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घर-घर जाकर चौदह दिन में ढूंढे गए 61 क्षय रोगी

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 01 Aug 2021 12:10 AM IST
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घर-घर जाकर चौदह दिन में ढूंढे गए 61 क्षय रोगी
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देवरिया। जनपद में क्षय रोग के नियंत्रण को लेकर स्वास्थ्य विभाग गंभीर है। इसके मद्देनजर दस्तक अभियान में चौदह दिन के अंदर घर-घर जाकर टीबी के मरीजों की तलाश की गई। संभावित रोगियों को चिह्नित कर जांच कराई गई, जिसमें 61 लोगों में बीमारी की पुष्टि हुई। अब इनका इलाज शुरू कर दिया गया है। मरीजों को नि:शुल्क दवा के साथ ही पांच सौ रुपये प्रतिमाह पौष्टिक आहार के लिए भी दिया जाता है।
केंद्र सरकार ने क्षय रोग के उन्मूलन के लिए वर्ष 2025 तक का लक्ष्य रखा है। कोरोना महामारी के दौरान क्षय रोगियों की तलाश ठप हो गई थी। स्वास्थ्य विभाग अब सक्रिय हो गया है। जिले में संचारी रोग से बचाव व क्षय रोगियों की तलाश के लिए दस्तक अभियान चलाया गया। इसके तहत जिला क्षय रोग अधिकारी के निर्देश पर जनपद को तीन भाग में बांटा गया। 2752 आशा कार्यकर्ता, 26 सुपरवाइजर लगाए गए। जिला कार्यक्रम समन्वयक देवेंद्र प्रताप सिंह, पीएमडीटी समन्वयक चंद्र प्रकाश त्रिपाठी, पीपीएम समन्वयक मृत्युंजय पांडेय को मानीटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई। अभियान में डोर-टू-डोर जाकर आशा कार्यकर्ता लोगों से मिलीं और टीबी रोग के लक्षण की जानकारी दीं। इस दौरान 651 संभावित मरीज चिह्नित किए। इनमें 253 की बलगम जांच व एक्स-रे कराया गया। रिपोर्ट में 61 लोगों में टीबी रोग की पुष्टि हुई, जिसमें 36 बलगम तथा 25 अन्य अंगों वाले क्षय रोगी मिले। इसके अलावा जनपद में ओपीडी में 270 रोगी मिले। क्षय रोगियों का इलाज शुरू कर दिया गया है। इस बीमारी में छह से तीस माह तक दवा का कोर्स होता है। विभाग की ओर से दवा मुफ्त प्रदान की जाती है।

समय-समय पर होती है जांच
क्षय रोग की अलग-अलग कटेगरी होती है। समय-समय मरीजों की जांच होती है। सामान्य मरीजों को कटेगरी-एक में रखा जाता है। इनकी दो व छह माह पर जांच कराई जाती है। जबकि गंभीर मरीजों को कटेगरी चार में रखा जाता है। इनकी जांच तीन माह पर कराई जाती है।
मरीज के परिवार के बच्चों रोग से बचाव के लिए दी जाती है दवा
बलगम के घनात्मक क्षय रोगी मिलने पर घर में मौजूद पांच साल तक के बच्चों को टीबी रोग से बचाने के लिए विभाग की ओर से आइसोनियाजिड नाम की दवा दी जाती है। बच्चों को दस मिलीग्राम प्रति किलो शरीर के वजन के अनुसार छह माह तक नि:शुल्क दी जाती है।
इन्हें क्षय रोग की रहती है संभावना
मधुमेह, हृदय रोगी, एचआईवी पॉजिटिव तथा तंबाकू, शराब आदि का सेवन करने वालों में क्षय रोग होने की संभावना रहती है, क्योंकि ऐसे लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है।
लक्षण
पंद्रह से खांसी, बुखार आना
भूख न लगना
वजन गिरना
शाम के समय बुखार आना
रात में सोते समय पसीना आना
बलगम के साथ खून आना
लक्षण मिलने पर चिकित्सक से करें संपर्क, कराएं जांच
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेद्र प्रसाद यादव का कहना है कि जनपद में क्षय रोग के रोकथाम के लिए कार्य किए जा रहे हैं। अभियान के तहत घर-घर जाकर क्षय रोगी की तलाश की गई। इसके अलावा भी लोगों को चिह्नित कर जांच कराई जाती है। लक्षण मिलने पर लापरवाही न बरतें तत्काल नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर चिकित्सक से संपर्क करें और जांच कराएं। क्षय रोगियों को नि:शुल्क दवा दी जाती है। साथ ही पांच सौ रुपये प्रतिमाह पौष्टिक आहार के लिए भी दिया जाता है।
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