20 हजार अपात्रों में सिर्फ 288 से रिकवरी

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 25 Sep 2021 12:35 AM IST
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बाराबंकी। जिले में 26 हजार पात्र किसानों को भले ही अभी तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि पाने का इंतजार पूरा न हुआ हो। मगर, सम्मान निधि की कई किस्तों का लाभ ले चुके करीब 20 हजार अपात्र करोड़ों की रकम डकार गए। खुलासा होने पर सम्मान निधि तो रोक दी पर अपात्रों से सम्मान निधि की रकम विभाग वसूल नहीं कर पा रहा है। हालांकि अभी तक 288 अपात्रों ने अपनी स्वेच्छा से 20 लाख रुपये की राशि सरकारी खजाने में जमा की है।
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जिले में पांच लाख 45,322 किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के पोर्टल पर पंजीकृत है। इसमें से चार लाख 99 हजार 73 किसानों को सम्मान निधि का लाभ मिल चुका है। जिसमें एक किस्त से लेकर नौ किस्त तक का लाभ पाने वाले वाले किसान शामिल हैं।

मगर, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की पहली किस्त भेजने की तारीख 24 फरवरी 2019 से लेकर अब तक 26 हजार 75 पात्र किसानों को इसका लाभ नहीं मिल सका। कृषि विभाग के चक्कर लगाकर थके इन किसानों को सम्मान निधि पाने का इंतजार आज भी है। मगर, भूमिहीन, नौकरीपेशा, पेंशनर, मृतक, आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले 20 हजार 174 अपात्र योजना की शुरूआत से ही सम्मान निधि का कई किस्तों का लाभ वर्षों से ले रहे थे।
पड़ताल में खुलासा हुआ तो सम्मान निधि पर रोक लगाने के साथ भेजी गई राशि की रिकवरी के आदेश हुए। जिस पर विभाग ने 672 किसानों को सम्मान निधि की वसूली का नोटिस भेजा। जिसमें से सिर्फ 288 किसानों ने स्वेच्छा से उप कृषि निदेशक कार्यालय पहुंचकर 19.74 लाख रुपये की राशि सरकारी खजाने में जमा कर दी।
जबकि करीब 20 हजार अपात्र अभी सम्मान निधि की करोड़ों की राशि डकारे बैठे हैं। मगर, अपात्रों की सूची न होने से वसूली तो दूर कृषि विभाग नोटिस भेजकर राजस्व की भांति वसूली तक नहीं करा पा रहा है।
वहीं पात्र किसान सम्मान निधि के लिए तहसील समाधान दिवस, मुख्यमंत्री व डीएम को शिकायती पत्र देने के साथ कृषि विभाग के चक्कर काट रहे हैं। मगर, पात्रता पूरी करने के बाद भी उन्हें सम्मान निधि की एक भी किस्त अभी तक नसीब नहीं हो सकी हैं।
उप कृषि निदेशक अनिल कुमार सागर ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ लेने वाले सभी अपात्रों से रिकवरी की जाएगी। अभी तक लाखों की राशि जमा कराई जा चुकी है। वहीं नोटिस भी भेजा जा रहा है। मगर, अपात्रों की सूची न होने से उनको खोजने की समस्या सामने आने से कुछ विलंब जरूर हो रहा है।

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