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साढ़े सात करोड़ का बांध, 300 करोड़ की मरम्मत, फिर भी सुरक्षा की गारंटी नहीं

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 19 Jun 2021 09:51 PM IST
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गोंडा। एल्गिन-चरसडी बांध का निर्माण साढ़े सात करोड़ से होने के बाद अब तक इसकी मरम्मत और बचाव के रख रखाव पर करीब 300 करोड़ का खर्चा हो चुका है। इसके बावजूद बांध न टूटे इसकी सुरक्षा को लेकर कोई गारंटी नहीं है। एक बार फिर घाघरा के कछार पर बसे गांवों की आबादी को को बाढ़ से बचाने के लिए बांध पर मरम्मत और मजबूती देने का काम शुरू है।
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एल्गिन-चरसडी बांध सिंचाई व बाढ़ विभाग के अफसरों के लिए धन कमाई का रिसर्च सेंटर बन गया है। कभी बांध बनाने, कभी बांध को मजबूत करने, कभी रिंग बांध का निर्माण, कभी कटान रोकने के लिए स्पर, ठोकर से बचाव के उपाय एवं कट बनाने की कवायदें हर साल की जाती हैं। इन कार्यों पर अब तक करीब 300 करोड़ का खर्च हो चुका है। इसके बावजूद बांध हर बार टूट जाता है और लोगों की जानमाल का नुकसान उठाना पड़ता है।

शनिवार को घाघरा का जलस्तर तेजी से बढ़ते हुए खतरे के निशान से मात्र आधा फिट नीचे रह गया है। इस दौरान करीब 2 लाख 99 हजार 264 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज हो रहा था। एल्गिन ब्रिज पर खतरे का निशान 106.07 के सापेक्ष 105.866 पर घाघरा नदी बह रही है। लगातार हो रही बारिश के चलते नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी जारी है जो कहीं ना कहीं खतरे का संकेत भी है।
वर्ष 2006-07 में करीब 52 किलोमीटर लंबे एल्गिन-चरसडी बांध के निर्माण में लगभग साढे़ सात करोड़ रुपए खर्च किए गए। मरम्मत और क्षेत्र को बाढ़ से बचाने के लिए नए-नए प्रयोग व शोध करने पर अब तक लगभग 300 करोड़ का खर्च और हो चुका है।
बीते 2 वर्ष पूर्व बांध को कुछ किलोमीटर तक पक्का बनाने के लिए 97 लाख रुपये जारी किए गए। जिसमें करीब पौने 5 किलोमीटर का नया बांध बनने के साथ पत्थर की पिचिंग का कार्य होना था। इस बांध के निर्माण में एक बार फिर खेल हो गया। निर्धारित किलोमीटर के अनुरूप कम बांध की मरम्मत एवं पत्थर से पिचिंग का काम किया गया।
कटान को रोकने के लिए जियो ट्यूब सहित ब्रेक रोरा, बालू की बोरियां, बल्ली, पाइलिंग के साथ पेड़-पौधे व घास फूस तक किनारों पर डाला जाता था। मगर इस बार बांध के किनारों को पत्थरों से पीचिंग कराने के बावजूद वहां स्पर, ठोकर तथा बांध को बचाने के लिए परक्यूपाइन बनाने का काम चल रहा है।
कोई जिम्मेदार अधिकारी मानने को तैयार नहीं है कि बांध सही सलामत है और बाढ़ से कोई खतरा नहीं है। घाघरा का पानी भी धीरे-धीरे बढ़ना शुरू हो चुका है। जल्द ही पानी बांध तक आ जाने की पूरी संभावना है। घाघरा नदी खतरे के निशान तक पहुंच चुकी है।

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