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High Court : प्रबंध समिति की ओर से नियुक्त अध्यापकों कोभर्ती में वरीयता देने से इनकार, याचिका खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रबंध समिति द्वारा खाली पद पर नियुक्त अध्यापक को बोर्ड की नियमित भर्ती में वरीयता देने की मांग में दाखिल याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि इंटरमीडिएट एक्ट में प्रबंध समिति को केवल शिक्षा सत्र के लिए नियुक्ति का अधिकार है। वह पिछली रिक्तियों पर नियुक्ति नहीं कर सकता, जो बोर्ड को अधिसूचित की जा चुकी है। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने आशुतोष कुमार मिश्र व तीन अन्य की याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने प्रतिवाद किया।

याची का कहना था कि वह 2018 से कार्यरत है। वेतन नहीं दिया गया तो याचिका दायर की। कोर्ट ने डीआईओएस बलिया को निर्णय लेने का निर्देश दिया। पालन नहीं किया तो अवमानना याचिका पर भी निर्णय लेने का निर्देश दिया गया है। इसी बीच बोर्ड ने भर्ती निकाली। याचीगण ने भी आवेदन दिया है। याचिका दायर कर इस भर्ती में अध्यापन अनुभव के आधार पर वरीयता देने की मांग की गई थी। कोर्ट ने वरीयता देने से इंकार करते हुए याचिका खारिज कर दी। संवाद
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नरेंद्र गिरि: मौत वाले दिन महंत ने दोपहर की चाय से कर दिया था इनकार, जब शाम तक भी नहीं आए तो...

महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध हाल में मौत मामले में दर्ज एफआईआर में भी आनंद गिरि पर संगीन आरोप लगाए गए हैं। मुकदमा वादी व मठ के पुजारी अमर गिरि पवन महाराज की ओर से जार्जटाउन थाने में दी गई तहरीर में आरोप लगाया गया है कि महंत स्वयं कहा करते थे कि आनंद गिरि उन्हें बहुत परेशान करता रहता है। तहरीर में कहा गया है कि, 20 सितंबर को 12.30 बजे महंत मठ के कक्ष में भोजन करने के बाद रोज की तरह विश्राम करने चले गए। रोज दोपहर तीन बजे उनका चाय पीने का समय होता था लेकिन उस दिन उन्होंने पहले ही मना कर दिया था। साथ ही यह भी कहा था कि चाय पीना होगा तो वह स्वयं बता देंगे। शाम पांच बजे तक कक्ष से बाहर नहीं आने पर उनके पास फोन किया गया, लेकिन नंबर बंद मिला। आगे पढ़िए फिर क्या हुआ और आखिर क्यों एफआईआर में आद्या तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी का नाम नहीं है...
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महंगी पड़ी अभद्रता : सरकारी वकील को घर से घसीट थाने ले गई पुलिस, दरोगा सहित पांच पुलिसकर्मी निलंबित

जार्ज टाउन थाने की पुलिस को सरकारी वकील से ज्यादती और अभद्रता महंगी पड़ गई। राज्य विधि अधिकारी को बिना किसी ठोस वजह के और बिना जांच के मारते पीटते थाने में बंद करने की घटना पर हाई कोर्ट द्वारा  संज्ञान लेने के बाद  एसएसपी प्रयागराज ने सब इंस्पेक्टर संजीव कुमार सहित पांच पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया है।

भुक्त भोगी राज्य विधि अधिकारी पंकज सिंह के साथ हुई इस घटना की जानकारी होने पर अपर शासकीय अधिवक्ता संजय सिंह ने इस घटना की शिकायत एसएसपी से की थी तथा कोर्ट को भी अवगत कराया था। अधिवक्ता पंकज सिंह टैगौर  टाउन के शिवम विहार अपार्टमेंट में रहते हैं। वो बिल्डिंग सोसायटी के सचिव भी हैं। संजय सिंह बताते हैं कि उन्हीं के बिल्डिंग में संतराम यादव का एक फ्लैट है। जिसमें काफी समय से ताला बंद है। 19 सितंबर को कुछ लड़के और लड़कियां उस फ्लैट में किराए पर रहने के लिए आए ।रात लगभग 12 बजे वह लोग फ्लैट में हल्ला गुल्ला करने लगे तो बिल्डिंग में रहने वाले अन्य लोगों ने उन से इसकी शिकायत की। जिस पर उन्होंने शोर मचा रहे लड़के लड़कियों से ऐसा करने का कारण पूछा तो वो लोग उनसे उलझ गए। इस पर विवाद हो गया। 

