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एक्सप्रेस-वे के लिए काटे जाएंगे हरे वृक्ष, वन विभाग जुटा रहा ब्योरा

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 28 Jul 2021 12:41 AM IST
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बदायूं। गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए जिले में भूमि अधिग्रहण का काम जोरों पर चल रहा है। एक्सप्रेस-वे की जद में आने वाले हरे पेड़ों को काटा जाएगा। प्राणवायु और फल देने वाले इन पेड़ों की कटाई के लिए वन विभाग की ओर से सर्वे किया जा रहा है।
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मेरठ से प्रयागराज के बीच बनने वाले गंगा एक्सप्रेस-वे बदायूं की चार तहसीलों के 84 गांवों से होकर गुजरेगा। बिसौली के 37, दातागंज के 27, सदर के 18 और बिल्सी के दो गांवों में इसके लिए भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है। भूमि अधिग्रहण का काम भी करीब 85 फीसदी पूरा हो चुका है। आठ लेन में विस्तारित 120 मीटर चौड़े गंगा एक्सप्रेस-वे की जद में एक अनुमान के अनुसार तीन हजार से ज्यादा पेड़ आ रहे हैं। इनमें काफी संख्या में छाया और फलदार पेड़ हैं। वन विभाग की ओर से बिसौली, सदर और दातागंज वन रेंज में पेड़ों का प्रजातिवार ब्यौरा जुटाया जा रहा है। वन विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए 2500 से ज्यादा पेड़ों का कटान होगा।

एक्सप्रेस-वे की राह में आरक्षित वन क्षेत्र नहीं
जिले में गंगा एक्सप्रेस-वे की लंबाई 92 किलोमीटर होगी। गनीमत की बात यह है कि वन विभाग ने एक्सप्रेस-वे को लेकर अब तक जो सर्वे कराया है उसके अनुसार एक्सप्रेस-वे की राह में जिले में कहीं पर भी आरक्षित वन क्षेत्र या फिर वन भूमि नहीं आ रही है। हालांकि, सड़कों के किनारे वन विभाग के वृक्ष हैं। वन विभाग के वृक्ष आरक्षित वन क्षेत्र या फिर वन विभाग की भूमि पर ज्यादा संख्या में होते हैं। सड़कों, हाईवे किनारे के वृक्ष भी वन विभाग के होते हैं। सबसे ज्यादा यही वृक्ष एक्सप्रेस-वे के लिए काटे जाने हैं। एक्सप्रेस-वे पर जिले में चार स्थानों पर जंक्शन भी बनाए जाने हैं। इसके अलावा एक्सप्रेस वे मुरादाबाद-फर्रुखाबाद, बरेली-मथुरा, बदायूं-दातागंज-तिलहर, बदायूं-आंवला मार्ग को भी जोड़ेगा। इन मार्गों पर काफी संख्या में वृक्ष हैं। इनका भी वन विभाग ब्योरा जुटा रहा है। सदर के रेंजर नवेद इकराम का कहना है कि सर्वे के बाद ही कुल वृक्षों की संख्या बताई जा सकती है।
दातागंज में भूमि अधिग्रहण का काम 90 फीसदी पूरा
दातागंज। तहसील के 27 गांवों से होकर एक्सप्रेस-वे गुजरेगा। इसके लिए दातागंज में 253 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण किया जाना है। इसके सापेक्ष अब तक 225.25 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण हो चुका है। करीब 28 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण होना बाकी है। एसडीएम पारस नाथ मौर्य का कहना है कि करीब 12 हेक्टेयर भूमि के मामले विभिन्न न्यायालयों में लंबित हैं। सात पट्टे हैं इनके निरस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा छह किसान जेल में हैं। इनकी जमीन के बैनामा भी अधिग्रहण के लिए कराए जाने हैं।
गंगा एक्सप्रेस-वे की राह में कोई आरक्षित वन क्षेत्र या वन भूमि नहीं है। एक्सप्रेस-वे निर्माण के लिए सड़कों के किनारे के पेड़ों और किसानों के निजी पेड़ काटे जाने हैं। जिले में पेड़ों का प्रजातिवार सर्वे कराया जा रहा है। इसके बाद ही काटे जाने वाले पेड़ों की संख्या साफ हो सकेगी।
- अशोक कुमार सिंह, डीएफओ
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