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गोल्डन कार्ड बनाने में जिला मंडल में प्रथम

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 30 Jul 2021 01:27 AM IST
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कानपुर देहात। डीएम की सख्ती के बाद आयुष्मान योजना अंतर्गत लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बनाने मेें कानपुर देहात मंडल में पहले व प्रदेश मेें 14वें स्थान पर पहुंच गया है। जिले मेें अब तक दो लाख से अधिक परिवारों के गोल्डन कार्ड बनाए जा चुके हैं।
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प्रधानमंत्री जन आरोग्य आयुष्मान योजना के पात्र परिवार को पांच लाख रुपये के निशुल्क इलाज की सुविधा दी जाती है। जिले में योजना के दायरे में एक लाख 52 113 परिवारों के 760565 लाभार्थी आते हैं। आयुष्मान योजना का लाभ लेने के लिए लाभार्थी के पास गोल्डन कार्ड होना जरूरी है।

जिसे वह संबंधित क्षेत्र के सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या संबद्ध निजी अस्पताल में आयुष्मान मित्र से संपर्क कर बनवा सकते हैं, या फिर जनसेवा केंद्र व गांवों में लगने वाले वीएलई कैंप से भी बनवाया जा सकता है। लाभार्थियों के कम गोल्डन कार्ड बनने पर पिछले दिनों डीएम जेपी सिंह ने कड़ी नाराजगी जताई थी।
जिसके बाद कार्ड बनाने मेें तेजी आई है। आयुष्मान योजना के डॉ. शिवम गुप्ता ने बताया कि जिले मेें अब 202906 लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बनाए जा चुके हैं। आयुष्मान योजना का अब तक 7152 पात्रों ने लाभ उठाया है। बताया कि जिला अस्पताल समेत सरकारी, निजी अस्पतालों व गांवों मेें कैंप लगाकर गोल्डन कार्ड बनाए जा रहे हैं। जिससे कानपुर देहात अब मंडल में पहले व प्रदेश मेें 14वें स्थान पर पहुुंच गया है।
चिकित्सा प्रभारी ही आयुष्मान में लगा रहे पलीता
कानपुर देहात। योजना के तहत लाभार्थियों को सरकारी अस्पतालों में निशुल्क इलाज की सुविधा मिल सके, इसके लिए 9 जून 2019 में तत्कालीन सीएमओ डॉ. हीरा सिंह ने सभी चिकित्सा प्रभारियों को लिखित पत्र जारी किया था।
इसमें आशाओं के जरिये प्रसूताओं व मरीजों को स्वास्थ्य केंद्र से रेफर होने पर जिला अस्पताल भेजने का आदेश दिया था। लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई। उस दौरान मरीज जिला अस्पताल मेें पहुंचने लगे थे, लेकिन सीएमओ के बदलते ही चिकित्सा प्रभारी फिर से पुराने ढर्रे पर आ गए।
कमशीनबाजी में प्राइवेट अस्पताल पहुंचाए जाते मरीज
कानपुर देहात। ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं में आशाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। आयुष्मान योजना में संबद्ध सरकारी व निजी अस्पतालों मेें अधिकांश मरीज आशाओं के जरिये ही पहुंचाए जाते हैं। प्राइवेट अस्पतालों से कमीशन मिलने के कारण आशाएं मरीजों को सरकारी के बजाय प्राइवेट अस्पतालों में ले जाना ज्यादा पसंद करती हैं। जिस पर कई बार अंकुश लगाने का प्रयास करते हुए चेतावनी भी दी गई, लेकिन खासा फर्क नहीं पड़ा।
गोल्डन कार्ड नहीं बनाने वाले चार वीएलई की आईडी बंद करने की संस्तुति
डेरापुर। तहसील क्षेत्र के चयनित गांवों में आयुष्मान योजना अंतर्गत गोल्डन कार्ड बनाने के लिए नामित किए गए चार वीएलई (विलेज लेवल इंटरप्रेन्योर) गांवों में नहीं जा रहे हैं। जिससे लाभार्थियों के कार्ड बनने में समस्या आ रही है। एसडीएम ने नामित वीएलई से संबंधित जनसेवा केंद्रों की आईडी बंद करने की रिपोर्ट एडीएम को भेजी है।
डेरापुर तहसील क्षेत्र के चयनित गांवों से संबंधित लोगों के प्रधानमंत्री जन आरोग्य आयुष्मान योजना अंतर्गत गोल्डन कार्ड बनाने के लिए जनसेवा केंद्र से जुड़े वीएलई विनय सिंह, अशोक कुमार, सतेंद्र व मो. शोएब की ड्यूटी लगाई गई थी।
एसडीएम ऋषिकांत राजवंशी ने बताया कि चयनित गांव के लोगों से गोल्डन कार्ड बनाए जाने की जानकारी की गई। जिस पर पता चला कि चारो वीएलई गोल्डन कार्ड बनाने गांव नहीं पहुंच रहे है। जिससे लाभार्थियों के कार्ड नहीं बन पा रहे हैं और उन्हें परेशान होना पड़ रहा है। एसडीएम ने चारो वीएलई से संबंधित जनसेवा केंद्र की आईडी बंद करने की संस्तुति की है।
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