इसी बीच किसी ने जॉर्ज टाउन थाने पर फोन करके पुलिस बुला ली। आरोप है कि सब इंस्पेक्टर संजीव कुमार अपने साथ चार कांस्टेबल लेकर के आए और बिना बात को पूरी तरीके से समझे पंकज सिंह को पीटना शुरू कर दिया। उनको पीटते व गालियां देते हुए घसीट कर थाने ले गए और लॉकअप में बंद कर दिया। उनको सुबह छोड़ा गया। 

संजय सिंह ने इसकी शिकायत एसएसपी से की थी। जिस पर एसएसपी ने क्षेत्राधिकारी आस्था जायसवाल को मामले की जांच सौंपी। बिल्डिंग में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज और जांच में यह साबित हो गया कि पंकज सिंह द्वारा लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही है। रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी ने उप निरीक्षक संजीव कुमार, हेड कांस्टेबल जयप्रकाश मिश्रा, कांस्टेबल अनुज, राधेश्याम साहनी और रणविजय सिंह को निलंबित कर विभागीय जांच बैठा दी है।  

एसपी सिटी ने बुधवार को हाईकोर्ट में उपस्थित होकर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ की गई कार्रवाई से अदालत को अवगत कराया। उधर पंकज सिंह का कहना है की पुलिस पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई से ऐसा लगता है कि उपद्रव करने वालों की उनसे पहले से सांठगांठ थी और सब कुछ किसी वजह से सोच समझ कर के किया गया है।
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महंत नरेंद्र गिरि केस : सीबीआई ने दर्ज की एफआईआर, करा सकती है सीन रिक्रिएशन

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध दशा में मौत के मामले की जांच सीबीआई ने शुरू कर दी है। इस मामले में सीबीआई ने केस भी दर्ज कर लिया है। महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य अमर गिरि की ओर से जार्जटाउन थाने में दर्ज कराए गए मुकदमे में सिर्फ आनंद गिरि पर ही शक जाहिर किया गया है।

आद्या प्रसाद तिवारी और उसके बेटे संदीप तिवारी के नाम का तहरीर में उल्लेख नहीं
गिरफ्तार किए गए दो अन्य आरोपी पिता-पुत्र आद्या प्रसाद तिवारी और उसके बेटे संदीप तिवारी के नाम का तहरीर में उल्लेख नहीं है। यूपी सरकार ने बुधवार को ही घटना की सीबीआई से जांच कराने की सिफारिश केंद्र सरकार से कर दी थी, जिस पर अधिसूचना जारी होने के बाद छह सदस्यीय टीम का गठन भी कर दिया गया है। बताया जाता है कि सीबीआई की टीम सबसे पहले सीन रिक्रिएशन कराएगी। 

आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा 306 के तहत मामला सीबीआई ने दर्ज कर किया
प्रयागराज के अल्लापुर इलाके में स्थित श्री बाघंबरी गद्दी मठ में सोमवार की शाम संदिग्ध दशा में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि का शव छत के पंखे से लटकता मिला था। उनके पास से 14 पन्नों का सुसाइड नोट भी बरामद किया गया था। इस मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा 306 के तहत मामला सीबीआई ने दर्ज कर किया है।  पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक महंत की मौत दम घुटने से हुई है। महंत के पास से मिले सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस ने महंत के शिष्य रहे योग गुरु आनंद गिरि, संगम स्थित लेटे हनुमानजी मंदिर के प्रधान पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी और उसके पुत्र संदीप तिवारी को गिरफ्तर कर नैनी जेल भेज दिया है। 

