बेहतर अनुभव के लिए एप चुनें।
INSTALL APP

फादर्स-डे पर विशेष: पिता की यादें हैं हौंसला, हर उम्मीद पर उतरेंगे खरा

Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sat, 19 Jun 2021 09:49 PM IST
विज्ञापन
चंद्र विजय सिंह- जिलाधिकारी फिरोजाबाद
चंद्र विजय सिंह- जिलाधिकारी फिरोजाबाद - फोटो : FIROZABAD
ख़बर सुनें
फिरोजाबाद। पिता एक समर्पण का भाव है। बेटे के लिए पिता ही उसका स्वाभिमान होता है, लेकिन कोरोना संक्रमण के इस काल ने कई बेटों-बेटियों से उनके पिता को छीन लिया। कई बच्चे अनाथ हो गए। हर साल जब फादर्स-डे आता था तो बच्चे उपहार देकर शुभकामनाएं देते थे, मगर कोरोना काल ने ऐसा जख्म दिया कि फादर्स-डे का दिन भी फीका हो गया। कुछ जगहों पर बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया जिन्हें पिता की कमी खल रही है। दूसरी ओर ऐसे पिता हैं जिनके बच्चों की असमय मौत हो गई। ऐसे परिवारों ने अपना दर्द बया किया हैं।
विज्ञापन

जनप्रतिनिधि बनकर लोगों की समस्या का करूंगा समाधान
अनन्य गोविंद शर्मा ने अपने शिक्षक पिता प्रवेंद्र कुमार शर्मा को कोरोना काल में खो दिया। जब वह बीमार हुए तो ऑक्सीजन के लिए जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से मिन्नतें की। मगर किसी ने एक न सुनीं। जनप्रतिनिधि बनकर लोगों की समस्या का समाधान कराऊंगा।

अधिकारी बनकर करूंगा पापा के सपनों को पूरा
कोरोना काल में पिता को खो चुके सार्दुल कुशवाहा ने कहा कि पिता मंजिल तक पहुंचाने का हौसला होते हैं। हर साल पापा को उपहार देते थे। मगर इस बार कोरोना काल ने पिता को छीन लिया। मेरे पापा का सपना था कि मैं प्रशासनिक अधिकारी बनूं। पिता को खोने के बाद संकल्प लिया कड़ी मेहनत से प्रशासनिक अधिकारी बनकर लोगों की सेवा करता रहूंगा।
पुत्र की मृत्यु के बाद बेटियां बनीं मेरी शक्ति: दिनेश
टूंडला निवासी दिनेश कांत शर्मा ने कहा कि पिता के लिए उसकी संतान ही शक्ति होती है। बुढ़ापा संतान पर ही निर्भर होता है। मेरा एक पुत्र था। चार पुत्रियां हैं। इकलौते पुत्र की मृत्यु होने के बाद बेटियां ही मेरी शक्ति बन गईं है। पुत्र की असमय मृत्यु अपूर्णनीय क्षति है। मगर चारों बेटियां जिस मुकाम पर हैं, वो पिता के लिए साहस से कम नहीं है।
पिता के साथ बच्चे भी हुए सफल
पिता के भजनों से जागी साहित्य के प्रति रुचि
साहित्य भूषण सम्मानित साहित्यकार डॉ. राम सनेही लाल यायावर कहते हैं आज मैं जिस मुकाम पर हूं। मेरे पिता की बदौलत हूं। मेरे पिता पंडित गयाप्रसाद शर्मा स्वतंत्रता सेनानी थे। पिता आजादी से पहले डोला, भजन गाकर लोगों में स्वतंत्रता की अलख जलाते थे। ब्रज क्षेत्र में सबसे छोटी उम्र में सत्याग्रह करने वाले मेरे पिता थे। उनके भजनों को गाकर किताबों के प्रति रुचि बढ़ी। आज मैं 40 पुस्तकें लिख चुका हूं। देश, विदेश में हिंदी के मंचों पर सम्मानित हुआ हूं।
पिता की मेहनत और प्रेरणा से बना डीएम
मेरे पिता ने हम सभी भाई-बहनों की शिक्षा-दीक्षा से कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने हमेशा चुनौती को स्वीकार कर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। मैंने बीटेक के बाद सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर दो वर्ष तक काम किया लेकिन पुलिस विभाग में अफसर पिता आरके मनिक मुझे आईएएस अफसर बनाना चाहते थे। पिताजी का मार्गदर्शन मिला तो मैने यह चुनौती स्वीकार कर तैयारी की। दो वर्ष की अवधि में ही मैंने यह मुकाम हासिल कर लिया। मेरी सफलता का पूरा श्रेय मेरे पिता को जाता है। लोगों को संदेश यह हैं कि जीवन में आने वाली हर चुनौती पर काम करना चाहिए।
चंद्र विजय सिंह जिलाधिकारी
पिता करते रहे मेरा उत्साहवर्धन, उससे पाया मुकाम
मेरे पिता किशन कुमार गौर एग्रीकल्चर विभाग में एक्सईन पद रहे हैं। उनके सानिध्य में रह कर मैने हमेशा कठिन से कठिन लक्ष्य को भेदना सीखा। उन्होंने मुझे पूरी ईमानदारी और सच्चाई के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। पढ़ाई के दौरान समय का अनुपालन करना उन्होंने सिखाया। नियमित मार्गदर्शन भी बड़ों का मिलता रहा। परिणाम सामने आया मैंने बेहद कम उम्र में ही आईएएस की परीक्षा पास की। सच्चाई और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ना मेरा ध्येय है।
चर्चित गौड़, आईएएस मुख्य विकास अधिकारी

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us