यू आर मिस्टर तंजील... यस... धांय धांय

ब्यूरो/अमर उजाला Updated Wed, 06 Apr 2016 12:29 AM IST
सहसपुर में कारतूस के खाली खोखे को देखते एडीजी (कानून-व्यवस्था) दलजीत सिंह
सहसपुर में कारतूस के खाली खोखे को देखते एडीजी (कानून-व्यवस्था) दलजीत सिंह - फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में एनआईए के डिप्टी एसपी तंजील अहमद के हत्यारों ने पूरी तहकीकात करने के बाद ही गोलियां बरसाईं। शूटरों ने डीएसपी की वैगनआर के आगे बाइक अड़ा दी। शूटरों ने कार चलाने वाले से पूछा कि यू आर मिस्टर तंजील। डीएसपी के यस कहते ही शूटर ने पिस्टल से उन पर ताबड़तोड़ गोलियां दाग दी। मोहम्मद तंजील के मुंह से बस एक शब्द निकला हेड डाउन और पीछे बैठे उनके दोनों बच्चे सीट के नीचे छिप गए। 
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मंगलवार को मोहम्मद तंजील के चचेरे भाई मोहम्मद हबीब दिल्ली से गांव सहसपुर आए। उन्होंने बताया कि मोहम्मद तंजील के दोनों बच्चों बेटे शाहबाज और बेटी जिमनिश ने अपने पिता के मर्डर का वाक्या उन्हें विस्तार से बताया। दोनों बच्चों ने उन्हें बताया कि शादी समारोह से चलते ही स्योहारा में लगे गेट से जब उनकी वैगनआर गुजरी, तो सहसपुर की ओर से एक बाइक पर सवार दो लोग आए। दोनों ने बाइक मोड़कर उनकी वैगनआर कार के पीछे लगा दी। घटनास्थल के पास बाइक वैगनआर के आगे खड़ी कर दी। कार तंजील वैगनआर चला रहे थे। उनके पास पहुंचकर एक शूटर ने बस इतना मालूम किया यू आर मिस्टर तंजील। दोनों बच्चों ने परिजनों को बताया कि  शूटर ने पिस्टल से पहले दो मैगजीन मोहम्मद तंजील और फरजाना पर चलाई। दूसरी मैगजीन के बाद पिस्टल नहीं चलने पर साथी शूटर से दूसरा पिस्टल लिया। इससे मोहम्मद तंजील पर सारी गोलियां नजदीक से मारी। सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने के बाद  शूटर फरार हो गए।

कहीं रंजिश में तो नहीं गई तंजील की जान 
नोएडा। एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद की हत्या कहीं रंजिश में तो नहीं हुई है। तंजील अहमद को ट्रेनिंग देने वाले एनआईए के पूर्व स्पेशल डीजी नवनीत रंजन वासन ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि जिस ढंग से पूरी घटना को अंजाम दिया गया है उससे साफ जाहिर है कि किसी खास शूटर ने वारदात को अंजाम दिया है। इसके पीछे किसी आतंकवादी संगठन का हाथ कम और रंजिश ज्यादा लगती है। वहीं एटीएस व एसटीएफ के सूत्रों का कहना है कि अब तक की जांच में ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है जिससे घटना के पीछे आतंकवादियों का हाथ माना जाए, हालांकि हर पहलू से पड़ताल की जा रही है। वासन का कहना है कि उनके कार्यकाल में तंजील अहमद ने एनआईए ज्वाइन किया था।
 वह तेज तर्रार ऑफिसर थे। उन्हें जो जिम्मेदारियां दी गई थीं उसे वह बहुत ही शांत ढंग से निपटा लेते थे। वासन 1980 बैच के आंध्र प्रदेश काडर के आईपीएस ऑफिसर रहे हैं। वह कई वर्षों तक एनआईए में रहें। स्पेशल डीजी के पद से मई 2015 में उन्हें प्रोमोट कर डीजी पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ब्यूरो बना दिया गया था। केस को सुलझाने के लिए यूपी एटीएस व एसटीएफ को भी लगाया गया है। दोनों एजेंसियों के सूत्र बताते हैं कि अब तक की जांच में दो संदिग्धों पर शक है, जो कि शादी समारोह में आए हुए थे। केस से जुड़े अधिकारियों की मानें तो अगर किसी आतंकवादी संगठन ने घटना को अंजाम दिया होता तो वह हमले की जिम्मेदारी लेता और अपना पैगाम भारत सरकार व लोगों तक पहुंचा देता। मगर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।