एएसपी सीबीआई स्पेशल क्राइम तृतीय केएस नेगी करेंगे जांच
सीबीआई विशेष अपराध तृतीय नई दिल्ली के पुलिस अधीक्षक बसील केरकेट्टा ने छह सदस्यीय टीम का गठन महंत की मौत की जांच के लिए किया है। जांच टीम अपर पुलिस अधीक्षक सीबीआई विशेष अपराध तृतीय केएस नेगी के नेतृत्व में विवेचना को आगे बढ़ाएगी। 

सीबीआई ने केस दर्ज करने की जानकारी अधिकारियों को भेजी
महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले में एफआईआर दर्ज करने के बाद सीबीआई की ओर से इसकी आधिकारिक जानकारी उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। जिसमें स्पेशल सीबीआई मजिस्ट्रेट लखनऊ, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रयागराज, अपर मुख्य सचिव गृह, उत्तर प्रदेश, पुलिस महानिदेशक यूपी, एसएसपी प्रयागराज, सीबीआई क्राइम ब्रांच मुख्यालय आदि को भेजी गई है। 

सीबीआई इन लोगों से कर सकती है पूछताछ
शीर्ष जांच एजेंसी सीबीआई महंत की मौत के मामले में उनके शिष्य रहे योग गुरु आनंद गिरि, लेटे हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी रहे आद्या प्रसाद तिवारी, आद्या के पुत्र संदीप तिवारी, घटना के बाद दरवाजा खोलकर शव को नीचे उतारने वाले शिष्य सुमित तिवारी, सर्वेश तिवारी और धनंजय, महंत की सुरक्षा में तैनात रहे सिपाही अजय सिंह, विवाद के बाद आनंद गिरि से समझौता कराने वाले एडिशनल एसपी ओम प्रकाश पांडेय, भाजपा नेता सुशील मिश्रा, सपा सरकार में राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त रहे इंदू प्रकाश मिश्रा, सुसाइड नोट में उत्तराधिकारी बनाए गए महंत बलवीर गिरि और घटना होने के बाद सबसे पहले मौके पर पहुंचने वाले आईजी केपी सिंह से भी पूछताछ हो सकती है।

आनंद गिरि और आद्या तिवारी की वीडियो कांफ्रेंसिंग से होगी पेशी
अखाड़ा परिषद अध्यक्ष नरेंद्र गिरि की मौत के मामले में गिरफ्तार कर नैनी जेल भेजे गए आरोपी आनंद गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी को कोर्ट में फिजिकली पेशी नहीं होगी। सीजेएम कोर्ट ने दोनों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेशी कराने का निर्देश दिया है। बता दें कि आनंद गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी ने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर जेल में और पेशी के दौरान अपनी जान को खतरा बताया था। 

 
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी

अखाड़ों की आमदनी : महंत नरेंद्र गिरि की बाघंबरी मठ और निरंजनी अखाड़े के पास एक हजार करोड़ की संपत्ति

बाघंबरी गद्दी मठ और निरंजनी अखाड़े के पास 1200 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है। प्रयागराज के अलावा, मेजा, करछना, कौशांबी, झूंसी में पांच सौ बीघा से अधिक जमीनें हैं। ऐसे में नरेंद्र गिरि की मौत को संपत्ति हड़पने की कड़ी से जोड़कर भी देखा जा रहा है। जांच टीम इन बिंदुओं को भी जोड़कर चल रही है। 

प्रयागराज के अल्लापुर इलाके में स्थित बाघंबरी गद्दी मठ है। ये मठ करीब 5-6 बीघे जमीन में बना है। यहां निरंजनी अखाड़े के नाम का एक स्कूल और गौशाला भी है। वहीं, अल्लापुर इलाके से कुछ दूर स्थित दारागंज में भी अखाड़े की बेशकीमती जमीन है। प्रयागराज के संगम तट पर लेटे हुए हनुमान जी का मंदिर भी इसी बाघंबरी मठ का ही है। इस मंदिर में केवल प्रयागराज नहीं बल्कि आस-पास के जिलों के भक्त भी दर्शन करने आते हैं। यह मंदिर करीब 700 वर्ष पुराना है।

