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ड्रेजिंग कर निकाले गए करोड़ों का बालू व 11 करोड़ बजट सरयू में समाए

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 01 Aug 2021 11:04 PM IST
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गोंडा के ऐली परसौली के पास घाघरा नदी का ड्रेसिंग।
गोंडा के ऐली परसौली के पास घाघरा नदी का ड्रेसिंग। - फोटो : GONDA
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गोंडा। भिखारीपुर-सकरौर बांध को बचाने के लिए ऐली परसोली के पास घाघरा नदी में करीब सात किलोमीटर की ड्रेजिंग में निकलने वाले बालू की नीलामी नहीं हो सकी। बालू की नीलामी न होने से करोड़ों रुपये का यह सफेद सोना फिर सरयू की धारा में समा गया। नदी से बालू निकालने के नाम पर सरकार के 11 करोड़ खर्च हो गए। नीलामी की प्रक्रिया जिला प्रशासन को करनी थी, जो नहीं हो पाई।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले साल पूर्वांचल की बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए समग्र कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा था कि बाढ़ से पूर्वांचल में हर साल जन-धन की हानि होती रही है।

यहां की प्रमुख नदियां नेपाल के पहाड़ी क्षेत्र से निकलती हैं। बाढ़ के दौरान आए मलबे से नदियों का तल ऊपर उठ गया है। इनकी सफाई (ड्रेजिंग) के लिए कार्ययोजना तैयार की जाए। इससे बाढ़ की समस्या स्थायी रूप से हल होगी, वहीं इससे निकले बालू की बिक्री से स्थानीय प्रशासन को राजस्व भी मिलेगा।
इसी क्रम में तरबगंज तहसील के ऐली परसौली में भिखारीपुर-सकरौर तटबंध पर 7.2 किलोमीटर लंबाई तक ड्रेजिंग व चैनालाइजेशन का कार्य कराये जाने की स्वीकृति मिली।
परियोजना की लागत करीब 11 करोड़ रुपये हैं। इस कार्य का जिम्मा उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कार्पोरेशन लखनऊ को दिया गया था। यूपीपीसीएल ने मशीन लगाकर ड्रेजिंग का काम किया, जिसमें करोड़ों रुपये का बालू नदी के बीचो-बीच डंप कर दिया।
बालू की नीलामी मई में ही होनी थी लेकिन नहीं हो सका। जून के मध्य भाग में बारिश शुरू हो गई। घाघरा में पानी छोड़े जाने व लगातार बारिश होने से नदी का जलस्तर बढ़ गया।
सरयू नदी के बीच में डंप करोड़ों रुपये का बालू नहीं निकाला जा सका। इसका कारण नदी का जल स्तर बढ़ना रहा। प्रशासन ने समय पर बालू नहीं निकलवाया। करोड़ों रुपये का बालू फिर से नदी में समा गया और ड्रेजिंग पर 11 करोड़ खर्च हो गए। स्थानीय प्रशासन को राजस्व का लाभ नहीं मिला।
अमरउजाला ने पांच जून को ही घाघरा (सरयू) के बीच ही डंप कर दी करोड़ों की बालू शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। बालू के दोनों ओर पानी बढ़ जाने की बात लिखी थी। यह भी अंदेशा जताया था कि ड्रेजिंग से निकलने वाले बालू को मानसून आने से पहले नहीं निकाला गया तो करोड़ों का बालू नदी में समा जाएगा। लेकिन प्रशासन ने इस खबर पर ध्यान नहीं दिया और बालू नदी में समा गया।
उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कार्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के एमडी ने जनवरी व फरवरी में जिला प्रशासन को ड्रेजिंग से निकलने वाली बालू की नीलामी के लिए पत्र लिखा था। लेकिन स्थानीय प्रशासन ने रुचि नहीं दिखाई।
धीरे-धीरे घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ता गया और कई किलोमीटर तल डंप बालू नदी में फिर से समा गया। बालू की नीलामी भी नहीं हो सकी। हालांकि कुछ बालू नदी में अवशेष है जो निकाला नहीं जा सकता। सरयू के विकराल रूप के आगे यह बालू का ढेर भी अधिक दिनों तक नहीं टिक सकेगा।

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