Kargil Vijay Diwas: ‘शादी के लिए छुट्टी मिल गई है... जल्दी ही हम घर के लिए निकलेंगे।’

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आजमगढ़ Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Sun, 26 Jul 2020 11:50 PM IST
कारगिल विजय दिवस
कारगिल विजय दिवस - फोटो : अमर उजाला
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‘शादी के लिए छुट् टी मिल गई है... जल्दी ही हम घर के लिए निकलेंगे।’ ये चिट्ठी लिखी थी 13 कुमाऊं रेजीमेंट में तैनात नत्थूपुर गांव के राम रामसमुझ यादव ने। हालांकि ये चिट्ठी उनके पार्थिव शरीर के साथ मिली।
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शहीद रामसमुझ यादव का जन्म 30 अगस्त 1977 को किसान परिवार में हुआ था। 1997 में वाराणसी में परीक्षा देकर आर्मी में भर्ती हुए थे।

ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वह घर आए। उन्हें 13 कुमाऊं रेजीमेंट में तैनाती मिली। पहली पोस्टिंग सियाचिन ग्लेशियर के लिए हुई। तीन महीने बाद ग्लेशियर से नीचे आए तो पिता राजनाथ यादव और माता प्रतापी देवी ने उनकी शादी तय कर दी। चिट्ठी भेजकर उन्हें घर बुलाया।


रामसमुझ ने भी आवेदन किया और छुट्टी मंजूर होते ही घरवालों के लिए चिठ्ठी लिखी। यह बात 1999 की है। उसी समय कारगिल में युद्ध शुरू हो गया और उनकी छुट्टी निरस्त कर दी गई। तब तक रामसमुझ चंडीगढ़ पहुंच गए थे।

वहीं से इन्हें बुला लिया गया और पलटन के साथ कारगिल भेजा गया। युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए 30 अगस्त 1999 को शहीद हो गए। जिस दिन उनका पार्थिव शरीर घर पहुंचा, उसी दिन डाक से वह चिट्ठी भी पहुंची, जिसमें उन्होंने शादी के लिए छुट्टी मिलने की बात लिखी थी।

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