संगम नदी के किनारे बसे होने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इस मंदिर पर हर महीने लाखों रुपये का चढ़ावा आता है। संगम स्नान का पूरा फल तभी मिलता है जब लेटे हनुमानजी के दर्शन कर लिए जाते हैं इस तरह की मान्यता भक्तों में है। 
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय : कर्मचारी भर्ती के लिए जारी किया गया विज्ञापन, लंबे समय से रिक्त चल रहे थे पद

इंतजार के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कर्मचारी भर्ती का विज्ञापन जारी इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कई सालों से कर्मचारियों के कई पद खाली थे। यहां लंबे समय से कर्मचारियों के खाली पदों को भरने की मांग हो रही थी। शुक्रवार को विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसका विस्तृत विज्ञापन जारी किया। इसके साथ ही ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में गैर शैक्षणिक पदों पर लंबे समय से भर्ती नहीं हुई थी। कर्मचारियों के सेवानिवृत्त हो जाने के कारण काफी समय से पद रिक्त चल रहे थे। इसको देखते हुए पदों को भर्ती करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उम्मीद है कि जल्द ही इसके लिए परीक्षा आयोजित होगी और उसके बाद नियुक्तियां शुरू की जाएंगी। इसके अलावा शिक्षकों के पदों पर भी भर्ती की प्रक्रिया फिलहाल जारी है। इसके लिए इसी महीने के शुरुआत में अधिसूचना जारी कर दी गई थी। जिसकी प्रक्रिया चल रही है। 

कर्मचारियों की भर्ती के लिए भी विज्ञापन जारी किया जा चुका है। अभ्यर्थियों से आनलाइन ही आवेदन मांगे गए हैं। कोरोना वायरस के चलते विश्वविद्यालय सहित कई संस्थानों में भर्ती प्रक्रिया पर विराम लग गया था। अब जब बीमारी से कुछ निजात मिलने के बाद स्थित काबू में आ रही है तो भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया है। 
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प्रयागराज में घर के बाहर सो रही मां बेटी की नृशंस हत्या, गांव में फैली सनसनी, मौके पर पह

प्रयागराज में नवाबगंज थाना क्षेत्र के जगदीशपुर मसनी गांव में बीतीरात मां-बेटी की गला रेतकर बेरहमी से हत्या कर दी गई। सुबह घटना की जानकारी होने पर गांव में सनसनी फैल गई। हजारों की संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। सूचना पाकर जिले के आला अधिकारियों समेत स्थानीय पुलिस और डॉग स्क्वायड की टीम भी मौके पर पहुंच गई। घटना की छानबीन की जा रही है।

नवाबगंज के जगदीशपुर मसनी गांव में बरामदे में सो रही मां अंजली (35) पत्नी अंजनी सरोज और बेटी संजीवनी  (13) पुत्री अंजनी सरोज की बेरहमी से हत्या कर दी गई। सुबह उनका शव बिस्तर पर खून से सना मिला। बताया जाता है कि पति अंजनी सरोज मुंबई में रहकर प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता है। हत्या किसलिए, किसने और क्यों की इसका पता नहीं चल पा रहा है। गांव में घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चा व्याप्त है। पुलिस कई बिंदुओं पर छानबीन कर रही है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। 
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महंत नरेंद्र गिरि केस : बाघंबरी मठ में किसी भी समय पहुंच सकती है सीबीआई, जांच रिपोर्ट हैंडओवर करने की तैयारी

नवाबगंज में मां बेटी की हत्या के बाद घर पर जुटी भीड़।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष, मठ बाघंबरी गद्दी और संगम स्थित लेटे हनुमान मंदिर के महंत नरेंद्र गिरि की आत्महत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए देश की शीर्ष जांच एजेंसी सीबीआई कभी भी प्रयागराज स्थित मठ में पहुंच सकती है। दो दिन से सीबीआई टीम के प्रयागराज आने की चर्चा चल रही है। इन्हीं चर्चा के बीच दारागंज पुलिस और एसएसपी प्रयागराज की ओर से गठित 18 सदस्यीय एसआईटी ने कागजात को हैंडओवर करने की तैयारी शुरू कर दी है। केंद्र सरकार ने घटना के पर्दाफाश के लिए छह सदस्यीय टीम का गठन किया है। 

