़ी वजह

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और बाघंबरी गद्दी के महंत नरेंद्र गिरि करीबी सेवादारों के अलावा एक अंगरक्षक के नाम जमीन और मकान खरीदवाने के मामले को लेकर भी सुर्खियों में रहे हैं। मठ और अखाड़े से निष्कासन के बाद उनके शिष्य आनंद गिरि ने सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर उन पर ऐसे कई गंभीर आरोप लगाए थे और जांच के लिए आवाज उठाई थी। 

मठ में फंदे से लटके मिले महंत नरेंद्र गिरि पर उनके शिष्य आनंद गिरि पांच महीने पहले कई गंभीर आरोप लगा चुके हैं। इसमें सेवादारों के नाम पर जमीन और मकान खरीदने की शिकायतें शामिल हैं। सीएम को तब उन्होंन जो पत्र भेजा था, उसमें सिपाही अजय सिंह के नाम का उल्लेख चर्चा में रहा है। इसमें सिपाही के नाम पर कहीं बेनामी संपत्ति खरीदने की भी शिकायत का जिक्र किया गया था। 

इसके अलावा विपिन सिंह नामक ड्राइवर को बड़ा मकान बनाकर दिलवाने, रामकृष्ण पांडेय नामक विद्यार्थी को बड़ा मकान और बड़े हनुमान मंदिर में दुकान दिलवाने के अलावा विवेक मिश्रा नामक विद्यार्थी के नाम जमीन खरीदने के साथ ही उसका मकान बनवाने, मठ में रहने वाले विद्यार्थी मनीष शुक्ला को करोड़ों रुपये का मकान बनवाकर देने, आनंद गिरि के नाम की फार्च्यूनर गाड़ी भी उसके नाम करवाने के आरोप रहे हैं।

इसके अलावा  मठ में रह रहे अभिषेक मिश्रा और मिथिलेश पांडेय को भी मकान बनवाकर देने का मामला भी विवाद का हिस्सा रहे है। इसके अलावा आनंद गिरि ने आदित्य नाथ मिश्रा नामक व्यक्ति से महंत के विवाद को लेकर भी शिकायत की थी।
 
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नरेंद्र गिरि: बाघंबरी गद्दी मठ की अकूत धन-संपदा तो नहीं बनी महंत के मौत की वजह, पहले भी दो महंतों की हो चुकी है संदिग्ध मौत

बाघंबरी गद्दी मठ और निरंजनी अखाड़े की अकूत धन-संपदा और वैभव को लेकर विवादों का रिश्ता पुराना रहा है। मठ और अखाड़े की सैकड़ों बीघे जमीनें बेचने, सेवादारों और उनके परिवारीजनों के नाम मकान, जमीन खरीदने को लेकर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि और उनके करीबी शिष्य आनंद गिरि के बीच विवाद लंबे समय से रहा है। ऐसे ही विवादों को लेकर निरंजनी अखाड़े के मठ में दो महंतों की संदिग्ध मौतें पहले भी हो चुकी हैं। अब नरेंद्र गिरि की मौत को लेकर भी संपत्ति विवाद की गहरी जड़ें हर किसी का ध्यान खींच रही हैं। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और बाघंबरी गद्दी मठ के महंत नरेंद्र गिरि से उनके शिष्य योग गुरु आनंद गिरि के बीच विवाद बीते मई महीने में बाघंबरी गद्दी मठ की 80 फीट चौड़ी और 120 फीट लंबी गोशाला की भूमि की लीज निरस्त कराए जाने के बाद सामने आया। आनंद गिरि के नाम लीज पर दी गई इस जमीन पर पेट्रोल पंप प्रस्तावित किया गया। कुछ दिन बाद ही महंत नरेंद्र गिरि ने यह कहते हुए लीज निरस्त करा दी कि वहां पेट्रोल पंप नहीं चल सकता। ... और पढ़ें

यूपी: एफआईआर रद्द कराने के लिए पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी ने हाईकोर्ट में दाखिल की याचिका, राजद्रोह की धाराओं में दर्ज है मामला

narendra giri
पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी अपने विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी को रद्द कराने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। उनके विरुद्ध रामपुर में सीएम योगी आदित्य नाथ और भाजपा सरकार के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने को लेकर मुकदमा दर्ज कराया गया है। राजद्रोह के साथ अन्य धाराओं में मामला दर्ज कराया गया है।

पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी ने मीडिया में योगी के खिलाफ बयान दिया था। अभी कुछ दिन पहले ही वह सांसद आजम खान की पत्नी विधायक डॉ. तजीन फातिमा से मिलने उनके आवास पहुंचे थे। वहीं उन्होंने मीडिया में योगी आदित्यनाथ को लेकर टिप्पणी की थी। भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने अजीज कुरैशी के विरुद्ध रामपुर के थाना सिविल लाइंस में मुकदमा दर्ज कराया है। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरुद्ध की गई टिप्पणी को लेकर दर्ज मुकदमे के खिलाफ पूर्व राज्यपाल ने मामला निरस्त कराने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में गुहार लगाई है।
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नरेंद्र गिरि: नहीं रहे अखाड़ा परिषद अध्यक्ष, शिष्य आनंद गिरि को यूपी पुलिस ने हरिद्वार से किया गिरफ्तार

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी की संदिग्ध मौत मामले में उनके शिष्य आनंद गिरि को यूपी पुलिस ने किया गिरफ्तार कर लिया है। यूपी पुलिस रात 10 बजे हरिद्वार पंहुची थी। पुलिस टीम ने डेढ़ घंटे की पूछताछ के बाद आनंद गिरी को गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई। जानकारी के मुताबिक सहारनपुर पुलिस और एसओजी की टीम हरिद्वार पहुंची थी। 

सुसाइड नोट बरामद, अपने शिष्य पर परेशान करने का  लगाया आरोप
महंत नरेंद्र गिरि ने सोमवार को संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। उनका शव अल्लापुर स्थित बाघंबरी मठ स्थित उनके आवास में मिला। शाम को सूचना मिलते ही हड़कंप मच गया। पुलिस ने सूचना मिलते ही मठ को सीज कर दिया। जिले के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए थे। वहां से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है जिसमें उन्होंने अपने शिष्य आनंद गिरि पर परेशान करने का आरोप लगाया है। वहीं दूसरी आरे महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य आनंद गिरि को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी वसीयत की जानकारी भी इसी में दी। पुलिस का इस संबंध में कहना है कि वो अभी इसे विस्तार से देख रहे हैं और उसके बाद ही स्थिति को साफ किया जा सकेगा।  

आनंद गिरि ने खुद को बताया बेकसूर, बोले गुरू जी की हुई है हत्या
हिरासत में लिए जाने के पहले आनंद गिरि मीडिया के सामने आए और उन्होंने कहा कि इस बात में उन्हें कोई शक नहीं कि उनके गुरू  महंत नरेंद्र गिरि की हत्या की गई है। इसमें कौन लोग शामिल है, इस बात का खुलासा होना चाहिए। कई लोग ऐसे हैं जिन पर उन्हें शक है और सच्चाई सामने आनी चाहिए। मैं अगर दोषी पाया जाता हूं तो फिर मुझे भी सजा मिलनी चाहिए।

सूचना पर जिले के सभी आलाधिकारी मौके पर
संगम स्थित बड़े हनुमान मंदिर के मुख्य व्यवस्थापक और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि अल्लापुर स्थित बाघंबरी मठ स्थित आवास में रहते थे। सोमवार की शाम सेवादार उनके कमरे में पहुंचा तो उसके होश उड़ गए। महंत नरेंद्र गिरि का शव फांसी पर लटक रहा था। पूरे मठ में हड़कंप मच गया। सूचना पर जिले के सभी आलाधिकारी मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने मठ को सीज कर दिया था। 

शिष्य आनंद गिरि से विवाद के बाद चर्चा में आए
मौके पर फोरेंसिक टीम और फील्ड यूनिट भी जांच कर रही थी। डीएम ने लखनऊ में उच्चाधिकारियों को प्रारंभिक सूचना से अवगत कराया। महंत नरेंद्र गिरि हाल में ही अपने शिष्य आनंद गिरि से विवाद में चर्चा में आए थे। हालांकि वह विवाद आनंद गिरि के माफी मांगने के बाद खत्म हो गया था लेकिन मठ और मंदिर में आनंद का प्रवेश नहीं हो पाया था। इसके अलावा जाहिरा तौर पर कोई बड़ा विवाद अभी सामने नहीं आया। 

