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संजीत अपहरण हत्याकांड: सीबीआई ने अस्पताल के मैनेजर व कर्मचारियों से की पूछताछ, तफ्तीश तेज

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Wed, 05 Jan 2022 08:15 AM IST

सार

अस्पताल के मैनेजर रवि दुबे, पैथोलॉजी में काम करने वाले शिवम से करीब सवा घंटे तक बंद कमरे में पूछताछ की। संजीत इसी अस्पताल में लैब टेक्नीशियन था। दोपहर करीब साढ़े तीन बजे टीम ने बर्रा थाने पहुंचकर इंस्पेक्टर दीनानाथ मिश्रा से केस से संबंधित जानकारी ली।
संजीत अपहरण एवं हत्याकांड
संजीत अपहरण एवं हत्याकांड - फोटो : amar ujala
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विस्तार

संजीत अपहरण हत्याकांड की जांच के सिलसिले में सीबीआई की टीम ने मंगलवार से शहर में डेरा डाल दिया है। कई दिनों तक टीम शहर में रहकर छानबीन कर सकती है। पहले दिन टीम ने उस अस्पताल के कर्मचारियों से पूछताछ की जहां पर संजीत काम करता था।
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अस्पताल के मैनेजर व दो सहकर्मियों से करीब डेढ़ घंटे तक पूछताछ कर जानकारी जुटाई। उसके बाद टीम बर्रा थाने गई। थानेदार से बातचीत कर कुछ दस्तावेज जुटाए। उसके बाद टीम होटल चली गई। बर्रा पांच निवासी संजीत अपहरण हत्याकांड के मामले का सीबीआई ने 22 सितंबर 2021 को मुकदमा दर्ज किया था।


जांच के संबंध में सीबीआई की तीन सदस्यीय टीम मंगलवार सुबह करीब 11 बजे तीसरी बार शहर पहुंची। कुछ देर पुलिस ऑफिस में रही। फिर नौबस्ता स्थित धनवंतरी अस्पताल पहुंची। अस्पताल के मैनेजर रवि दुबे, पैथोलॉजी में काम करने वाले शिवम से करीब सवा घंटे तक बंद कमरे में पूछताछ की।

संजीत इसी अस्पताल में लैब टेक्नीशियन था। दोपहर करीब साढ़े तीन बजे टीम ने बर्रा थाने पहुंचकर इंस्पेक्टर दीनानाथ मिश्रा से केस से संबंधित जानकारी ली। यहां थाने के पुराने मुंशी से पूछताछ कर केस से संबंधित दस्तावेज जुटाए। शाम पौने पांच बजे टीम होटल रवाना हो गई। 

मुख्य आरोपी भी यहीं काम करता था
पुलिस ने वारदात का खुलासा कर आठ आरोपियों को जेल भेजा था। इसमें मुख्य आरोपी कुलदीप भी धनवंतरी अस्पताल में काम करता था। वह संजीत का दोस्त था। वारदात से पांच महीने पहले वह नौकरी से निकाला गया था। अपहरण के बाद संजीत जब दो दिनों तक हॉस्पिटल नहीं पहुंचा था तो उसके सहकर्मी हिमांशु ने कुलदीप को कॉल कर संजीत के बारे में पूछा था।

तबसे कुलदीप हिमांशु को कॉल कर हर दिन की कार्रवाई के बारे में जानकारी लेता था। सीबीआई ने सबके बयान दर्ज किए। सीबीआई परिजनों से भी पूछताछ कर सकती है। क्योंकि मामले में 30 लाख रुपये की फिरौती का राज उजागर नहीं हो सका है। उधर, परिजनों का कहना है कि जिस तरह से सीबीआई तेजी से जांच कर रही है उससे न्याय की उम्मीद जाग गई है।
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