पिता की डांट पर घर छोड़ा, ट्रकों का मालिक बनकर लौटा

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 21 Mar 2021 11:33 PM IST
हरदोई: 14 साल बाद लौटा रिंकू....-मां सीता के गले लगता रिंकू उर्फ गुरुप्रीत। संवाद
हरदोई: 14 साल बाद लौटा रिंकू....-मां सीता के गले लगता रिंकू उर्फ गुरुप्रीत। संवाद - फोटो : HARDOI
विज्ञापन
ख़बर सुनें
हरदोई। 14 साल बाद लग्जरी कार से ट्रकों का मालिक बनकर जब बेटा लौटा तो मां के आंसुओं से खुशियां झमाझम बरसने लगीं। होली की खुशियां सांडी के फिरोजापुर में अब दोगुनी हो गई। दरअसल, 12 साल का रिंकू पढ़ने को लेकर पिता की डांट पर घर से निकल गया था।
विज्ञापन

सैतियापुर के मजरा फिरोजापुर निवासी सरजू खेती करते हैं। उनकी पत्नी सीता घरेलू महिला हैं। अब से लगभग 14 वर्ष पहले सरजू और सीता का पुत्र रिंकू घर से बिना कुछ बताए चला गया था। रिंकू की तलाश भी परिजनों ने खूब की, लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण थक हार कर बैठ गए। पिता सरजू कहते हैं कि उन्होंने रिंकू के न मिलने पर कुछ अनहोनी होने को नियति मानकर शांत बैठ गए। शनिवार रात अचानक रिंकू बदले हुए नाम और वेशभूषा के साथ गांव पहुंचा, तो मां ने उसे एक झटके में पहचान लिया। रिंकू को गले लगाकर मां खूब रोई और दुलारती रही। रिंकू पिछले 14 वर्ष से पंजाब में था और उसने कुछ ट्रक खरीद लिए। उसका एक ट्रक धनबाद में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। वह अपनी लग्जरी कार से धनबाद जा रहा था और रास्ते में हरदोई पड़ने पर उसे सब कुछ याद आ गया। हालांकि वह अपने पिता का नाम याद नहीं कर पा रहा था, लेकिन गांव निवासी सूरत यादव का नाम उसे याद था। गांव पहुंचकर सूरत के पास गया, तो सूरत ने उसे फौरन ही पहचान लिया और फिर उसके घर ले गया।

रिंकू अब गुरुप्रीत, सरदारों सा रहन सहन, सिर पर पगड़ी भी
अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाले रिंकू का नाम अब गुरुप्रीत सिंह हो चुका है। उसका रहन सहन भी सरदारों की तरह है। सिर पर पगड़ी भी बांधता है। गोरखपुर का रहने वाला एक परिवार लुधियाना में ही रहता था, उस परिवार की बेटी से रिंकू उर्फ गुरुप्रीत का विवाह भी हो चुका है। सरजू और सीता को विवाह की बात पता चली तो वह भी खुश नजर आए।
चलाना सीखा और फिर खरीदे खुद के ट्रक
रिंकू उर्फ गुरुप्रीत की कहानी बेहद फिल्मी है। रिंकू बताता है कि पढ़ाई के चलते डांट पड़ने पर वह नए कपड़ों के ऊपर पुराने कपड़े पहनकर घर से निकला था। किसी ट्रेन में बैठकर लुधियाना पहुंच गया। यहां उसे एक सरदार मिले। सरदार ने उसे अपनी ट्रांसपोर्ट कंपनी में काम दिया। यहां काम करते करते रिंकू ने ट्रक चलाना सीखा और फिर धीरे धीरे वह खुद ट्रकों का मालिक बन गया। अब उसके पास लग्जरी कार भी है।
अब पहले जैसे मत जाना
26 वर्ष के रिंकू उर्फ गुरुप्रीत को उसकी मां सीता गले से लगाए रहती है। सीता ने गुरुप्रीत से कहा कि चाहे जो काम करो, लेकिन जैसे पहले गए वैसे मत जाना। गुरुप्रीत भी इतने वर्ष बाद अपने घर पहुंचा, तो काम धंधा भूल सा बैठा और यहीं रुक गया। हालांकि कारोबारी मजबूरी में उसे देर रात निकलना पड़ा। गुरुप्रीत भी खासा खुश है अपने माता पिता से मिलकर। वह अपने माता पिता के साथ ही रहने की उम्मीद भी संजोए है।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
  • Downloads

Follow Us

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00