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कानपुर: कोरोना के खौफ ने हिला दी दिमाग की दुनिया, पोस्ट कोविड रोगियों में फोबिक एंजाइटी बढ़ी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sun, 05 Dec 2021 08:14 PM IST

सार

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग की ओपीडी में कोरोना की दूसरी लहर के बाद 30 फीसदी रोगी बढ़ गए हैं। इनमें ज्यादातर फोबिक एंजाइटी की गिरफ्त में हैं।
कोरोना वायरस
कोरोना वायरस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

कोरोना के खौफ ने पोस्ट कोविड रोगियों के दिमाग की दुनिया हिलाकर रख दी है। कोरोना संक्रमण से तो रोगी मुक्ति पा गए, लेकिन दिमाग में शंका, आशंकाएं और डर भर गया है। पोस्ट कोविड रोगियों के सैंपल सर्वे में पाया गया है कि नींद के घंटे और समय बदल गया है।
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मनोरोग विशेषज्ञों के यहां काउंसलिंग के दौरान रोगी बताते हैं कि उनके दिमाग में शक है कि अब कोरोना आया तो जान नहीं बचेगी। ऐसा आम आदमियों के साथ तो है ही, डॉक्टरों को भी यही परेशानी है। कोरोना की दूसरी लहर की संक्रमण की चपेट में आए लोग इस वक्त गंभीर किस्म की फोबिक एंजाइटी में हैं।


जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग की ओपीडी में कोरोना की दूसरी लहर के बाद 30 फीसदी रोगी बढ़ गए हैं। इनमें ज्यादातर फोबिक एंजाइटी की गिरफ्त में हैं। मनोरोग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर धनंजय चौधरी का कहना है कि पोस्ट कोविड रोगी में एंजाइटी बढ़ी है।

इससे वे होपलेस हो जा रहे हैं। पुरुषों में महिलाओं की तुलना में एंजाइटी अधिक है। इसके साथ ही निजी मनोरोग विशेषज्ञों की ओपीडी सैंपल सर्वे में यही स्थिति उभर आई। वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. उन्नति कुमार ने बताया कि लोगों की नींद के घंटे कम हुए हैं।

इसके साथ ही अवधि बदल गई है। लोग रात भर जागते हैं और देर तक सो रहे हैं। इसके साथ ही 20 फीसदी मनोरोगी ऐसे हैं, जिनका बीमारी स्टेज बढ़ गया। पहले वे ग्रेड-1 में थे, लेकिन कोविड के बाद ग्रेड टू में हो गए। 

सैंपल सर्वे का आकलन
- एंजाइटी के रोगी 32 हजार से एक लाख से अधिक हुए
- कोविड के  82 हजार रोगियों में एंजाइटी 90 फीसदी को
- फोबिक एंजाइटी की गिरफ्त में 20 फीसदी रोगी
- डिप्रेशन के 20 और एंजाइटी के 80 फीसदी रोगियों की स्टेज बदली 
- 50 फीसदी कोविड रोगियों का मिजाज बिल्कुल बदला

डॉक्टरों में सबसे अधिक फोबिक एंजाइटी
कोविड की चपेट में आए डॉक्टरों में सबसे अधिक कोविड एंजाइटी बढ़ी है। काउंसलिंग में पाया गया कि उन्हें शक है कि अब कोविड हुआ तो बचेंगे नहीं। इन डॉक्टरों ने कोविड रोगियों को मरते देखा और उनके सगे संबंधी कोविड में मरे हैं। 45 साल से अधिक आयु के डॉक्टरों में यह दिक्कत सबसे अधिक है। इन डॉक्टरों ने महीनों ओपीडी नहीं की। अपने डॉक्टर परिजनों को भी नहीं करने दी। अब भी उनके दिल में डर भरा हुआ है।

एक सीनियर डाक्टर कोरोना होने के बाद फोबिक एंजाइटी में है। उन्हें कोरोना का डर सता रहा है। तीसरी लहर से आशंकित हैं। वह अंजान डर से ग्रसित हो गए हैं। घरवालों को लेकर भी चिंतित हैं। इस वक्त उनका इलाज और काउंसलिंग  डॉ. उन्नति कुमार के अंडर में चल रहा है।

स्वरूपनगर के एक व्यापारी सो नहीं पा रहे हैं। उन्हें चिंता है कि कोरोना आया तो उनका व्यवसाय बंद हो जाएगा। जान को भी खतरा है। तीसरी लहर की आशंका से उन्हें नींद नहीं आ रही। धड़कन बढ़ने पर उन्हें लगता है कि हार्ट अटैक पड़ रहा है। वह मनोरोग विभाग में इलाज करा रहे हैं।
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