सीएम ने 24 घंटे के भीतर कर दी थी सीबीआई जांच की सिफारिश
बता दें कि अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि का शव 19 सितंबर को बाघंबरी गद्दी मठ के एक कमरे में छत के पंंखे के सहारे लटकता मिला था। इस घटना ने सभी को हिलाकर रख दिया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह सहित बड़ी संख्या में नेताओं और अखाड़ा परिषद से जुड़े 13 अखाड़ों के प्रमुखों ने पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। घटना की गंभीरता को देखते हुए और सुसाइड नोट को लेकर उठ रहे सवालों को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महंत की मौत के 24 घंटे के भीतर ही मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश केंद्र सरकार से कर दी थी। 
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इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला :  सहायक अध्यापक भर्ती मामले में एक गलत प्रश्न का अंक याचिकाकर्ताओं को देने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2018 की सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में पूछे गए सवालों के सही उत्तर को लेकर दाखिल अपील पर अभ्यर्थियों को आंशिक राहत दी है। कोर्ट ने एक प्रश्न के उत्तर को गलत मानते हुए उसका एक अंक उन अभ्यर्थियों को देने का निर्देश दिया है, जिन्होंने हाईकोर्ट में अपील या याचिका दाखिल की है और जिनके एक ही अंक कम पड़ रहे हैं।

अभ्यर्थियों की ओर से छह सवालों के उत्तर को लेकर चुनौती दी गई थी। उनके मुताबिक भर्ती प्राधिकारी ने जिन उत्तरों को सही माना है, वह सही नहीं हैं। कोर्ट ने इनमें से सिर्फ एक प्रश्न संख्या 60 को लेकर की गई आपत्ति को ही सही पाया। इस एक प्रश्न का एक अंक उन अभ्यर्थियों को देने का निर्देश दिया है, जिन्होंने याचिका या अपील दाखिल की है और उनमें भी यह अंक उन्हीं अपीलार्थियों, याचिकाकर्ताओं को मिलेगा जिनके एक अंक ही कम पड़ रहे हैं। कोर्ट ने कहा है कि यदि यह एक अंक पाने के बाद अभ्यर्थी मेरिट में आ जाता है तो उसे नियुक्ति दी जाए। अभिषेक श्रीवास्तव व दर्जनों अन्य की ओर से दाखिल विशेष अपीलों पर कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति एमए भंडारी और न्यायमूर्ति अनिल कुमार ओझा की पीठ ने सुनवाई की।

विशेष अपील में एकल न्यायपीठ के फैसले को चुनौती दी गई थी। एकल पीठ ने अभ्यर्थियों का दावा खारिज कर दिया था। अपीलों में कहा गया कि सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा छह जनवरी 2019 को हुई। इसकी उत्तर कुंजी पांच अगस्त 20 को जारी की गई। उत्तर कुंजी से मिलान करने पर अभ्यर्थियों ने छह प्रश्नों पर आपत्ति की। उनके मुताबिक परीक्षा प्राधिकारी ने जिन उत्तरों को सही माना है वह सही है जबकि अभ्यर्थियों द्वारा दिए गए जवाब सही हैं।

रणविजय सिंह केस के आलोक में परीक्षण
हाईकोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रणविजय सिंह केस में प्रतिपादित विधि सिद्धांत के आलोक में मामले का परीक्षण किया। इस केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उत्तर पुस्तिकाओं के पुर्नपरीक्षण या स्क्रूटनी के मामले में अदालतों के अधिकार सीमित हैं। यदि भर्ती के नियमों में पुर्नपरीक्षण व स्क्रूटनी के प्रावधान हैं तो अधिकारियों को यह अधिकार अभ्यर्थियों को देना चाहिए। यदि प्रावधान नहीं है तो अदालत तभी पुर्नपरीक्षण या स्क्रूटनी का आदेश दे सकती है जबकि ठोस साक्ष्यों के साथ यह प्रमाणित कर दिया जाए कि परीक्षा प्राधिकारी ने वास्तव में सही उत्तर चुनने में गलती की है।

सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा है कि संदेह होने की दशा में संदेह का लाभ परीक्षा प्राधिकारी को मिलेगा न कि अभ्यर्थी को। अदालत ने सभी छह प्रश्नों का बारी बारी से परीक्षण किया। पांच प्रश्नों में अभ्यर्थी अपने दावे को साबित नहीं कर सके। जबकि प्रश्न संख्या में 60 में विकल्प के रूप में दिए गए लेखक का नाम गलत होने के कारण कोर्ट ने इस प्रश्न का एक अंक समिति अभ्यर्थियों को देने का निर्देश दिया है।

चयनित हो चुके लोग नहीं होंगे प्रभावित
हाईकोर्ट ने कहा है कि जो लोग पहले से चयनित हो चुके हैं और नियुक्ति पा चुके हैं उन पर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। चयन व नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो चुकी है इसलिए ज्यादा संख्या में या सभी अभ्यर्थियों को अंक देने से पूरी प्रक्रिया अस्त व्यस्त हो जाएगी। लिहाजा लाभ सिर्फ उनको मिलेगा जिन्होंने याचिका दाखिल की है और जिनके एक अंक ही कम पड़ रहे हैं। यदि किसी के दो अंक कम हो रहे हैं तो उसको इस आदेश का लाभ नहीं मिलेगा।
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नरेंद्र गिरि केस : फोरेंसिक लैब में परखी जाएगी नरेंद्र गिरि की सुसाइड नोट की सत्यता

अखाड़ा परिषद अध्यक्ष नरेंद्र गिरि के कथित सुसाइड नोट को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कोई कार्रवाई प्रशासन करेगा। महंत के सुसाइड नोटपर तरह-तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। कोई कह रहा है कि उनकी भाषा टूटी फूटी थी तो कोई कह रहा है कि वह हस्ताक्षर भी ठीक से नहीं कर  पा रहे थे। इस तरह की चर्चा के बीच सुसाइड नोट की सत्यता के लिए फोरेंसिक लैब भेजा गया है। 

महंत कैलाशानंद ब्हमचारी ने सुसाइड नोट पर सवाल उठाते हुए इसे पूरी तरह से फर्जी बताया है। उन्होंने पूरे मामले की गहराई से जांच की मांग की है। पूर्व सांसद राम विलास वेदांती ने तो बलवीर गिरी पर ही साजिश का आरोप मढ़ दिया है।

कहा कि जिसका उत्तराधिकारी के लिए नाम लेटरपैड में लिखा गया है आत्महत्या के पीछे उसी की साजिश हो सकती है। महंत को वह दो दशकों से जानते हैं। वह आत्महत्या जैसा अपराध कर ही नहीं सकते हैं। यह सब मठ पर कब्जे के लिए साजिश भी हो सकती है। 
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नरेंद्र गिरि मौत मामला : आरोपी आनंद गिरि के चेहरे पर पश्चाताप के भाव नहीं, सिर्फ एक ही बात दोहराई- मैं निर्दोष

महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध हाल में मौत के मामले में जेल भेजे जाने से पहले आनंद गिरि से करीब 27 घंटे तक पूछताछ चलती रही। इस दौरान उसके चेहरे पर किसी तरह के पश्चाताप के भाव नहीं दिखे। पुलिस के ज्यादातर सवालों पर वह सिर्फ एक ही जवाब देता रहा कि वह निर्दोष है। इस दौरान उसके चेहरे पर ग्लानि या गुरु की मौत पर किसी तरह के दुख के भाव भी नहीं दिखे। वह शून्य भाव से जवाब देता रहा।

महंत की मौत के बाद आनंद गिरि को सोमवार रात ही हरिद्वार से गिरफ्तार कर लिया गया था। मंगलवार दोपहर 12 बजे के करीब उसे शहर लाकर पुलिस लाइन ले जाया गया, जहां उससे पूछताछ शुरू हुई। आला अफसरों ने एक-एक कर उससे पूछताछ की।

