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कोरोना का खौफ: संक्रमण से बचेंगे या नहीं...एंटीबॉडी जांच करा रहे लोग

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 28 Jul 2021 01:10 AM IST
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टीकाकरण - फोटो : demo photo
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निजी पैथोलॉजी लैबों में जांच कराने के लिए सैंपल की बढ़ी तादाद
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संक्रमित रहे लोगों में कम, वैक्सीन लगवाने वालों में मिली हाईस्कोर एंटीबॉडी

बरेली। कोरोना महामारी की तीसरी लहर की आशंका अब लोगों में डर पैदा कर रही है। संक्रमण की चपेट से आने से बचेंगे या नहीं, इसका पता लगाने के लिए बड़ी संख्या में लोग एंटीबॉडी की जांच कराने को बेताब हैं। स्वास्थ्य विभाग के जांच से मना करने पर लोग निजी पैथोलॉजी में पहुंचकर एंटीबॉडी की जांच के लिए सैंपल दे रहे हैं। इसके नतीजे भी चौंकाने वाले मिलने की बात चिकित्सक कह रहे हैं। उनका कहना है कि संक्रमिमत रहे लोगों में कम जबकि वैक्सीन लगवाने वालों में हाईस्कोर एंटीबॉडी मिल रही है।
तीसरी लहर में बच्चों के सर्वाधिक प्रभावित होने की आशंका दुनिया भर के विशेषज्ञ जता रहे हैं। माना जा रहा है कि वायरस परिजन से घर में पहुंचेगा और बच्चों पर कहर बरपाएगा। हालांकि, सही स्थिति तीसरी लहर आने पर ही पता चलेगी। यह असमंजस ही एंटीबॉडी की जांच कराने की वजह बन रहा है। कोरोना वैक्सीन लगवा चुके लोग भी इसमें पीछे नहीं हैं। निजी पैथोलॉजी में एंटीबॉडी की जांच कराने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। पैथोलॉजिस्ट और माइक्रोबायोलॉजिस्ट के मुताबिक, ज्यादातर उच्च वर्ग के लोग जांच कराने पहुंच रहे हैं।

हालांकि, अभी तक कितने लोगों ने जांच कराई, इसकी कोई संयुक्त रिपोर्ट नहीं बनी है। मगर 80 फीसदी से ज्यादा लोगों में एंटीबॉडी मिल रही है। बताया कि जिन मरीजों में खांसी और बुखार के लक्षण मिल रहे हैं, उनमें भी कोरोना के खिलाफ अच्छी एंटीबॉडी पाई जा रही है। निजी पैथोलॉजी में करीब 12 से 15 सौ रुपये में कोरोना एंटीबॉडी की जांच हो रही है। स्वास्थ्य विभाग इसकी जांच नहीं कर रहा है।

युवा वर्ग जांच कराने में आगे

माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट डॉ. राहुल गोयल के मुताबिक, एंटीबॉडी की जांच कराने में युवाओं की तादाद सर्वाधिक है, क्योंकि युवा नौकरी, पढ़ाई समेत अन्य कार्यों के लिए घर से ज्यादा देर तक बाहर रहकर दूसरों के संपर्क में रहते हैं। इसलिए उन्हें संक्रमण होने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। यही वजह है कि वैक्सीन लगवाने के लिए भी शत प्रतिशत युवा केंद्रों पर पहुुंच रहे हैं। साथ हीएंटीबॉडी की जांच भी करा रहे हैं।

जो वैक्सीन लगवा चुके वे सर्वाधिक सुरक्षित

एंटीबॉडी जांच में पता चला है कि जो संक्रमित रहे हैं और नियमानुसार उन्होंने वैक्सीन भी लगवाई है, उनमें एंटीबॉडी का स्कोर करीब तीन से पांच सौ और कुछ में सात सौ तक मिला है। जो संक्रमित हुए, अब स्वस्थ हैं पर वैक्सीन नहीं लगवाई उनमें एंटीबॉडी सामान्य 3.5 टाइटर यानी करीब 75 से सौ तक के स्कोर पर है। विशेषज्ञ तीन सौ से ज्यादा स्कोर मिलने पर करीब आठ माह तक बचाव की उम्मीद जता रहे हैं।

व्यक्ति में दो प्रकार की बनती है एंटीबॉडी

डॉ. गोयल के मुताबिक शरीर की इम्युनिटी बैक्टीरिया और वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बनाती है। एंटीबॉडी विशेष तरह का प्रोटीन होता है, जोे शरीर का बचाव करता है। एक एंटीबॉडी आईजीएम (इम्युनोग्लोबिन एम) टाइप और दूसरी आईजीजी (इम्युनोग्लोबिन जी) होती है। बैक्टीरिया या वायरस के हमले के चार से पांच दिन में शरीर आईजीएम का निर्माण करता है। करीब 14 दिन बाद आईजीजी का निर्माण होता है।

14-15 दिन बाद जांच से मिलते हैं परिणाम

कोरोना से ठीक होने के कुछ समय बाद ही शरीर में एंटीबॉडी बनती है। इसलिए अगर जांच जल्दी कराई जाएगी तो इससे परिणाम सही नहीं मिलते हैं। आमतौर पर कोरोना से उबरने के 14 से 15 दिन के बाद ही शरीर में इम्युनोग्लोबिन आईजीएम का निर्माण होता है, जो परीक्षण के दौरान पता चल सकता है। जल्दबाजी में अगर कोई टेस्ट करा रहा है तो 80 फीसदी संभावना निगेटिव रिपोर्ट मिलने की रहती है।

कई लोग एंटीबॉडी जांच कराने के लिए संपर्क कर रहे हैं, लेकिन इस संबंध में हमारे पास शासन का कोई दिशानिर्देश नहीं है। सीरो सर्विलांस में किसका ब्लड सैंपल लेना है, यह सूची शासन से जारी होती है। - डॉ. मीसम अब्बास, इंचार्ज, इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (आईडीएसपी)

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