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नाले की जांच रिपोर्ट आई नहीं, फिर गिरा सौ मीटर

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 22 Sep 2022 12:03 AM IST
शहर के जल निकासी के लिए अमेठी के तरफ बन रहा नाला रात में काफी दूर तक टुट कर गिर गया।संवाद
शहर के जल निकासी के लिए अमेठी के तरफ बन रहा नाला रात में काफी दूर तक टुट कर गिर गया।संवाद - फोटो : DEORIA
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नाले की जांच रिपोर्ट आई नहीं, फिर गिरा सौ मीटर

डेढ़ माह बाद शुरू हुआ शहर का निर्माणाधीन बड़ा नाला, कार्य की गति अभी कछुआ ही
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। कुर्ना के पास से 41.33 करोड़ की लागत से करीब 8.8 किलोमीटर का लंबे बड़े नाले का निर्माण किया जा रहा है। इससे पूरे शहर का पानी होकर जाना है। एक सप्ताह पहले नाले का कुछ हिस्सा गिरा था। इसकी जांच रिपोर्ट अभी आई नहीं कि मंगलवार की रात सौ मीटर नाला फिर गया। कार्यदायी संस्था ने खामियों को छिपाने के लिए रात में जेसीबी मशीन से मिट्टी की भराई भी कर दी है ताकि सुबह होते पोल न खुल जाए।
शहर को जलभराव से निजात दिलाने के लिए 8800 मीटर आरसीसी बड़े नाले का निर्माण किया जा रहा है। यह करीब डेढ़ माह की देरी से शुरू हुआ है। अब भी मजदूरों की संख्या कम होने से नाला निर्माण की रफ्तार काफी सुस्त है। नाला निर्माण होने से शहर के मुख्य मार्ग, सरकारी कार्यालय और मोहल्लों को जलभराव से मुक्ति मिलने की बात नगर पालिका परिषद कह रहा है। नाला खोराराम रोड से कुर्ना नाला, कतरारी चौराहा, रामनाथ देवरिया से दो भागों में बंट जाएगा। एक सीसी रोड, वन विभाग, दीवानी कचहरी के पास से सिविल लाइंस तो दूसरा पुलिस लाइंस की ओर जाएगा।

नाले का निर्माण करने वाली कार्यदायी संस्था को 15 जून तक कतरारी चौराहे के पास काम पूरा करना था। इसकी दूरी करीब डेढ़ किलोमीटर कुर्ना से है। पर अभी तक नाला सात सौ मीटर भी पूरा नहीं हो पाया है। इसी बीच बारिश का मौसम आने से नाला निर्माण की गुणवत्ता की पोल भी खुलती नजर आ रही है।
अभी एक सप्ताह पहले बारिश हुई थी तो करीब तीस मीटर आरसीसी नाला गिर गया था। इसकी जांच का आदेश सीडीओ रवींद्र कुमार ने दिया और दो दिन के भीतर जवाब तलब किया था। इतना ही नहीं प्रयोगशाला लखनऊ में सामग्री परीक्षण के लिए भी भेजी गई है। अभी जांच रिपोर्ट आई नहीं, लेकिन एक बार फिर से मंगलवार की रात बारिश का पानी भरने से नाला करीब सौ मीटर तक भरभरा गिरकर गया है।
आसपास के लोगों ने बताया कि नाला गिरने के बाद भोर में जेसीबी मशीन लगा कर मिट्टी से पाट दिया गया, ताकि इससे छिपाया जा सके। अगर नाला ऐसे ही गिरता रहा तो निर्माण पूरा होने के बाद शहर से बड़ी मात्रा में निकलने वाला पानी कैसे झेल पाएगा। नाला टूटेगा तो आसपास के मोहल्ले में पानी घुस जाएगा। इसके कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
नाला एक नजर में
8.8 किलोमीटर निर्माण होना है।
700 सौ मीटर पर अभी काम चल रहा है।
15 जून तक कतरारी चौराहे पर काम पूरा होना था।
41.33 करोड़ रुपये की लागत है।
मिट्टी बेचकर भी भर रहे जेब
देवरिया। आसपास के लोगों ने बताया कि खुदाई के बाद निकलने वाली मिट्टी को रात के अंधेरे में बेच दिया जा रहा है। लोगों को डर है कि नाला बनने के बाद फिर से भराई के लिए मिट्टी कहां से आएगी। मिट्टी बेचने के बाद दूसरी मिट्टी खरीदने से बजट भी बढ़ेगा।
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कोट
कुछ दिन पहले नाला गिरा था। उसकी जांच के आदेश दिए गए हैं। नाला निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सामग्री जांच के लिए प्रयोगशाला लखनऊ को भेजी गई है। फिर से नाला गिरा है। निरीक्षण कर कार्रवाई की जाएगी। पूरे मामले की शासन स्तर पर जानकारी दी जाएगी।
- रवींद्र कुमार, मुख्य विकास अधिकारी

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