शक की सुई  जाली नोटों के सौदागरों पर भी 
बिजनौर। एनआईए के डीएसपी मोहम्मद तंजील के मर्डर का राज स्योहारा से मुरादाबाद तक छिपा हो सकता है। मर्डर में शक की सुई नकली नोटों के सौदागरों की ओर घूम रही है। सिमी के स्लीपिंग माडयूल का भी यह इलाका माना जाता हैं। स्योहारा से नौगावा सादात, अमरोहा  , मुरादाबाद, संभल तक का इलाका नकली नोटों के कारोबारियों का गढ़ रहा है। कई बार यहां के लोग नकली नोटों के साथ दबोचे गए हैं। इसके अलावा सिमी आतंकियों की गतिविधियों भी इन इलाकों में उजागर होती रही है। बिजनौर से फरार आतंकी भी इन रास्तों से ही भागे  थे। संभल में उनके छिपने की  बात सामने आई थी। 
फरार आतंकियों के कमरे से मुरादाबाद आने जाने के बस के कई टिकट भी मिले थे। जांच टीम इस थीम पर भी काम कर रही है कि मोहम्मद तंजील का नकली नोटों के कारोबारियों या सिमी के स्लीपिंग मॉडयूल से कोई  कभी जाने अनजाने में  पंगा हो गया हो। नकली नोटों के सौदागरों ने ही वारदात को अंजाम दिया हो। 

नाकामी उजागर होेने पर भी स्योहारा पुलिस पर कृपा 
बिजनौर (ब्यूरो)। हाई प्रोफाइल तंजील मर्डर में स्योहारा थाने और सहसपुर पुलिस की नाकामी किसी से छिपी नहीं हुई है। इसके बावजूद अफसरों की पुलिस महकमे पर कृपा बनी हुई है। घटना के तीन दिन बाद भी किसी पुलिस वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने से सवाल उठना लाजिमी है। 
एनआईए के डिप्टी एसपी मोहम्मद तंजील अहमद के मर्डर की सूचना के करीब एक घंटे बाद स्योहारा एसओ राजकुमार शर्मा मौके पर पहुंचे थे। सहसपुर रोड पर भी पहले से सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। इतना ही नहीं सहसपुर पुलिस चौकी से महज 50 मीटर की दूरी पर डीएसपी मोहम्मद तंजीम पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई गईं। इन गोलियों की आवाज चौकी पर  तैनात पुलिस वालों के कानों तक नहीं पहुंची ऐसा हो नही सकता। पुलिस चौकी से भी पुलिसकर्मी घटना के काफी देर बाद आए। पुलिस समय से मौके पर पहुंचकर अगर शूटरों की तलाश करती,  तो शायद शूटर इलाके में घिर भी सकते थे। पुलिस ने हाईप्रोफाइल मर्डर में कोई रुचि नहीं ली। इतना ही नहीं स्योहारा पुलिस ने मौके से पिस्टल से चले खोखे भी ढूंढना अपना कर्तव्य नहीं समझा।  यही वजह है कि घटना के दूसरे दिन ही मौके से कारतूस के केवल चार  खोखे ही बरामद हुए हैं। बाकी खोखे कहां गए यह किसी को नहीं पता। मंगलवार को एडीजी (कानून व्यवस्था) के आने पर जरूर मौके से एक ओर खोखा मिला है। पुलिस की यह बड़ी नाकामी सामने आई है। लोकल पुलिस पर मर्डर में लापरवाही को लेकर तमाम तरह के सवाल उठ रहे हैं। इसके बाद भी अफसरों ने किसी पुलिस वाले के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि अफसरों की पुलिस महकमे पर कृपा बनी होने के कारण क्या है। यह भी जांच का एक विषय है।

