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एक शादी ईको फ्रेंडली, सादगी की बनी मिसाल

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 21 Jun 2021 11:26 PM IST
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बांदा जिले के नरैनी क्षेत्र में पगड़ी की जगह खजूर का मुकुट लगाए दूल्हा। संवाद
बांदा जिले के नरैनी क्षेत्र में पगड़ी की जगह खजूर का मुकुट लगाए दूल्हा। संवाद - फोटो : BANDA
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बांदा। जेहन में शादी का ख्याल आते ही बरात, बैंडबाजा, आतिशबाजी आदि धूमधड़ाका नजर आने लगता है, लेकिन नरैनी क्षेत्र के गोरे पुरवा में हुई अनोखी शादी इन दिनों चर्चा में है। फिजूल खर्ची और धूमधाम से इतर ईको फ्रेंडली यानी पर्यावरण को किसी प्रकार से कोई नुकसान न पहुंचाने वाले रिवाज से शादी हुई। लग्जरी कार की जगह बैलगाड़ी में बरात आई और इसी पर दुल्हन की विदाई हुई।
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स्टेज से लेकर मंडप तक हरे पत्तों और फूलों से सजाया गया था। हरेक बराती को भेंट में पौधे दिए गए। गोरे पुरवा में माता-पिता की मृत्यु के बाद वंदना को नरैनी के रहने वाले टीचर व पर्यावरण प्रेमी यशवंत कुमार ने बेटी माना था। मध्य प्रदेश के गोपरा में उसकी शादी तय कर दी। 16 जून को गोपरा से बैलगाड़ी में गोरे पुरवा बरात आई। दूल्हा कमलेश सिर पर पगड़ी की जगह खजूर का मुकुट लगाए था। बैंडबाजा, डीजे और आतिशबाजी का शोरशराबा नहीं था। सिर्फ ढोलक की थाप पर महिलाएं मंगल गीत गुंजा रही थीं। कुल मिलाकर पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए वैवाहिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था।

विवाह स्थल को फूल-पत्तियों से सजाया गया था। बरातियों और घरातियों को हरे छ्यूल के पत्तों पर नाश्ता और भोजन तथा मिट्टी के कुल्हड़ में पानी व आम का पना परोसा गया। कंडा-लकड़ी में खाना बना। कार्बन उत्सर्जन करने वाले कोई भी साधन का प्रयोग नहीं हुआ। अगले दिन बृहस्पतिवार को विदाई से पूर्व दुल्हन वंदना और दूल्हा कमलेश ने नीम और आम के पौधे रोपे। साथ ही ससुराल में भी दो पौधे रोपने का उन्हें संकल्प दिलाया गया। हरेक बराती को भी पौधे भेंट किए गए। इसके बाद बैलगाड़ी में दुल्हन विदा हो गई। इस अनोखी शादी के लगभग 50 बराती व घराती गवाह बने।
14 शादियां करा चुके पर्यावरण प्रेमी यशवंत
बांदा। पर्यावरण प्रेमी यशवंत कुमार का कहना है कि पर्यावरण का ध्यान रखते हुए वह अब तक 14 गरीब बालिकाओं का शादी करा चुके हैं। ऐसी शादी के लिए वर-वधू पक्ष के लोगों का तैयार होना जरूरी होता है। सारे रीति-रिवाज प्रकृति का ख्याल रखकर पूरे किए जाते हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरणा दी जाती है। कहा कि एक तरफ शादियों में लोग लाखों रुपये लुटा देते हैं। धू्मधड़ाका से प्रकृति को भी नुकसान पहुंचता है, लेकिन गोरे पुरवा में हुई ईको फ्रेंडली शादी लोगों के लिए नसीहत से कम नहीं है। (संवाद)
हेलीकॉप्टर से विदाई की हसरत रह गई अधूरी
श्रीनगर (महोबा)। जिला प्रशासन द्वारा सिजवाहा गांव में विदाई के लिए हेलीकॉप्टर उतारने की अनुमति न देने से दूल्हा-दुल्हन की हसरत अधूरी रह गई। बाद में पिता को चार पहिया वाहन से बेटी की विदाई करना पड़ी। सिजवाहा निवासी मुन्ना राजपूत ने अपनी पुत्री सोनम की शादी झांसी जिले के जखो गांव निवासी महिपाल सिंह के पुत्र पंकज के साथ तय की थी। 20 जून को बरात आनी थी। सोमवार को दुल्हन की विदाई हेलीकॉप्टर से होनी थी। हेलीकॉप्टर बबीना के विधायक को लेकर आना था। शादी से पूर्व दुल्हन ने हेलीकॉप्टर से विदाई कराने की इच्छा जताई थी। जानकारी बबीना विधायक राजीव सिंह को होने पर उन्होंने झांसी जिला प्रशासन से इसकी अनुमति ले ली थी, लेकिन महोबा जिला प्रशासन ने हेलीकॉप्टर उतरने की अनुमति नहीं दी। जिसके चलते लड़की के पिता को अपनी पुत्री की विदा चार पहिया वाहन से करनी पड़ी। एसडीएम सदर मोहम्द अवेस ने बताया कि हेलीकॉप्टर उतारने की अनुमति मांगी गई थी। हाईटेंशन लाइन, पेड़ आदि प्रमुख कारण है। पीडब्ल्यूडी ने भी आपत्ति जताई थी। जिसके चलते अनुमति नहीं दी गई। लड़की के पिता ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा अनुमति न मिलने से हेलीकॉप्टर नहीं आ सका।
बांदा जिले के नरैनी क्षेत्र में बैलगाड़ी में विदा होती दुल्हन। संवाद
बांदा जिले के नरैनी क्षेत्र में बैलगाड़ी में विदा होती दुल्हन। संवाद- फोटो : BANDA

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