कर्मचारियों की मिलीभगत से होता अनुदान में घपला, किसानों के नाम पर तैयार किए जाते हैं फर्जी कागज

Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 11 Oct 2020 01:09 AM IST
fraud in krashi vibhag
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झांसी। कृषि उपकरणों के लिए मिलने वाले लाखों रुपये के अनुदान हड़पने के खेल में न सिर्फ मशीनरी विक्रेता एवं बिचौलिए शामिल रहते हैं बल्कि इसमें स्थानीय कृषि महकमे में तैनात कुछ कर्मचारी भी शामिल हैं। इनकी मदद से ही किसानों के नाम पर फर्जी कागज तैयार होते हैं। शुक्रवार को ऐसा ही एक मामला पकड़े जाने के बाद से कृषि विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
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किसानों तक कई महंगे कृषि उपकरणों की पहुंच बनाने के लिए सरकार उनको मोटा अनुदान देती है। सबसे अधिक करीब अस्सी फीसदी तक अनुदान कृषि उपकरणों में ही दिए जाते हैं। बाजार में करीब एक लाख में मिलने वाले रोटावेटर अनुदान के जरिए महज बीस हजार रुपये में मिल जाता है। लेकिन सीमित संख्या होने से इसके लिए काफी मारामारी भी रहती है। अनुदान आधारित उपकरण हासिल करने के लिए किसानों को पहले टोकन लेना होता है। यह कृषि विभाग से ऑनलाइन मिलता है लेकिन, खेल यहीं से शुरू होता है।

सूत्रों के मुताबिक तयशुदा समय पर साइट नहीं खोली जाती। गुपचुप तरीके से थोड़ी देर बाद यह खुलती है, जिसमें मिलीभगत से बिचौलिए टोकन हासिल कर लेते हैं। इसके बाद मशीनरी उपकरण विक्रेता पहले बिक चुके उपकरण के नाम पर ही नए उपकरणों की खरीद दिखा देते हैं। पिछले वर्ष में जिसने इनको बाजार दाम में खरीदा उसे भी कुछ रुपये दे दिए जाते हैं। इस तरह बिना नए उपकरण की खरीद हुए ही लाखों रुपये के अनुदान को मिलीभगत से हड़प लिया जाता है। हर वर्ष करीब पचास लाख रुपये से अधिक अनुदान राशि के अधिकांश हिस्से की ऐसे ही बंदरबांट हो जाती है। इस अनुदान राशि से मिले उपकरणों की जांच भी नहीं कराई जाती।
पहले भी पकड़ा जा चुका एक संविदाकर्मी
कृषि अनुदान हड़पने के खेल काफी पुराना है। कुछ महीने पहले तत्कालीन उपनिदेशक कृषि कमल कटियार के कार्यकाल के समय भी हेरफेर का मामला पकड़ा गया था। जांच के दौरान एक संविदाकर्मी पर आरोप सही पाए गए। इस पर तत्कालीन कृषि उपनिदेशक ने आरोपी संविदाकर्मी को बाहर भी कर दिया लेकिन, इसके बावजूद यह खेल अभी भी नहीं थमा। सूत्रों का कहना है डीडी कार्यालय में तैनात कुछ कर्मचारियों की टोकन के खेल में मिलीभगत रहती है। फर्जी तरीके से कागज तैयार करके में भी यही मदद करते हैं।
कृषि उपकरणों के अनुदान में फर्जीवाड़े की शिकायतें मिली हैं। जांच कराई जा रही है। दोषियों के खिलाफ एफआईआर भी कराई जा रही है। अगर कार्यालय का कर्मचारी मिलेगा, तब उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। कमलेश कुमार सिंह, प्रभारी उपनिदेशक, कृषि

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