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सूखे का सर्वाधिक असर नानपारा में, मिहींपुरवा में सबसे कम

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 26 Sep 2022 11:27 PM IST
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बहराइच। मौसम की बेरुखी का सीधा असर जिले के 27100.6 हेक्टेयर क्षेत्र में लगी फसल पर पड़ा है। खेती किसानी के समय में पर्याप्त बरसात न होने से बने सूखे का सर्वाधिक असर नानपारा तो सबसे कम असर मिहींपुरवा तहसील क्षेत्र की फसल पर पड़ा है। 116.6 हेक्टेयर में लगाई गई 50 प्रतिशत से ज्यादा फसल समय पर सिंचाई न हो पाने के कारण सूखे के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। यह जानकारी मौसम की बेरुखी से चौपट हुई खेती किसानी के तहसीलवार सर्वे की रिपोर्ट में सामने आयी है। तहसील स्तर पर गठित राजस्व व कृषि विभाग की संयुक्त टीमों द्वारा किए गए सर्वे की तैयार रिपोर्ट डीएम की संस्तुति के बाद शासन को भी भेज दी गयी है।

मौसम की मार से परेशानहाल किसानों को अब सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही नुकसान की भरपाई के एवज में शासन स्तर से मिलने वाली मदद तय होगी। जिले में लगभग 1,60,432 हेक्टेयर भूमि पर इस बार किसानों की ओर से धान की फसल का रोपण किया गया था। जरूरत के समय औसत से भी कम बारिश होने के कारण पूरे जिले में इस बार सूखे जैसे हालात रहे। इसे देखते हुए ही शासन की ओर से तहसीलवार स्तर पर सूखा सर्वे रिपोर्ट तैयार कराने का निर्देश दिया गया था।

डीएम डॉ. दिनेश चंद्र के निर्देशन में राजस्व व कृषि विभाग के 60 अधिकारी व कर्मचारी सूखा सर्वे व सत्यापन रिपोर्ट तैयार करने में जुटे थे। इसमें जिले की 27100.6 हेक्टेयर जमीन में लगी फसल सूखे से प्रभावित मिली। इसमें से 9256.4 हेक्टेयर भूमि पर लगी फसल को सूखे से 33 से 50 प्रतिशत और 116.6 हेक्टेयर जमीन पर लगी फसल को 50 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान चिह्नित हुआ। तहसील स्तर पर तैयार हुई सूखा प्रभावित सर्वे रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए शासन को भेज दी गई है। मौसम की बेरुखी से इस बार जिले में औसत से भी कम 615.33 मिलीमीटर ही बारिश दर्ज हुई है जो औसत बरसात की 65 फीसदी ही है। इसके चलते जिले के कई इलाकों में सूखे जैसे हालात उत्पन्न होने से खेती किसानी से जुड़े काश्तकार परेशानहाल हैं।
तहसील सूखा प्रभावित (हेक्टेयर में) 33 से 50 प्रतिशत (हेक्टेयर में)
नानपारा 11711.4 787.9
महसी 9085 525.8
बहराइच सदर 4781.8 377.9
कैसरगंज 113.3 113.3
पयागपुर 6286.6 351.23
मिहींपुरवा 112.4 80.2
तहसील स्तर पर राजस्व लेखपालों व कृषि विभाग के स्तर पर गठित संयुक्त टीमों द्वारा मौसम की बेरुखी से हुए खेती किसानी के नुकसान के आंकलन को सर्वे कार्य कर रिपोर्ट तैयार की गयी है। इस दौरान टीम के सदस्यों ने स्वयं खेतों में जाकर फसल को हुए नुकसान का स्थलीय सत्यापन किया है। सत्यापन के बाद तैयार रिपोर्ट डीएम के माध्यम से शासन को रिपोर्टर भेज दी गयी है।
सतीश पांडेय, जिला कृषि अधिकारी

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