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आठ साल से मनरेगा मजदूरों का पैसा दबाए रहे सरकारी महकमे

Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 22 Jun 2021 01:33 AM IST
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अंधेरगर्दी: आठ साल से मनरेगा मजदूरों का पैसा दबाए रहे सरकारी महकमे
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झांसी। एक तरफ सरकार मनरेगा से कराए गए कामों का भुगतान अधिकतम आठ दिनों में कराने का दावा करती है वहीं, तमाम सरकारी महकमे ऐसे भी हैं जो मनरेगा मजदूरों का मेहनताना ही करीब आठ साल से दबाए बैठे हैं। जांच पड़ताल में कुल 1549 बैंक खाते ऐसे सामने आए जिनमें गड़बड़ी के चलते मनरेगा मजदूरों को भुगतान नहीं मिल सका। मेहनताना देने मेें सबसे ज्यादा गड़बड़ी वन विभाग एवं लघु सिंचाई विभाग की ओर से बरती गई।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना गांव से पलायन रोकने को लेकर लागू की गई। मनरेगा से कराए कामों के लिए केंद्र सरकार पैसा देती है। नियमों के मुताबिक मस्टर रोल तैयार होने के बाद श्रमिकों के लिंक खाते में सीधे मजदूरी भेज दी जाती है लेकिन, कई विभागों ने मस्टर रोल तैयार कराने के साथ ही उनको लिंक कराने में भी जमकर लापरवाही बरती। श्रमिकों के बैंक खाते लिंक नहीं कराए गए। इस वजह से खातों में ट्रांजेक्शन नहीं हुआ। तमाम बैंक खाते अमान्य कर दिए गए। उधर, सरकारी महकमों ने ट्रांजेक्शन न होने के बाद भी मजदूरों के खाते लिंक कराने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और उनकी मजदूरी का पूरा पैसा वापस भेज दिया। यह सिलसिला वर्ष 2013-2014 से चल रहा है। पिछले दिनों यह मामला शासन तक पहुंच गया। जब जांच शुरू हुई तब मामला सामने आया। झांसी मेें कुल 1549 बैंक खातों में गड़बड़ी पाई गई। वर्ष 2013 में कुूल 226 मामलों में मजदूरों तक उनका मेहनताना नहीं पहुंचा। इसी तरह अभी तक इसी वजह से हजारों मजदूरों को पैसा नहीं मिल सका। सबसे अधिक गड़बड़ी वन विभाग, पीडब्लूडी एवं ग्राम पंचायतों की सामने आई है। अशुद्घ बैंक खाते लघु सिंचाई के 192, पीडी पीडब्ल्यूडी के 166, राष्ट्रीय जलागम मऊरानीपुर के 136 समेत वन विभाग के करीब 200 खाते सामने आए हैं जिनमें गड़बड़ी के चलते मजदूरों को पैसा नहीं मिला। अब ऐसे मामलों की पड़ताल शुरू कराई गई हालांकि इसके लिए जिम्मेदार कौन है, यह तय नहीं हो पा रहा है। वहीं, सीडीओ शैलेष कुमार ने ऐसे मामले से अनभिज्ञता जताई है। उनका कहना है कि जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।

इनसेट
ब्लॉकवार रिजेक्टे[ ट्राजेक्शन का ब्योरा
(वर्ष 2013-2021 तक)
मऊरानीपुर 164
बबीना 181
बड़ागांव 14
बामौर 445
बंगरा 98
चिरगांव 223
गुरसराय 427
कुल 1549
मजदूरी के लिए भटकते रहे, बाद में भूल गए
मनरेगा में काम करने के बाद भी मजदूरी न मिलने से परेशान मजदूर पहले विभागों का चक्कर काटते रहे लेकिन, अफसर उनको टालते रहे। कई चक्कर काटने के बाद भी जब उनको मजदूरी नहीं मिली तब थक हारकर आखिरकार वह घर बैठ गए। उस दौरान यहां तैनात अफसर भी अब दूसरी जगहों पर जा चुके हैं।
जनपद में सृजित मानव दिवस की संख्या (लाख में)
अनुसूचित जाति 17.365
अनुसूचित जनजाति 0.472
महिलाएं 18.31
कुल व्यय 144.17 करोड़

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