बीएसएस दफ्तर के निलंबित वित्त व लेखाधिकारी रजिस्टर चोरी में गए जेल

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 25 Oct 2021 12:21 AM IST
bsa
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फर्जी अनुमोदन पत्र से करोड़ों रुपये का भुगतान के मामले में भी हैं नामजद
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। फर्जी अनुमोदन पत्र के जरिए जनपद के विभिन्न अनुदानित विद्यालयों में नियुक्त अध्यापकों को करोड़ों का भुगतान करने वाले निलंबित वित्त एवं लेखाधिकारी को पुलिस ने रविवार को रजिस्टर चोरी के मामले में जेल भेज दिया। पुलिस ने आरोपित के पास से 1500 रुपये और गायब डिस्पैच रजिस्टर भी बरामद कर लिया है। इनके खिलाफ कोतवाली में तीन मुकदमे दर्ज हैं।
एसटीएफ गोरखपुर यूनिट में अगस्त माह में जनपद के दो विद्यालयों में अनुमोदन पत्र के जरिए अध्यापक बनाए जाने के मामले का पर्दाफाश किया था। इस मामले में एसटीएफ ने 17 लोगों के खिलाफ दर्ज कराया था। जिसमें पांच को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। नौ लोगों पर 25- 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। इस मामले में निलंबित वित्त एवं लेखाधिकारी जगदीश प्रसाद श्रीवास्तव पर एसटीएफ ने मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप है कि फर्जी शिक्षकों के एरिया और वेतन भुगतान की करोड़ों की राशि इनकी मिलीभगत से हुई है। इसके कुछ दिन बाद खंड शिक्षा अधिकारी बीरबल राम ने कोतवाली पुलिस को तहरीर देकर वर्ष 2010-11 का एक डिस्पैच पंजिका गायब होने और कुछ अन्य रजिस्टरों का पन्ना फाड़ कर गायब करने का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस को बताया था कि एक अप्रैल 1987 से 13 सितम्बर 1989 का भी पंजिका चोरी हो गई है। इस मामले में वांछित चल रहे निलंबित जगदीश प्रसाद श्रीवास्तव को एसटीएफ के निरीक्षक सत्य प्रकाश सिंह ने शनिवार की रात में गोरखपुर के गोलघर तिराहे के पास से गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, दो मोबाइल फोन, गायब डिस्पैच रजिस्टर और 15 सौ रुपये नगद बरामद किया है। सीओ श्रीयश त्रिपाठी ने बताया कि निलंबित वित्त एवं लेखाधिकारी को गिरफ्तार कर लिया गया है। इनके खिलाफ डिस्पैच रजिस्टर चोरी करने का मुकदमा दर्ज किया गया था। जिसकी विवेचना की जा रही है।

जिसका जताया था अंदेशा वही हुआ
देवरिया। बीएसए आफिस के निलंबित वित्त व लेखाधिकारी पर दर्ज फर्जी शिक्षकों के भुगतान के मामले में कोतवाली में दर्ज मुकदमे हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर 27 अक्तूबर तक रोक है। इसके कारण वह निश्चिंत थे कि गिरफ्तारी नहीं होगी। वहीं दूसरे मामले में अज्ञात लोगों पर डिस्पैच रजिस्ट्रर चोरी करने का मुकदमा दर्ज है। इसमें विवेचना के दौरान उनका नाम प्रकाश में आते ही एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया। इसका अंदेशा वित्त एवं लेखाधिकारी को कुछ दिन पहले हो गया था। इसके कारण आरोपी ने पुलिस महानिदेशक को कुछ दिन पहले प्रार्थना पत्र देकर गुहार लगाई थी कि विवेचना के दौरान मेरा नाम प्रकाश में लाकर पुलिस गिरफ्तार कर सकती है। मेरे पास से ही गायब रजिस्टर को पुलिस बरामद दिखा सकती है।

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