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खुदरा कांच चूड़ी व्यापार पर हावी मेटल, सीप निर्मित कड़ों का कारोबार

Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 30 Jul 2021 11:51 PM IST
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सदर बाजार स्थित  चूड़ी के दुकानों पर सजे कड़े
सदर बाजार स्थित चूड़ी के दुकानों पर सजे कड़े - फोटो : FIROZABAD
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फिरोजाबाद। बदलते परिवेश में कलाईयों में सजने वाली चूड़ियों की जगह महिलाओं ने फैंसी कड़ों को देना शुरू कर दिया है। इसका असर सुहागनगरी के खुदरा चूड़ी कारोबार पर पड़ा है। ताजा स्थिति के अनुसार करीब दो हजार करोड़ रुपये के वार्षिक चूड़ी कारोबार में मेटल, ब्रास, सीप एवं प्लास्टिक कड़ा के कारोबार ने 40 प्रतिशत तक की हिस्सेदारी बढ़ा ली है।
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फैशन के दौर व बदलते परिवेश ने फिरोजाबाद के परंपरागत करीब दो हजार करोड़ रुपये प्रतिवर्ष का कारोबार वाले खुदरा चूड़ी व्यापार का दायरा सिमट रहा है। सतरंगी चूड़ी पहनने वाली महिलाएं अब चूड़ी की अपेक्षा एक-दो कड़ा पहने ही दिखती हैं। इस बदलाव का असर खुदरा चूड़ी कारोबार पर भी पड़ा है। जानकारों की माने तो बदलते दौर में सतरंगी चूड़ी की मांग पर फैंसी कड़ा हावी है। वर्तमान में चूड़ी कारोबार के करीब 40 प्रतिशत भाग पर इंदौर, मुंबई और जयपुर से आने वाले लाख के कड़ा ने कब्जा जमा लिया है।

एक अनुमान के मुताबिक प्रतिवर्ष करीब दो हजार करोड़ रुपये के खुदरा चूड़ी कारोबार में से कड़ा का कारोबार 30 से 40 प्रतिशत यानि करीब 500 करोड़ तक पहुंच गया है।
सुहागिनों को भा रहे अन्य प्रांतों के फैंसी कड़ा
वर्तमान समय में फिरोजाबाद चूड़ी कारोबारी कांच के कड़ा तैयार कराने को कच्चा माल जयपुर भेज रहे हैं। जयपुर में तैयार कड़ा को यहां पर बेचा जा रहा है। इसके अलावा चूड़ी के साथ मुंबई के सीप निर्मित कड़ा, इंदौर में बनने वाले मेटल के अलावा फिरोजाबाद में बन रहे जरकीन के कड़ा की मांग काफी है।
क्या कहते हैं चूड़ी गोदाम स्वामी
अधिकांश युवा वर्ग की महिलाएं कामकाजी अथवा नौकरी पेशा हैं। ऐसे में वे कलाईयों में चूड़ी पहनने की जगह महज एक या दो कड़ा पहनकर काम चला रहीं हैं। इससे चूड़ी की बिक्री बहुत ज्यादा प्रभावित हुई है।
अजय गुप्ता चूड़ी गोदाम स्वामी
पिछले कई वर्षों में सुहागिन महिलाओं को सीप, जरकीन और प्लास्टिक के अलावा कांच के कड़ा मांग बढ़ी है। करीब 50 प्रतिशत युवा वर्ग की महिलाएं चूड़ी की जगह फैंसी कड़ा पहनना ज्यादा पसंद करती हैं। हम कांच कड़ा जयपुर से बनवाते हैं हालांकि कच्चा माल हमें ही वहां पर भेजना पड़ता है।
-पीयूष गुप्ता कड़ा कारोबारी
महिलाओं की बात
कांच की चूड़ी सदाबहार है लेकिन ऑफिस जाते वक्त अथवा घरेलू कामकाज के दौरान दर्जनों चूड़ी कलाई में नहीं डाल सकते हैं। चूड़ी अथवा कड़ा दोनों ही सुहाग का प्रतीक हैं।
- शिवा शर्मा, निवासी हनुमान गंज
सतरंगी चूड़ी हमेशा पहन नहीं सकते। घर में कामकाज करते वक्त टूटने के डर से कांच की चूड़ी उतारनी पड़ती है। यह अजीब लगता है। मेटल,सीप अथवा कांच के कड़ा को कामकाज के दौरान उतरने की जरूरत नहीं पड़ती है।
-रीना सिंह, निवासी तिलक नगर

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