यूपी: पूर्वांचल विवि में बदली एजेंसी, बढ़ गया प्रति छात्र मूल्यांकन और रिजल्ट का खर्च, साथ में थमा रही गलतियों का पुलिंदा 

अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 26 Sep 2021 01:28 AM IST
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला
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जौनपुर के पूर्वांचल विश्वविद्यालय (पूविवि) की मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए एजेंसी बदले जाने से मूल्यांकन और रिजल्ट बनाने का खर्च 19.75 रुपये प्रति छात्र बढ़ गया। फिर भी छात्रों का रिजल्ट पारदर्शी तरीके से जारी नहीं हो पा रहा है। सभी विषयों की परीक्षा नहीं कराई गई है। इसके बाद भी एजेंसी को रिजल्ट घोषित करने में पसीने छूट रहे हैं। विवि. की ओर से जारी रिजल्ट में बडे़ पैमाने पर खामियां मिल रही हैं।
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अधिकारियों के मुताबिक, मूल्यांकन और रिजल्ट तैयार करने के लिए दो एजेंसियां काम कर रही हैं। पूविवि में मूल्यांकन के लिए 2014 में यूपीडेस्को एजेंसी को ठेका दिया गया था। एजेंसी कोडिंग-डिकोडिंग, मूल्यांकन, ओएमआर सीट, वेरीफिकेशन के लिए 21 रुपये प्रति छात्र प्रति परीक्षा, डाटा इंट्री, रिजल्ट, बेस मैनेजमेंट, डिस्प्ले अपलोडिंग (रिजल्ट), प्रिटिंग रिकार्ड के लिए 19 रुपये प्रति छात्र प्रति परीक्षा यानी कुल प्रति छात्र 40 रुपये पर काम कर रही थी।


इसी बीच इसी कार्य के लिए ठेका यूपीएलसी एजेंसी को भी दिया गया। उसी काम के लिए यूपीएलसी को 6.43 रुपये प्रति कापी के हिसाब से छह कापी के लिए कुल 38.58 रुपये और रिजल्ट करने के लिए 21.17 प्रति छात्र प्रति परीक्षा के हिसाब से कुल 59.75 रुपये भुगतान किया जा रहा है। दोनों एजेंसियों के रेट में 19.75 का अंतर है। विवि द्वारा नई एजेंसी को प्रति छात्र 19.75 रुपये अधिक दिया जा रहा है। बावजूद इसके छात्रों को सही रिजल्ट जारी नहीं हो सका।

शिक्षक और अधिकारियों की माने तो पुरानी एजेंसी से पुराने बचे काम लिए जा रहे हैं। जबकि नई एजेंसी को मूल्यांकन और रिजल्ट बनाने के लिए लगाया गया है। यूपी डेस्को एजेंसी करीब छह साल तक विवि में मूल्यांकन और रिजल्ट का कार्य देखती रही। एजेंसी के कार्य के चलते ही कई वर्ष तक रिजल्ट समय से जारी हुआ और पूविवि को रिजल्ट घोषित करने के लिए प्रदेश में पहला स्थान मिला था।

प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा जितेंद्र कुमार ने समय रिजल्ट घोषित करने के लिए पूविवि को बधाई दी थी। पिछले साल थ्योरी की करीब 35 लाख और प्रैक्टीकल की करीब आठ लाख कापियों का मूल्यांकन हुआ था। जबकि इस साल हर विषय के एक या दो कापियों का ही मूल्यांकन कराया गया है। स्नातक व स्नातकोत्तर के केवल अंतिम वर्ष की ही परीक्षाएं कराई गई हैं। 

पूविवि के परीक्षा नियंत्रक वीएन सिंह ने बताया कि पूविवि. की मुख्य परीक्षा के मूल्यांकन और रिजल्ट तैयार करने के लिए दो एजेंसियां काम कर रही हैं। दोनों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। रिजल्ट तैयार करने में कहां से गड़बड़ी हुई है मुझे इसकी जानकारी नहीं है। मैं छुट्टी पर हूं।

कुलपति प्रोफेसर निर्मला एस मौर्य ने कहा कि एजेंसियों को काम के लिए इनवाइट किया जाता है और इनके रेट लिए जाते हैं। जिसका रेट सबसे कम होता है उसी से काम लिया जाता है। पुरानी एजेंसी कम पैसे पर काम कर रही है और नई एजेंसी को अधिक पैसा दिया जा रहा है। इस सवाल पर कुलपति ने कहा कि यह परीक्षा नियंत्रक का काम होता है। हम लोग कोशिश करते हैं कि जो भी खरीदारी हो या कुछ भी हो उसके कोटेशन लिए जाएं। उनकी तुलना की जाए, उसमें से जो कम हो उसे काम दिया जाए। मुझसे पैसे या रेट से कोई मतलब नहीं होता है। ये सरकारी एजेंसियां हैं इनके काम का जो रेट होता है उसका एग्रीमेंट होता है, जो प्रोसीजर के हिसाब से तय किया जाता है। विश्वविद्यालय मूल्यांकन और रिजल्ट तैयार करने का तरीका बदल चुका है। अब कोडिंग और डिकोडिंग कराई जाती है, ताकि मूल्यांकन और परीक्षा की पारदर्शिता बनी रहे।
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