राजस्व और न्यायालयों के कामकाज की भाषा में बदलाव की आवश्यकता

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 14 Sep 2021 01:39 AM IST
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हिंदी हैं हम - फोटो : अमर उजाला
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आज भी उर्दू बनी हुई है न्यायालयों और राजस्व विभाग के कामकाज की भाषा
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अमर उजाला संवाद में अधिवक्ताओं ने कहा- मातृभाषा में ही हो सभी सरकारी विभागों में कार्य

बरेली। हिंदी हैं हम अभियान के तहत सोमवार को अमर उजाला कार्यालय में अधिवक्ताओं ने न्यायालयों और राजस्व विभाग में हिंदी में कामकाज न होने पर संवाद किया। कहा, न्यायालयों और राजस्व संबंधी दस्तावेज की भाषा आज भी उर्दू बनी हुई है। हिंदी को भले ही राज्यभाषा स्वीकार कर लिया गया है लेकिन न्यायालयों में कामकाज की भाषा आज भी उर्दू और अंग्रेजी ही है। जमीन संबंधी दस्तावेज में प्रयोग होने वाले कागजात, दस्तावेज, समन और नोटिस आदि का प्रारूप उर्दू में ही तैयार होता है। न्यायालयों के आदेश भी अंग्रेजी में ही होते हैं। अधिवक्ताओं ने कई ऐसे शब्दों को बताया भी, उनका कहना है कि यहां भी हिंदी पर जोर होना चाहिए।
जमीन संबंधी दस्तावेज में प्रयोग होने वाले कागजात, दस्तावेज, समन और नोटिस आदि का प्रारूप उर्दू में ही चल रहा है। इसमें लिखे शब्द सामान्य आदमी की समझ से तो बाहर ही होते हैं। कई नए अधिवक्ताओं को भी इन शब्दों के अर्थ नहीं पता होते हैं। अधिवक्ताआें का कहना है कि संविधान के तीनों स्तंभ विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच हिंदी दिवस पर बड़े-बड़े कार्यक्रम करके बड़ी-बड़ी बातें तो की जाती हैं, लेकिन दस्तावेज तैयार करने की मुगलों के जमाने की व्यवस्था में बदलाव के लिए कोई पहल नहीं होती है। न्यायालय या मजिस्ट्रेट की अदालत के समन, जमीन जायदाद की बिक्री, दान या स्थानांतरण से संबंधित दस्तावेजों में उर्दू शब्दों का ही प्रयोग होता है।

न्यायालयों में सभी काम हिंदी में ही होने चाहिए। अधिवक्ताओं को हिंदी के साथ अंग्रेजी का भी ज्ञान होता है, लेकिन सामान्य आदमी को अंग्रेजी का अच्छा नहीं होता है। न्यायालय के फैसले हिंदी में हाेंगे तो सभी पक्षकार उसे खुद पढ़कर समझ सकेंगे। - यशेंद्र सिंह, अधिवक्ता
न्यायालयों में प्रयोग होने वाले कागजात या फिर भू संबंधी दस्तावेज में अंग्रेजी और उर्दू का ही इस्तेमाल होता है। उर्दू के कई कठिन शब्दों के अर्थ समझने में अधिवक्ताओं को भी दिक्कतें होती हैं। इसमें बदलाव की आवश्यकता है। - धारा सिंह, अधिवक्ता
दीवानी मुकदमों से संबंधित अधिकतर दस्तावेज के अदालती प्रारूप में उर्दू भाषा का ही प्रयोग होता है। उर्दू की जानकारी अगर नहीं है तो कई शब्दों को समझने में दिक्कत होती है। हिंदी को बढ़ावा मिलना चाहिए और मातृभाषा में ही काम होना चाहिए। - आलोक प्रधान, अधिवक्ता
उर्दू के कठिन शब्दों को समझने में नए अधिवक्ताआें को परेशानी होती है। यह अलग बात है कि काम करते-करते वह शब्दों को सीख जाते हैं। जब हमारी बोलचाल की भाषा हिंदी है तो सभी कामकाज हिंदी भाषा में ही होने चाहिए। हिंदी को बढ़ावा दिए जाने की जरूरत है। - अंगन सिंह उर्फ अंगद, अधिवक्ता
अदालती दस्तावेजों में शामिल होने वाले शब्द और उनका हिंदी में अर्थ
रकबा- क्षेत्रफल
सकू नत- निवास
हलफनामा- शपथपत्र
बैनामा- विक्रय पत्र
इकरारनामा- सहमति अनुबंध
तरमीम- बदल देना या सुधार देना
बनाम- के नाम
वल्दियत - पिता का नाम
जोजे- पत्नी
बयशुदा- खरीदी
काबिज- कब्जा
दीगर- अन्य
वारिसान- उत्तराधिकारी
फौत- मौत
रहन- गिरवी
बख्शीश- उपहार या दान
साकिन- निवासी
बैय- जमीन बेचना
हदूद- सीमाएं
मिनजानिब- की ओर से
बदस्तूर- हमेशा की तरह
हाल- वर्तमान
खुर्द- छोटा
कलां- बड़ा
शजरा परचा- कपड़े पर बना खेतों का मानचित्र
शजरा किस्तवार- ट्रेसिंग पेपर पर बना हुआ खेतों का मानचित्र
शजरा नसब- भूमिदारों की वंशावली
मिनजुमला- मिला-जुला भाग
बेवा- विधवा
वल्द- पिता
दुख्तर- सुपुत्री
कौमियत- जाति
मुतवल्ली- मुस्लिम धार्मिक संपत्ति का कर्ता
काश्तकार - भूमि जोतने वाला, किसान
शामिलात- साझी भूमि
मुंद्रजा- पूर्वलिखित या उपरोक्त
मजकूर- चालू
राहिन- गिरवी देने वाला
मुर्तहिन- गिरवी लेने वाला
बाया- भूमि बेचने वाला
मुस्तरी- भूमि खरीदने वाला
वाहिब- उपहार देने वाला
मौहबइला- उपहार लेने वाला

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