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पैथालॉजी में 15 दिनों से प्रसव पूर्व जांचें ठप, गर्भवती परेशान

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 26 Sep 2022 11:36 PM IST
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बहराइच। सुरक्षित प्रसव की आस लिए मेडिकल कॉलेज की महिला इकाई में आने वाली गर्भवतियों को पैथालॉजी से जुड़ी अहम जांच सुविधा न मिल पाने से आए दिन कुछ इसी तरह की परेशानियां उठानी पड़ती हैं। प्रसव से पहले होने वाली जरूरी जांचों से जुड़ी किट व अन्य संसाधन अस्पताल की पैथालॉजी में न होने से पीड़िता को परिजनों की मदद से अस्पताल से दूर स्थित निजी निजी पैथालॉजी सेंटरों तक जाने की परेशानी से गुजरना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी तो ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले आर्थिक तौर से कमजोर वर्ग के परिवारों को होती है। उन्हें जांच के एवज में मोटी फीस भी निजी पैथालॉजी संचालकों को चुकानी पड़ती है। बीते 15 दिनों से प्रसव पूर्व होने वाली जांच किट समेत अन्य जरूरी संसाधनों की कमी के बाद भी इससे राहत दिलवाने को लेकर जिम्मेदार पूरी तरह उदासीन बने हैं।

शासन की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी को लेकर तमामत दावे किए जाते हैं। इसके बावजूदजिला मुख्यालय स्थित महाराजा सुहेलदेव स्वायत्तशासी महाविद्यालय से संबद्ध अस्पताल में मरीजों को इलाज सुविधा पाने के लिए परेशान होना पड़ता है। प्रबंधन की ढिलाई का अंदाजा इसी से दिखता है कि बीते 15 दिनों पूर्व प्रोक्योरमेंट प्रभारी डॉ. राहुल अग्रवाल के पद से त्यागपत्र देने के बाद से उनसे जुड़े काम काज को संभालने की कोई भी वैकल्पिक व्यवस्था अभी तक नहीं की गई है।

इससे पैथालॉजी में प्रसव पूर्व होने वाली महत्वपूर्ण जांचों की किट समेत अन्य जरूरी संसाधनों की खरीद का कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है। संसाधनों व जांच किट के अभाव में गर्भवती को प्रसव पूर्व जरूरी एचआईवी, एचबीएचएजी, एचसीवी जांच के लिए निजी पैथालॉजी सेंटरों तक की दौड़ लगाने और परिजनों को मोटी राशि खर्च करने की परेशानी भी उठानी पड़ती है। बीते 15 दिनों से खाली प्रोक्योरमेंट प्रभारी की कुर्सी के कारण पैथालॉजी में जांच किट के साथ ही कॉटन, पट्टी व वीगो सेट समेत अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीद का कार्य भी ठप पड़ा है। इसका सीधा असर मरीजों के इलाज पर पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन की लापरवाही के चलते ही मरीजों की जांच सुविधा के लिए जो संसाधन व मशीनें उपलब्ध हैं, उनका फायदा भी मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। मेडिकल कॉलेज में काफी संख्या में ऐसे मरीज आते हैं, जिनको बॉयोप्सी जांच जरूरी होती है। इसके लिए मेडिकल कॉलेज में एक मशीन भी बीते साल खरीदी गयी थी, इसके बावजूद भी इसका संचालन न हो पाने से मरीजों को इस जांच के लिए भी निजी पैथालॉजी तक की दौड़ लगाना पड़ रही है।
पैथालॉजी में जरूरी जांच किटों की व्यवस्था सुनिश्चित कराने का पूरा प्रयास चल रहा है। इसके तहत ही कुछ जांच किटें उपलब्ध भी कराई गई हैं। इससे इमरजेंसी सेवा से जुड़े मामलों की जांच होने लगी हैं। बॉयोप्सी मशीन में कुछ पार्ट्स अभी कम हैं। इसी लिए इसका उपयोग शुरू नहीं हो पाया है।
एके साहनी, प्राचार्य

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