महंत गिरी की मौत दुखद, जांच की जरूरत: इंद्रेश कुमार
नरेंद्र गिरी की मौत पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने गहरी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने महंत नरेंद्र गिरी की मौत को काफी दुखद एवं विचलित करने वाला बताया। इंद्रेश कुमार ने कहा कि आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति समर्पित रहते हुए महंत गिरी ने संत समाज की अनेक धाराओं को एक साथ जोड़ने में बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रभु उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान दें। साथ ही साथ वरिष्ठ आरएसएस नेता ने महंत गिरी की विवादास्पद मौत पर सवाल उठाते हुए जांच कराए जाने की जरूरत बताया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही अंतिम रूप से कुछ कहा जा सकेगा
जांच कर रहे अधिकारियों का कहना है कि सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है। उनका शव फांसी पर लटका मिला था। पोस्टमार्टम के बाद ही स्पष्ट होगा कि उनकी मौत कैसे हुई? आईजी केपी सिंह का कहना है कि नरेंद्र गिरि का शव फांसी पर लटका मिला। प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का लग रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही अंतिम रूप से कुछ कहा जा सकता है। नरेंद्र गिरि के निधन की सूचना पर डिप्टी सीएम केशव मौर्या और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उनके निधन पर शोक जताया है। 

देश के संतों-महंतों की रक्षा करने में समर्थ नहीं भाजपा सरकार: सुरजेवाला
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने दुख जताते हुए कहा कि संतों महंतों की सर्वोच्च संस्था अखाड़ा परिषद के आदरणीय महंत नरेंद्र गिरी की संदिग्ध परिस्थिति में मौत हृदयविदारक है। उन्होंने कहा कि क्या ये आत्महत्या है या सुनियोजित हत्या? उत्तर प्रदेश भाजपा की ये कैसी सरकार है जो देश के संतों महंतों की रक्षा करने में भी समर्थ नहीं?

मठ के सेवादारों से पूछताछ 
पुलिस अधिकारियों ने मठ के सेवादारों से पूछताछ की है। सोमवार को सुबह से ही मठ आने और जाने वालों की सूची भी मांगी गई है। महंत नरेंद्र गिरी के मोबाइल नंबर की भी जांच की जा रही है। 






पीएम मोदी ने उन्हें अनेक धाराओं को जोड़ने वाला बताया
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्री नरेंद्र गिरि जी का देहावसान अत्यंत दुखद है। आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति समर्पित रहते हुए उन्होंने संत समाज की अनेक धाराओं को एक साथ जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई। प्रभु उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान दें। ॐ शांति!!
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पाक आतंकी साजिश का प्रयागराज कनेक्शन : आका पाकिस्तान में, सैकड़ों किलोमीटर दूर करेली में तैयार किया गया आतंकी मॉड्यूल

महंत नरेंद्र गिरि : अपने गुरु की पीएम तक शिकायत लेकर पहुंच गए थे शिष्य आनंद गिरि, गुरु पूर्णिमा पर दर्शन करने भी नहीं आए

अखाड़ा परिषद अध्यक्ष नरेंद्र गिरि की मौत को लोग उनके पूर्व शिष्य आनंद गिरि से हुए विवाद से भी जोड़कर देख रहे हैं। विवाद बढ़ने के बाद आनंद गिरि ने वीडियो जारी कर नरेंद्र गिरि के चरण पकड़कर माफी मांग ली थी और संत परंपरा के अनुसार महंत नरेंद्र गिरि ने उन्हें माफ करने का वीडियो जारी किया था, लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ था।

सार्वजनिक तौर पर वीडियो जारी करके भले ही विवाद को खत्म करने का संदेश दिया गया, लेकिन अंदर ही अंदर विवाद कायम रहने की खबर आ रही थी। यही कारण है कि गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु नरेंद्र गिरि के दर्शन और पूजन करने के लिए आनंद गिरि नहीं आए थे। इसके बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि विवाद अभी थमा नहीं है।

शिष्य ने गुरु की शिकायत राष्ट्रपति और पीएम से की थी
निरंजनी अखाड़े से निष्कासित महंत आनंद गिरि और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के बीच मठ-मंदिरों की जमीनों को लेकर विवाद हो गया था। इसके बाद महंत आनंद गिरि के शिष्य स्वामी आनंद गिरि ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री को पत्र भेजकर अखाड़े के विवाद की शिकायत भी की थी। 

