हिंदी दिवस पर विविध आयोजन

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 15 Sep 2019 12:00 AM IST
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ज्ञानपुर। हिंदी दिवस पर शनिवार को जिलेभर में विविध आयोजन हुए। जगह-जगह गोष्ठियों और कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दौरान हिंदी का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करने पर जोर दिया गया। स्कूल कॉलेजों में बच्चों को हिंदी की उपयोगिता समझाई गई। वक्ताओं ने कहा कि तकनीक में भी हिंदी का उपयोग होना चाहिए।
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खमरिया: शहीद नरेश इंटरमीडिएट कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने हिंदी दिवस के अवसर पर प्रार्थना सभा में हिंदी भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया। छात्रा सेहर नूरी ने अपने संभाषण में कहा कि भाषा व्यक्ति को बनाती है, व्यक्ति परिवार को बनाता है, परिवार समाज को बनाता है, समाज गांव को, गांव शहर को, शहर से महानगर और महानगर से देश बनता है। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य अवधेश कुमार मिश्र ने संभाषण के प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया।

जंगीगंज: बिट्ठलपुर छतमी स्थित ओम पब्लिक स्कूल में हिंदी दिवस पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया, जिसमें बच्चों को हिंदी का उपयोग, महत्व और स्थिति विषय पर उत्कृष्ट लेखों का चयन कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के विषय में बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए प्रिंसिपल एसडी त्रिपाठी ने कहा कि प्रतिस्पर्धा के इस युग में बच्चे अन्य विषयों में पकड़ बेहतर कर लेते हैं, जबकि हिंदी हमारी राजभाषा है, इसको सर्वाधिक सम्मान मिलना चाहिए। बोल-चाल में हिंदी का उपयोग करने के बावजूद हिंदी लेखन और व्याकरण में कमी पाई जाती है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि हमने हिंदी राष्ट्र भाषा होने के बाद भी हिंदी को अपेक्षित महत्व नहीं दिया। इस मौके पर आरके मिश्र, सुरेश सिंह, सौम्या, अनुष्का, आर्या, दीपक, प्रियांशु आदि रहे।
ऊंज: दुर्गा देवी बालिका इंटर कॉलेज अकोढ़ा, रोही, भदोही में हिंदी दिवस पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए विद्यालय के प्रबंधक राजेश कुमार दूबे ने कहा कि हिंदी हमारे देश की भावनात्मक एकता का प्रतीक है। हिंदी को देश के मनीषियों ने सजाया और संवारा है। हिंदी हमारी राजभाषा के साथ हमारे देश की राष्ट्रीयता की पहचान है। अपने दैनिक कार्यों में हम जितना अधिक प्रयोग हिंदी का करेंगे, उतना ही हम भारतीय जनमानस के करीब होंगे। इस अवसर पर प्रधानाचार्य ज्योति तिवारी, अनामिका दूबे, रुचि श्रीवास्तव सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।
घोसिया: केशव प्रसाद राल्ही पीजी कॉलेज औराई में हिंदी दिवस समारोह का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि पांडुलिपि विशेषज्ञ और तुलसी साहित्य के मर्मज्ञ उदय शंकर दूबे एवं विशिष्ट अतिथि डॉ. राम शिरोमणि होरिल ने सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। प्राचार्य डॉ. आलोक त्रिपाठी ने अतिथियों का स्वागत किया। मुख्य अतिथि ने कहा कि हिंदी भाषा जन-जन की भाषा, संपर्क भाषा, बोलचाल की भाषा, जीवन की सशक्त भाषा के रूप में बहुप्रचलित है। आवश्यकता है कि हिंदी भाषा की अस्मिता, गौरव, रचना धर्मिता को सबल किया जाए। विशिष्ट अतिथि डॉ. होरिल ने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में हिंदी भाषा तड़प रही है। हिंदी पढ़ने वालों की कमी होती जा रही है। जरूरत है हिंदी के सम्मान, स्वाभिमान को कायम रखते हुए सुदृढ़ करने की। हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्थान मिलना चाहिए। प्राचार्य डॉ. आलोक त्रिपाठी ने कहा कि हिंदी अ...