नाकामी उजागर होेने पर भी स्योहारा पुलिस पर कृपा 
बिजनौर (ब्यूरो)। हाई प्रोफाइल तंजील मर्डर में स्योहारा थाने और सहसपुर पुलिस की नाकामी किसी से छिपी नहीं हुई है। इसके बावजूद अफसरों की पुलिस महकमे पर कृपा बनी हुई है। घटना के तीन दिन बाद भी किसी पुलिस वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने से सवाल उठना लाजिमी है। 
एनआईए के डिप्टी एसपी मोहम्मद तंजील अहमद के मर्डर की सूचना के करीब एक घंटे बाद स्योहारा एसओ राजकुमार शर्मा मौके पर पहुंचे थे। सहसपुर रोड पर भी पहले से सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। इतना ही नहीं सहसपुर पुलिस चौकी से महज 50 मीटर की दूरी पर डीएसपी मोहम्मद तंजीम पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई गईं। इन गोलियों की आवाज चौकी पर  तैनात पुलिस वालों के कानों तक नहीं पहुंची ऐसा हो नही सकता। पुलिस चौकी से भी पुलिसकर्मी घटना के काफी देर बाद आए। पुलिस समय से मौके पर पहुंचकर अगर शूटरों की तलाश करती,  तो शायद शूटर इलाके में घिर भी सकते थे। पुलिस ने हाईप्रोफाइल मर्डर में कोई रुचि नहीं ली। इतना ही नहीं स्योहारा पुलिस ने मौके से पिस्टल से चले खोखे भी ढूंढना अपना कर्तव्य नहीं समझा।  यही वजह है कि घटना के दूसरे दिन ही मौके से कारतूस के केवल चार  खोखे ही बरामद हुए हैं। बाकी खोखे कहां गए यह किसी को नहीं पता। मंगलवार को एडीजी (कानून व्यवस्था) के आने पर जरूर मौके से एक ओर खोखा मिला है। पुलिस की यह बड़ी नाकामी सामने आई है। लोकल पुलिस पर मर्डर में लापरवाही को लेकर तमाम तरह के सवाल उठ रहे हैं। इसके बाद भी अफसरों ने किसी पुलिस वाले के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि अफसरों की पुलिस महकमे पर कृपा बनी होने के कारण क्या है। यह भी जांच का एक विषय है।

जैसे पुलिस को बताकर गुनाह कर दिया
स्योहारा। एनआईए अफसर की हत्या के मामले की पुलिस को 100 नंबर पर सबसे पहले सूचना देने वाला व्यक्ति आलम पुलिस के रवैये से सहमा हुआ है। मोबाइल पर कॉल करके पुलिस उसे प्रताड़ित कर रही है। आलम के मुताबिक पुलिस उसके साथ ऐसा बर्ताव कर रही है, जैसे उसने मदद करके कोई गुनाह कर लिया हो।
मूल रूप से बिहार निवासी आलम सहसपुर की मीट फैक्ट्री में काम करता है। सहसपुर में ही किराए पर वह रहता है। दो अप्रैल को वह फैक्ट्री के काम से मेरठ गया हुआ था। आलम के मुताबिक उसे मेरठ से लौटने में काफी देर हो गई। वह छोटे हाथी से आ रहा था। जैसे ही वह सहसपुर में गिराधारी लाल रोड पर गेट नंबर दो से सहसपुर की सीमा के अंदर घुसा, तो तालाब के पास पुलिया पर दो गाड़ी खडी हुई थी, जिसमें एक लड़की रो रही थी। बच्ची मदद की गुहार लगा रही थी। आलम के मुताबिक वह नीचे उतरकर देखा तो एक व्यक्ति और एक महिला खून में लथपथ गाड़ी के अंदर पड़े हुए थे। मदद की गुहार लगा रहे बच्चों ने उससे मदद करने के लिए कहा। इस दौरान यहां पर एक व्यक्ति और एक युवक भी दूसरी गाड़ी के पास खड़ा था। ऐसा लग रहा था कि वे उनके संबंधी है। वहां खड़ा वह व्यक्ति और युवक घायल महिला को वैगनआर से निकालकर दूसरी गाड़ी में शिफ्ट कर रहे थे। आलम ने बताया वह भी उनके पास मदद के लिए रुक गया और अपने मोबाइल से 100 नंबर पर घटना की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने उससे घटनास्थल का पता पूछा और फोन काट दिया। उसके कुछ मिनट बाद ही दोबारा लौटकर उसे फोन आया।  आलम से पूछा गया कि गाड़ी का नंबर क्या है और वे कहां पर खड़े है। आलम के मुताबिक उसने जब पुलिस को गाड़ी का नंबर बताया, तो पुलिस ने कहा कि इंग्लिश मत बोल और सहसपुर चौराहे पर पहुंच और आकर उन्हें जानकारी दे। आलम ने बताया कि वह इसके बाद डर गया और उसने अपना मोबाइल बंद कर लिया। मानवता के नाते उसने घायल व्यक्ति को चालक सीट से हटाकर उसके बराबर की सीट पर शिफ्ट कराया और घायलों के साथ गाड़ी में बैठकर उन्हें नजदीक के चिकित्सक के पास ले गया। इसके बाद क्या हुआ आलम को नहीं मालूम।  
अब पुलिस उसके मोबाइल नंबर पर फोन कर रही है। आलम के मुताबिक पुलिस उसके साथ  ऐसा बर्ताव कर रही है, जैसे उसने मदद करके कोई गुनाह कर लिया हो। उसने पुलिस के रवैये पर नाराजगी जताई है। 

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