एक दिन पहले गठित एसआईटी के सदस्यों भी उससे सवाल किए। सूत्रों का कहना है कि इस दौरान उसके चेहरे पर पश्चाताप या ग्लानि का कोई भाव नहीं रहा। वह हर सवाल का शून्य भाव से जवाब देता रहा। ज्यादातर सवालों के जवाब पर उसका यही कहना था कि वह निर्दोष है और उसे फंसाया गया।
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हत्या या आत्महत्या?: नरेंद्र गिरि की मौत से जुड़ा एक और वीडियो आया सामने, शव फंदे पर तो कैसे चलता रहा पंखा

अखाड़ा परिषद अध्यक्ष की संदिग्ध हाल में मौत के मामले में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है जो घटना के ठीक बाद पुलिस के पहुंचने के दौरान का है। सबसे खास बात यह है कि इसमें फर्श पर महंत का शव पड़ा दिखाई दे रहा है और कमरे का पंखा चल रहा है। वीडियो में आईजी केपी सिंह इस बाबत मठ में रहने वाले शिष्यों से पूछताछ करते भी दिख रहे हैं।

1.45 मिनट का यह वीडियो उस कमरे का है, जिसमें महंत का शव फंदे पर लटका मिला। वीडियो शुरू होते ही महंत नरेंद्र गिरि का शव फर्श पर पड़ा नजर आता है और बगल में ही महंत के कथित सुसाइड नोट में उत्तराधिकारी बताए गए बलबीर गिरि खड़े नजर आते हैं। वीडियो के अगले फ्रेम में एक फोटोग्राफर और एक दरोगा नजर आते हैं। इसके बाद कैमरा कमरे में पड़े बिस्तर और वहां सजाई गईं तस्वीरों व सर्टिफिकेट की ओर घूमता है। 

अगले फ्रेम में कैमरा कमरे में लगे पंखे की तरफ किया जाता है, जिसमें पंखा चलता हुआ दिखाई देता है। पंखे की रॉड जिस चुल्ले में फंसी होती है, इसी चुल्ले में पीले रंग की नॉयलॉन की उस रस्सी का एक हिस्सा भी फंसा नजर आता है, जिससे बनाए गए फंदे पर महंत का शव लटका मिला। वीडियो में फर्श पर मृत पड़े महंत के गले में रस्सी का एक टुकड़ा भी फंसा दिखाई देता है। 

कुछ ही देर बाद आईजी केपी सिंह कमरे के दरवाजे पर खड़े महंत के शिष्यों से यह पूछताछ करते नजर आते हैं कि पंखा चल रहा था या इसे किसी ने चलाया। इस पर सुमित नाम का शिष्य पहले यह कहता है कि पंखा उसने चलाया। लेकिन जब आईजी उससे इस बारे में पूछते हैं तो वह इसका जवाब न देकर अन्य बातें बताने लगता है।



बड़ा सवाल: रस्सी के तीन हिस्से कैसे हुए
वीडियो देखने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि महंत ने जिस रस्सी से फांसी लगाई, उसके तीन हिस्से कैसे हुए। अगर माना जाए कि रस्सी काटकर शव को फंदे से नीचे उतारा गया तो भी यह सवाल अनुत्तरित ही रहता है। क्योंकि इसमें भी रस्सी के दो ही भाग होंगे। जबकि कमरे में रस्सी तीन हिस्सों में बंटी मिली।

सबसे पहला हिस्सा चुल्ले में फंसा मिला। दूसरा हिस्सा महंत के गले में फंसा था। जबकि रस्सी का तीसरा हिस्सा कमरे में पड़ी शीशे की मेज पर रखा मिला। यह भी कहा जा रहा है कि शव को फंदे से उतारने के बाद अगर महंत के गले से रस्सी निकालनी थी तो इसे गांठ खोलकर अलग किया जाता। न कि रस्सी को काटकर दो हिस्से किए जाते जिसमें कि एक हिस्सा उनके गले में ही रह जाता। 
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