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झांसी की सबसे बड़ी मंडी घाटे में, आधी रह गई आमदनी

Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 02 Aug 2021 01:42 AM IST
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झांसी। नया अध्यादेश आने के बाद महानगर की मंडी समिति की आय पर जबरदस्त चोट हुई है। हाल ये है कि एक साल में मंडी शुल्क आधा हो गया है। पिछले साल हुई 10.37 करोड़ रुपये आय की तुलना में इस साल 5.51 करोड़ रुपये ही मंडी शुल्क प्राप्त हो सका है। साथ ही मंडी समितियों में सब्जियों की आवक भी काफी घट गई है।
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अध्यादेश लागू होने के पहले वर्ष 2019-20 तक पूरी मंडी क्षेत्र में मंडी शुल्क की दर दो प्रतिशत थी। पांच जून को केंद्रीय कृषि अध्यादेश लागू होने के बाद प्रभावी क्षेत्र सिर्फ मंडी स्थल रह गया। 27 नवंबर से मंडी शुल्क की दर दो प्रतिशत से घटाकर एक फीसदी कर दी गई। 25 मई को प्रदेश सरकार ने फल-सब्जी की 45 निर्दिष्ट कृषि उत्पादों को गैर निर्दिष्ट कृषि उत्पाद घोषित करते हुए उन पर मंडी शुल्क समाप्त कर दिया। केंद्रीय अध्यादेश लागू होने के चलते किसानों को अपना उत्पाद कहीं भी बेचने का अधिकार मिल गया है। इस कारण मंडी स्थलों में आवक कम हुई है। साथ ही शहर के विभिन्न क्षेत्रों जैसे सीपरी बाजार, बड़ाबाजार सदर बाजार, पहूज नदी के पास, आवास विकास चौराहा पर सीधे सब्जी बेची जा रही है। इस कारण झांसी की सब्जी मंडी स्थल में आने वाली प्रमुख जींस की आवक में भी कमी आई है। वर्ष 2019-20 की तुलना में वर्ष 2020-21 में आलू 31919, हरी मिर्च 607, टमाटर 5531, नींबू 3049, तरोई में 760 क्विंटल की कमी आई है।

आय पर असर से कामकाज भी प्रभावित
आय पर असर होने से मंडी का कामकाज भी प्रभावित हुआ है। निर्माण से जुड़ा कोई भी काम नहीं हो पा रहा है। जैसे कि भोजला मंडी में सब्जी और फल मंडी का प्रस्ताव दिया था, जिसको अनुमति नहीं मिल पाई है। इसके अलावा गांवों में मंडी तक जाने वाली सड़कें भी नहीं बन पा रही हैं। बंदूकधारी 14 सुरक्षा गार्डों को हटाकर कम पैसे में पीआरडी जवान रखे गए हैं। इस तरह से आग घटती रही तो सैलरी देने तक की आय नहीं हो पाएगी। संचालन में परेशानी हो सकती है। जैसे कि सुरक्षा, सफाई, विद्युत व्यवस्था आदि।
वित्तीय वर्ष मंडी शुल्क प्राथमिक आवक
2018-19 9.61 करोड़ 2083932
2019-20 10.37 करोड़ 2043077
2020-21 5.51 करोड़ 1340877
(नोट: आवक कुंतल में।)
पहले मंडी समिति की संपूर्ण क्षेत्र से आय होती थी। मगर अब प्रभावी क्षेत्र सिर्फ मंडी स्थल रह गया। इस कारण आय कम होने पर राजस्व में कमी आई है। उसी हिसाब से खर्चों में भी कमी की गई है। - पंकज शर्मा, मंडी सचिव।

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