खाद की किल्लत से संकट में फंसा अन्नदाता

Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Thu, 28 Oct 2021 06:57 PM IST
मंडी समिति स्थित गोदाम पर ट्रैक्टर लेकर पहुंचे किसान डीएपी का इंतजार करते। संवाद
मंडी समिति स्थित गोदाम पर ट्रैक्टर लेकर पहुंचे किसान डीएपी का इंतजार करते। संवाद - फोटो : ETAH
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एटा/जलेसर/अलीगंज। किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। आलू, सरसों, मटर आदि की बुवाई का समय चल रहा है। तमाम किसानों ने बुवाई कर भी दी थी, लेकिन पिछले दिनों हुई बारिश ने इस पर पानी फेर दिया। अब किसानों को दोबारा बुवाई करनी है, लेकिन डीएपी खाद की किल्लत के चलते काम रुका पड़ा है। जिससे किसानों के आगे संकट खड़ा हो गया है।
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कृषि विभाग भले ही पर्याप्त डीएपी की उपलब्धता के दावे कर रहा है, लेकिन हकीकत अलग ही है। तीनों ही तहसील क्षेत्रों में डीएपी की किल्लत है। कहीं लंबी कतारें और मारामारी के बीच डीएपी मिल रही है तो कहीं मिल ही नहीं पा रही। सरकारी गोदामों की बात छोड़ दें, निजी दुकानों पर भी डीएपी की कमी है। यूरिया जरूर आसानी से मिल रही है। जलेसर में सोमवार को प्रशासन द्वारा भिजवाई गई 1100 बोरियां बुधवार को खत्म हो गईं। किसानों का कहना है कि बारिश के चक्कर में बुवाई पहले ही प्रभावित हो चुकी है। अब खाद न मिलने से हो रही देरी काफी भारी पड़ सकती है।

दावा, 7799 एमटी डीएपी का हो चुका वितरण
कृषि विभाग का दावा है कि जिले में 7799 मीट्रिक टन डीएपी का वितरण किसानों को किया जा चुका है। जबकि कुल 11629 एमटी डीएपी प्राप्त हुई। जरूरत और मांग के मुताबिक शासन से डीएपी उपलब्ध कराई जा रही है। वर्तमान में 3830 एमटी डीएपी का स्टॉक गोदामों पर है।

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