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आशा कार्यकर्ताओं को ठीकठाक मिलती है प्रोत्साहन राशि, फिर भी लालच में पहुंच गईं नर्सिंग होम

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 30 Dec 2020 12:30 AM IST
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बदायूं। आशा कार्यकर्ताओं को ठीकठाक प्रोत्साहन राशि मिलती है, जिससे उनका गुजारा आराम से हो जाए। उन्हें अपने आसपास गर्भवती महिलाओं की देखभाल, डिलीवरी, जन्म की सूचना देना, मृत्यु की सूचना देना आदि समेत कई तरह से आमदनी होती है। ईमानदारी से आशा कार्यकर्ता कार्य करें तो यह राशि उनका घर चलाने के लिए काफी है। इसके बावजूद आशा कार्यकर्ता लालच में फंसकर आयशा नर्सिंग होम पहुंच गईं। अब उनकी संविदा समाप्त होने वाली है।
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आशा कार्यकर्ताओं को कई तरह से पैसा मिलता है। ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवस में लाभार्थियों को प्रेरित करने और दिवस में उपस्थित रहने के ही दो सौ रुपये मिलते हैं। इसके अलावा ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता और पोषण समिति की बैठक में मौजूद रहने पर डेढ़ सौ रुपये, सीएचसी एवं पीएचसी पर मासिक बैठक में पहुंचने के लिए डेढ़ सौ रुपये, ग्राम सर्वे को तीन सौ रुपये, ग्राम स्वास्थ्य सूचकांक रजिस्टर बनाने, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण में सहायता करने के तीन सौ रुपये, टीकाकरण करने के लिए बच्चों की ड्यू लिस्ट बनाने के तीन सौ रुपये, लाभार्थियों की सूची बनाने के तीन सौ रुपये, योग्य दंपतियों की सूची बनाने के तीन सौ रुपये, प्रसव पूर्व देखभाल के तीन सौ, संस्थागत प्रसव कराने के तीन सौ, मातृ मृत्यु की सूचना देने के दो सौ, महिला नसबंदी के तीन सौ और पुरुष नसबंदी के चार सौ रुपये मिलते हैं। अंतराल एवं गर्भपात के उपरांत नसबंदी कराने पर तीन सौ, प्रसव के उपरांत नसबंदी कराने पर चार सौ रुपये प्राप्त होते हैं।

इसके अलावा त्रैमासिक गर्भनिरोधक इंजेक्शन लगवाने पर प्रति महिला सौ रुपये, दो बच्चों के बाद स्थायी गर्भनिरोधक साधन हेतु प्रेरित करने पर एक हजार रुपये मिलते हैं। शादी के दो साल बाद पहला बच्चा का अंतराल रखने पर पांच सौ, नवजात शिशुओं की देखभाल के ढाई सौ और बच्चों का पूर्ण प्रतिरक्षणीकरण कराने पर प्रति बच्चा सौ व पचास रुपये प्राप्त होते हैं। इसके बावजूद 35 आशा कार्यकर्ता आयशा नर्सिंग होम में पहुंच गई। यहां पहुंचना ही उनकी संविदा समाप्त होने का कारण बन गया है। स्वास्थ्य विभाग ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
सभी आशाओं को समय पर अपना पैसा मिल रहा है। ज्यादा से ज्यादा एक माह गुजरता होगा, उनका पैसा मिल जाता है, लेकिन इस तरह निजी अस्पतालों में मरीजों को पहुंचाना गलत है। मरीजों के लिहाज से भी और नियमों के अनुसार से भी गलत है। जो आशा कार्यकर्ता आयशा नर्सिंग होम में पकड़ी गईं थीं, उन्हें हटाया जाएगा।
कुमार प्रशांत, डीएम
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