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शासन का पक्षः जामा मस्जिद प्रकरण सुनवाई के योग्य नहीं

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 05 Oct 2022 12:57 AM IST
सार

शहर की जामा मस्जिद के मुकदमे में मंगलवार को शासन की ओर से कलेक्टर ने कागजात दाखिल किए।इससे मुकदमे में प्रपत्रों पर सुनवाई नहीं हो सकी, लेकिन इस दौरान शासन की ओर से कलेक्टर दीपा रंजन ने शासकीय अधिवक्ता के माध्यम से अपने कागजात दाखिल कर दिए।इसके लिए न्यायालय की ओर से 21 अक्तूबर तारीख तय की गई है।

न्यायालय जाते हिंदू महासभा के प्रदेश संयोजक मुकेश पटेल, वकील वेदप्रकाश साहू व अन्य। संवाद
न्यायालय जाते हिंदू महासभा के प्रदेश संयोजक मुकेश पटेल, वकील वेदप्रकाश साहू व अन्य। संवाद - फोटो : BADAUN
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विस्तार

बदायूं। शहर की जामा मस्जिद के मुकदमे में मंगलवार को शासन की ओर से कलेक्टर ने कागजात दाखिल किए। कलेक्टर दीपा रंजन के वकील की ओर से दाखिल दस्तावेजों में उन्होंने वर्ष 1991 एक्ट का हवाला देते हुए कहा है कि यह मामला सुनवाई योग्य नहीं है। इधर, मंगलवार को न्यायाधीश के मौजूद न होने से किसी भी प्रार्थनापत्र पर सुनवाई नहीं हो सकी। अगली सुनवाई के लिए 21 अक्तूबर की तारीख तय की गई है।

मंगलवार को जामा मस्जिद के मुकदमे की सुनवाई थी। अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रदेश संयोजक मुकेश पटेल और उनके अधिवक्ता वेदप्रकाश साहू समेत अन्य समर्थक व इंतजामिया कमेटी के अधिवक्ता मोहम्मद असरार अहमद अपनी-अपनी तैयारियों के साथ न्यायालय पहुंचे। दो दिन से न्यायालय में वकीलों की हड़ताल चल रही है। इसके अलावा सिविल जज सीनियर डिवीजन विजय कुमार गुप्ता अवकाश पर थे।

इससे मुकदमे में प्रपत्रों पर सुनवाई नहीं हो सकी, लेकिन इस दौरान शासन की ओर से कलेक्टर दीपा रंजन ने शासकीय अधिवक्ता के माध्यम से अपने कागजात दाखिल कर दिए। वकील वेदप्रकाश साहू के मुताबिक शासकीय अधिवक्ता ने सन 1991 एक्ट का हवाला देते हुए कहा है कि यह मुकदमा सुनवाई योग्य नहीं है। उनकी आपत्ति पर अगली तरीख को सुनवाई होगी। इसके लिए न्यायालय की ओर से 21 अक्तूबर तारीख तय की गई है।
शासकीय अधिवक्ता ने न्यायालय में क्या पेश किया है। इसके बारे में हमें जानकारी नहीं है। उसकी कॉपी हमें मिलती तो हम बता सकते थे। वैसे भी यह मामला सुनवाई के योग्य नहीं है। अगली तारीख पर इसी बात को लेकर बहस होगी। -मोहम्मद असरार अहमद, वकील, इंतजामिया कमेटी
शासकीय अधिवक्ता ने डीएम की ओर से कागजात दाखिल किए हैं। उन्होंने सन 1991 एक्ट का हवाला देते हुए कहा है कि यह मुकदमा सुनवाई के योग्य नहीं है। यही हवाला ज्ञानवापी मामले में दिया गया था, लेकिन मौजूद साक्ष्यों को कैसे नकारा जा सकता है। हमें तमाम पुराने साक्ष्य मिल रहे हैं। उनमें साफ तौर पर मंदिर का हवाला है। मंदिर तोड़कर कैसे मस्जिद बनाई गई, सब कुछ लिखा है। हम अगली सुनवाई पर यह साक्ष्य पेश करेंगे। -वेद प्रकाश साहू, वकील अखिल भारत हिंदू महासभा

न्यायालय जाते इंतजामिया कमेटी के अधिवक्ता। संवाद

न्यायालय जाते इंतजामिया कमेटी के अधिवक्ता। संवाद- फोटो : BADAUN

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