अनपढ़ से ज्ञ...ज्ञानी बनाकर उच्च शिखर तक ले जाती है। हिंदी सम्मान की भाषा है। इस अवसर महाविद्यालय की छात्र -छात्राओं ने बढ़-चढ़ कर प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में डॉ. कुलदीप पांडेय, डॉ. राजन, डॉ. बाल विद्या प्रकाश, डॉ. उमेश चंद मौजूद थे। आभार प्रदर्शन और संचालन सुभाष केसरी ने किया।
...घाटी में पत्थर बरसाने वाले निंदनीय हैं
हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में सरपतहां में काव्य संध्या
अमर उजाला ब्यूरो
ज्ञानपुर। साहित्यिक संस्था हिंदी साहित्य परिषद के बैनर तले सरपतहां में हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी पद से सेवानिवृत्त डॉ. बाबुलनाथ शुक्ल ने की। कार्यक्रम में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी चंद्रिका प्रसाद त्रिपाठी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. राजकुमार पाठक की सरस्वती वंदना वीणापाणि शारदे, वर दे... से हुआ। कार्यक्रम आधी रात तक चला। रिमझिम फुहारों के बीच जब विद्यापति शुक्ला कोकिल ने गीत की पंक्तियां पढ़ीं-सावन की अब तो फुहार आ गई है, बागों में फिर से बहार आ गई है...तो श्रोता भावविभोर हो गए। नवोदित कवि उत्कर्ष पाठक ने निराशा पूर्ण जीवन से गुजर रहे युवकों को प्रेरित करते हुए अपना गीत सुनाया तो तालियों की गड़गड़ाहट से पंडाल गूंज उठा। वरिष्ठ गीतकार डॉ. सुरेश पांडेय मंजुल ने पढ़ा-मातृभूमि का मान बढ़ाने वाले मेरे वंदनीय हैं, घाटी में पत्थर बरसाने वाले निंदनीय हैं...भारत का मणि मुकुट बना दुनिया को दो टूक बताकर, काश्मीर का दाग मिटाने वाले मेरे वंदनीय हैं...। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित कवि डॉ. राजकुमार पाठक ने अपनी हास्य व्यंग रचनाओं से श्रोताओं को गुदगुदाया। उनकी रचना-हरामखोर अध्यापकों ने पढ़ाया नहीं और गणित का मास्टर तो कभी क्लास में आया नहीं... सराही गई। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. बाबुलनाथ शुक्ल ने हिंदी को वैश्विक स्तर पर व्यापक सम्मान प्राप्त भाषा बताया। उन्होंने कहा कि ट्रिनीडाड, मारीशस और गुयाना में हिंदी की बोली भोजपुरी बोली जाती है। उन्होंने कहा कि भाषा का विवाद भीशीघ्र दूर होना चाहिए। इस मौके पर प्रेमशंकर बघेल, राकेश शुक्ला, शिवनाथ शुक्ल, एस नाथ, पवन शुक्ला, कुशल शुक्ला, राम उजागर शुक्ला आदि उपस्थित रहे।
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हर हिंदुस्तानी के हृदय की भाषा है हिंदी: राही
ज्ञानपुर। जिले के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. कृष्णावतार त्रिपाठी राही ने कहा कि हिंदी प्रत्येक हिंदुस्तान के हृदय की भाषा है। वह शनिवार को अपने कार्यालय में आयोजित बैठक में बोल रहे थे। कहा कि इसे देश का हर नागरिक बोलता और समझता है। इसी बोलने और समझने के आधार पर केवल भारत ही नहीं, भारत के बाहर भी अपनी बात बेहिचक रख पाता है। यही वजह है कि इस देश के एक प्रांत का नागरिक या स्थानीय भाषा का ज्ञान रखने वाला भी हिंदी प्रांत से दूसरे प्रांत में जाकर अथवा दूसरे प्रांत से हिंदी भाषी प्रांत में जाकर अपना व्यापार या शासकीय-गैरशासकीय सेवा का निर्वहन भली प्रकार से कर लेता है। हिंदी देश की जन भाषा और मन की भाषा है। कहा कि खेद है कि हिंदी को अपने ही देश में आज तक राष्ट्र भाषा का दर्जा नहीं मिल पाया। हम 72 वर्षों से लकीर के फकीर बने हुए हैं।

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