उन्होंने आरोप लगाया कि शहर के कीडगंज स्थित गोपाल मंदिर को भी आधा बेच दिया गया है। मठ और मंदिर की बेची गई जमीनों के करोड़ों रुपये के दुरुपयोग की उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने संगम स्थित बड़े हनुमान मंदिर के लाखों रुपये के चढ़ावे और प्रसाद से होने वाली बेहिसाब आमदनी की भी जांच कराने की मांग की थी। शिकायत में उन्होंने लिखा था कि केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ निरंजनी अखाड़े को मठ बाघंबरी गद्दी के अलावा अखाड़े की बेची गई जमीनों के करोड़ों रुपये किस मद में खर्च किए गए, इसकी जांच करानी चाहिए।
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नरेंद्र गिरी के बेबाक बयान: तालिबान का समर्थन करने वाले मुस्लिम धर्मगुरुओं को बताया था गद्दार, मुनव्वर राणा को दी थी अफगानिस्तान जाने की नसीहत 

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और बाघंबरी गद्दी प्रयागराज के महंत नरेंद्र गिरी अपने बयानों को लेकर भी हमेशा सुर्खियों में रहते थे। कभी तालिबान का समर्थन करने वालों को देश का गद्दार बताने तो कभी मशहूर शायर मुनव्वर राणा को अफगानिस्तान जाकर बस जाने के बयान को लेकर वह काफी चर्चा में रहते थे।

तीन तलाक का मुद्दा हो या जनसंख्या नियंत्रण कानून का मामला हो सभी मुद्दों पर वह मुखर होकर बयान जारी करते थे। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघ चालक के भारत में रहने वाले मुसलमानों के पूर्वज हिंदू होने के बयान का भी उन्होंने खुलकर समर्थन किया था। 

किन्नर अखाड़े ने भी खोल दिया था मोर्चा
किन्नर अखाड़े को अखाड़े की आधिकारिक मान्यता न देने पर उनकी काफी आलोचना हुई थी और किन्नर अखाड़े से जुडे़ महंतों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। 

कंगना रनौत का किया था समर्थन
बॉलीवुड की अभिनेत्री कंगना रणौत के बयानों का समर्थन करने पर भी महंत नरेंद्र गिरी चर्चा में आ गए थे। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कंगना रणौत को देश की बेटी बताया था। उन्होंने कहा था कि कंगना बहादुर और हिम्मत वाली बेटी हैं, जिन्होंने बॉलीवुड के माफियाओं और ड्रग माफियाओं के रैकेट का भंडाफोड़ किया है। 

कंगना ने निडर होकर बॉलीवुड में एक विशेष समुदाय के वर्चस्व के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई है। इससे न केवल बॉलीवुड के माफिया डर गए हैं, बल्कि सरकार के भी कदम उखड़ रहे हैं। यही वजह है कि सच की आवाज को दबाने के लिए उद्धव ठाकरे सरकार ने कंगना रणौत के कार्यालय पर बुलडोजर चलवाया है और बदले की कार्रवाई की है। 
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खुदकुशी : प्रयागराज में जीआरपी के जवान ने कनपटी पर गोली मारकर खुद को उड़ाया, कानपुर में थे तैनात

प्रयागराज स्थित जीआरपी लाइंस में एक जीआरपी के जवान ने खुद को गोली मारकर हत्या कर ली। इस घटना से हड़कंप मच गया। गोली चलने के आवाज पर आसपास के बैरकों में रहने वाले सिपाही और अधिकारी पहुंच गए। सूचना पाकर अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। घटना के संबंध में कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है। बताया जाता है कि आत्महत्या करने वाले सिपाही की वर्तमान में तनाती कानपुर में है। 

प्रयागराज में मांडा थाना क्षेत्र के चकडीहा गांव के मूल निवासी चिंतामणि यादव (३८) जीआरपी मे सिपाही थे। वर्तमान में उनकी तैनाती कानपुर में थी। कुछ दिन पहले वह प्रयागराज आए थे। सोमवार को खुल्दाबाद जीआरपी स्थित लाइंस के बैरक में खुद को गोली मार ली। गोली चलने की आवाज से दूसरे बैरक में रहने वाले सिपाही पहुंच गए। 

वह खून से लथपथ पड़े थे। आनन फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। किस बात को लेकर वह परेशान थे इसका कारण पता नहीं चल सका है। सूत्रों की मानें तो सिपाही चिंतामणि यादव अवकाश न मिलने के कारण डिप्रेशन में चल रहे थे। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यह बात उनके संज्ञान में नहीं है। घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है। 
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