किसान दुर्घटना बीमा के 20 लाख हड़पे, अधिवक्ता समेत चार फंसे

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 27 Sep 2021 01:59 AM IST
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बदायूं। मुरादाबाद-फर्रुखाबाद हाईवे पर हादसे में मरे चार युवकों के परिवारवालों को मिलने वाली किसान दुर्घटना बीमा धनराशि के 20 लाख हड़पने के मामले में तहसीलदार सदर ने एक अधिवक्ता और उसके तीन परिवार वालों के खिलाफ रिपोर्ट कराई है। मृतकों के परिवारवालों ने एक माह पहले डीएम से शिकायत की थी। जिस पर डीएम ने जांच कमेटी गठित कर जांच कराई थी। पुलिस ने आरोपी अधिवक्ता को हिरासत में ले लिया है।
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28 अगस्त को वजीरगंज थाना क्षेत्र के गांव कुनार निवासी ख्योराज सिंह, राधा, रामबेटी और मीरा देवी डीएम कार्यालय आए थे। उन्होंने डीएम दीपा रंजन को अलग-अलग पत्र सौंपे थे। कहा था कि 25 अक्तूबर 2020 को सचिन आजाद पुत्र ख्योराज सिंह, योगेंद्र पुत्र धूमपाल, जुगनू पुत्र सोहनपाल और राहुल पुत्र हेमराज समेत पांच युवक मुरादाबाद-फर्रुखाबाद हाईवे पर दौड़ लगा रहे थे। इसी दौरान बदायूं की ओर से आई कार ने पांचों युवकों को कुचल दिया, इसमें तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि एक युवक ने कुछ दिन बाद इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। इस पर परिवारवालों ने कार नंबर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके अलावा सचिन, योगेंद्र, जुगनू और राहुल के नाम से किसान दुर्घटना बीमा धनराशि के लिए आवेदन किया था।

पंद्रह अगस्त के बाद परिवारवालों को पता चला कि उन्हें दी गई पांच-पांच लाख रुपये (कुल 20 लाख) की धनराशि किसी और के खाते में चली गई है। ऐसा चारों मृतकों के परिजन की ओर से किए गए आवेदन पर खाते नंबर बदल कर किया गया है। परिवार की शिकायत पर डीएम दीपा रंजन ने एसडीएम सदर और तहसीलदार सदर समेत चार अधिकारियों की कमेटी बनाकर जांच कराई गई। इससे पता चला कि परिवार वालों को मिलने वाली रकम अधिवक्ता महेश कुमार सिंह, उनके भाई अशोक कुमार, मां दुलारो देवी और पिता नंदराम के खाते में पहुंची थी। प्रथम दृष्टतया जांच में अधिवक्ता महेश कुमार सिंह को दोषी मानते हुए तहसीलदार करनवीर सिंह ने उसके व उसके माता-पिता और भाई के खिलाफ धोखाधड़ी, कागजों की हेरफेर के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई है। आरोपी वकील को भी हिरासत में ले लिया है।
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वकील ने की थी मृतकों के परिवार वालों को फंसाने की कोशिश
धोखाधड़ी के आरोप में नामजद अधिवक्ता ने मृतकों के परिवारवालों को फंसाने की कोशिश की थी। पुलिस के मुताबिक उसके खिलाफ तहरीर आने से पहले अधिवक्ता ने मृतकों के परिवार के खिलाफ तहरीर दी थी। कहा था कि उन्होंने कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ देकर उसे बेहोश कर दिया था। बाद में उसके साथ लूट की गई और छोटी जियारत के नजदीक डाल दिया। जब पुलिस ने तहरीर में मृतकों के परिवारवालों के नाम देखे तो मामला संदिग्ध लगा। तब पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की थी।
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सही से जांच हो तो फंसेंगे कई लोग
यह जांच का विषय है कि मृतकों के परिवारवालों के स्थान पर दूसरे लोगों के खाता नंबर, पासबुक की फोटो कॉपी कैसे लग गई और उनके आवेदन स्वीकार कर लिए गए। फिर संबंधित खाते में रकम भी स्थानांतरित कर दी गई। जानकार बताते हैं कि दुर्घटना बीमा के मामले में इस तरह की हेरफेर अब आम हो गई है। इसमें एक काकस काम कर रहा है जिसमें विभागों व सर्वे करने वाली कंपनी से जुड़े लोग भी शामिल हैं। इस प्रकरण में एक अधिकारी के स्टेनो की मिलीभगत भी बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि स्टेनो ने चारों मृतकों के परिजन के आवेदन पास कराकर आगे भेजे थे। ठीक से जांच कराई जाए तो इसमें स्टेनो समेत कई लोग फंस सकते हैं। इसके साथ ही उस कंपनी के लोग भी जांच के लपेटे में आएंगे जिनके पास योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी है।
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जवाब नहीं दे सका वकील
पुलिस ने पकड़ा तो वकील ने सफाई दी कि उसने 16 लाख रुपये संबंधित खातों में वापस भी कर दिए हैं। जो रकम बची है वह भी देने को तैयार है। हालांकि गड़बड़ी क्यों की? इस बारे में वकील के पास संतोषजनक जवाब नहीं था।
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इस मामले में करीब एक माह पहले शिकायत आई थी। कमेटी गठित कर जांच कराई गई। इसमें प्रथम दृष्टतया जो सच्चाई सामने आई, उसके अनुसार रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। अधिवक्ता ने स्वयं लिखकर दिया है कि रुपये उसके खाते में आए थे। अगर इसमें और कोई शामिल है तो जांच में सामने आ जाएगा।
-दीपा रंजन, डीएम

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