अपराजिता: एफआईआर दर्ज न करना भी एक अपराध, पीड़िता चाहे तो पुलिस अधिकारी पर भी दर्ज करवा सकती है मुकदमा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Thu, 22 Oct 2020 12:24 AM IST
अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स
अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
ख़बर सुनें
किसी भी अपराध में पीड़िता की रिपोर्ट दर्ज न करना भी अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे में पीड़िता चाहे तो पुलिस अधिकारी पर भी एफआईआर दर्ज करवा सकती है। इसमें दो साल तक की सजा का प्रावधान है। यह बात अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल के तहत आयोजित परिचर्चा में वूमेन एंपावरमेंट फाउंडेशन के फाउंडिंग प्रेसिडेंट और रिटायर्ड आईपीएस रतन कुमार श्रीवास्तव ने कही।
विज्ञापन


महिलाओं के मौलिक और कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी देने के लिए परिचर्चा का आयोजन अमर उजाला कार्यालय में किया गया। इस परिचर्चा को फेसबुक पर लाइव भी किया गया। वाइस प्रेसिडेंट अनिल सिंदूर ने भी अपराजिता समूह की सदस्यों को कानून के बारे में जानकारी दी और उनके सवालों के जवाब दिए।


रिटायर्ड आईपीएस ने कहा कि यही कानून मेडिकल में भी लागू है। पीड़िता चाहे तो वह कभी भी अपना मेडिकल करवा सकती है और उसके लिए उसे एफआईआर की कॉपी की भी आवश्यकता नहीं है। कोई भी अस्पताल मेडिकल से मना नहीं कर सकता।

घर से बाहर काम करने वाली महिलाओं को विशाखा गाइडलाइंस के बारे में जानकारी होना जरूरी है। हर कार्यालय में आईसीसी इंटरनल कंप्लेंट्स कमिटी होना जरूरी है। अपराजिता समूह की सदस्यों ने भी अपने विचारों से अवगत कराया। संचालन सीमा जैन ने किया।

काउंसलर सीमा जैन, कथक डांसर और फाउंडर ऑफ नूपुर कला एकेडमी वंदना देबराय, फाउंडर ऑफ संरक्षण आर्गेनाइजेशन अनु गोयल, हाउस मेकर एंड सोशल वर्कर नीतू अग्रवाल, भरतनाट्यम डांसर फाउंडर आफ कलानिधि संस्थान डॉ सुचारिता खन्ना, समाज सेविका अनुपम जैन, पीएसआईटी की वाइस चेयरपर्सन निर्मला सिंह, सोशल वर्कर श्वेता श्रीवास्तव,  डायरेक्टर वीरेंद्र स्वरूप स्कूल डॉ सुषमा मंडल, हेडमिस्ट्रेस सेठ आनंदराम जयपुरिया मधुश्री भौमिक मौजूद रहीं।  

बोली महिलाएं
महिलाओं की स्थिति वाकई सोचनीय है। कई बार घर के सदस्य ही महिलाओं के अधिकारों का हनन करते हैं। अपने ही लोगों के खिलाफ आवाज ऊंची करना बहुत मुश्किल हो जाता है। लेकिन यह भी तय है कि अगर महिलाएं पहला कदम उठा लें तो काफी कुछ बदल सकता है। इसके लिए महिलाओं  को जागरूक होना होगा। - निर्मला सिंह पीएसआईटी वाइस चेयरपर्सन

कई बार स्कूल में ऐसी स्थितियां उत्पन्न होती हैं कि गलती न होने के बाद भी आपको धमकी मिलती है। कई बार पॉलिटिकल और प्रशासनिक प्रेशर को भी झेलना पड़ता है। उच्च पद पर होने के बावजूद कई बार असहाय महसूस होता है। लेकिन एक बात सीखी है कि हार नहीं माननी चाहिए, जितना आप लड़ेंगे उतना ही आप मजबूत होती जाएंगी। - डॉ सुषमा मंडल, डायरेक्टर वीरेंद्र स्वरूप स्कूल

छोटी बच्चियों के साथ ट्रेन में अकेले सफर कर रही थी। कुछ छात्र उसी कंपार्टमेंट में बैठकर ड्रिंक कर रहे थे। मना करने पर नहीं माने। किसी ने हेल्पलाइन नंबर दिया। डरते डरते कॉल किया। 10 मिनट के भीतर ट्रेन रुकी और पुलिस टीम मेरे पास पहुंच गई। उसके बाद कानपुर स्टेशन पर उन लड़कों को पुलिस ले गई। पहली बार पुलिस का नंबर इस्तेमाल किया था और अनुभव काफी अच्छा रहा। फिर छात्रों ने भी अपनी गलती मान ली। - सुचारिता खन्ना, भरतनाट्यम डांसर फाउंडर ऑफ़ कलानिधि संस्थान

कई बार दूसरों की मदद करने के लिए सोचो तो लगता है कि कहीं हम पर ही मुसीबत न आ जाए। ऐसे कानून बनने चाहिए जिसमें मदद करने वाले को भी उतनी ही सुरक्षा मिले। इसके अलावा कई बार पीड़िता शिकायत करती है और शिकायत करने के बाद उसे वापस उसी घर में आना पड़ता है। पीड़िता को भी सुरक्षा दी जानी चाहिए जब तक उसके केस का निस्तारण न हो जाए। - डॉ वंदना देब रॉय

महिलाओं के लिए कानून तो कई हैं लेकिन उनका सही से पालन नहीं किया जाता। इसमें काफी हद तक महिलाओं की भी गलती होती है। परिवार को बचाने के लालच में व कई बार अपनी सहनशक्ति से अधिक सह लेती हैं। अगर पहला थप्पड़ पड़ने पर ही आवाज उठा लीजिए और कानून भी पहले थप्पड़ पर ही सख्त से सख्त सजा दे तो ऐसे अपराधों की संख्या में कमी आएगी। - सीमा जैन
विज्ञापन

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00