बुलंदशहर के खुर्जा से ग्राउंड रिपोर्ट: जिस कप में आप चाय पीते हैं, जानते हैं वो कैसे बनते हैं? पढ़िए पॉटरी उद्योग की पूरी कहानी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बुलंदशहर Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Wed, 01 Dec 2021 04:45 PM IST

सार

क्या आप जानते हैं कि जिस कप में आप चाय पीते हैं वो कहां और कैसे बनता है? चीनी मिट्टी के जिन बर्तनों का आप घरों में प्रयोग करते हैं उसे बनाने में क्या-क्या करना होता है? इस स्पेशल रिपोर्ट में हम आपको क्रॉकरी आइटम्स के उत्पादन से जुड़ी सारी जानकारी देंगे...
बुलंदशहर में क्रॉकरी आइटम तैयार करते कारीगर।
बुलंदशहर में क्रॉकरी आइटम तैयार करते कारीगर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

आमतौर पर लोगों को यही लगता है कि कप, प्लेट व अन्य क्रॉकरी आइटम्स केवल चीन में ही तैयार होते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। अब पूरी दुनिया में मेड इन इंडिया क्रॉकरी आइम्स की सप्लाई हो रही है। वह भी उत्तर प्रदेश के छोटे से जिले बुलंदशहर में तैयार हुए उत्पादों की। यहां खुर्जा में तैयार होने वाले चीनी मिट्टी के बर्तन व अन्य क्रॉकरी आइटम्स ने दुनिया में अपनी अलग पहचान बना ली है। पढ़िए ये स्पेशल रिपोर्ट...
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कैसे बनते हैं क्रॉकरी आइटम्स?
पॉटरी फैक्ट्री में काम करने वाले पराग बताते हैं कि क्रॉकरी आइटम्स तैयार करने के लिए गुजरात और राजस्थान से मिट्टी आती है। सबसे पहले उसे कप, प्लेट, थाली, कटोरा व अन्य बर्तन का रूप दिया जाता है। फिर उसकी फिनिशिंग होती है। फिनिशिंग के दौरान ही उसका डिजाइन बेहतर किया जाता है। इसके बाद उसे गर्म ताप में पकाया जाता है। करीब एक दिन तक पकाने के बाद प्रोडक्ट तैयार हो जाता है। इसके बाद उसमें पेंटिंग व अन्य तरह का डिजाइन ऊपर से किया जाता है। 




कहां-कहां होती है सप्लाई?
पराग के अनुसार, खुर्जा में तैयार होने वाले क्रॉकरी आइटम्स की सप्लाई देशभर के अलावा विदेशों में सबसे ज्यादा होती है। यहां से यूएस, थाईलैंड, ब्राजील, जर्मनी, कोरिया में सबसे ज्यादा सप्लाई होती है। स्वीडन से भी बातचीत चल रही है। इन देशों में यहां के क्रॉकरी आइटम की काफी ज्यादा डिमांड है। 

कैसे बढ़ा उद्योग?
फ्री हैंड पेंटिंग के क्षेत्र में राज्य स्तरीय पुरस्कार हासिल कर चुके आरिफ बताते हैं कि राज्य सरकार की ओर से शुरू किए गए वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट यानी ओडीओपी स्कीम के जरिए यहां का पॉटरी उद्योग काफी आगे बढ़ा है। इंटरनेशनल स्तर पर इसकी डिमांड बढ़ी है और नई पहचान मिली है। सरकार की ये स्कीम इस उद्योग को काफी फायदा हुआ है। नई-नई यूनिटें लग रही हैं। लोगों को लोन मिल रहा है और स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं। 

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