यूपी: कानपुर की दिव्या बनीं आईएएस, ऑल इंडिया 28वीं रैंक, महिला वर्ग में फतेहपुर की जागृति ने किया टॉप

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sat, 25 Sep 2021 01:03 PM IST
दिव्या मिश्रा
दिव्या मिश्रा - फोटो : amar ujala
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कानपुर में नौबस्ता के हनुमंत विहार की रहने वाली दिव्या मिश्रा ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की की परीक्षा में ऑल इंडिया 28वीं रैंक हासिल कर कानपुर का परचम देशभर में लहराया है। दिव्या ने इससे पहले यूपीएससी-2019 में 312वीं रैंक हासिल की थी। वर्तमान में वे दिल्ली में इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस की ट्रेनिंग कर रही हैं।
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दिव्या के अलावा सर पदमपत सिंघानिया एजुकेशन सेंटर से पढ़े वैभव जिंदल ने 253वीं रैंक हासिल की है। दिव्या के पिता दिनेश कुमार मिश्रा गोंडा के मनकापुर नवोदय विद्यालय में प्रिंसिपल हैं। मां मंजू मिश्रा गृहिणी हैं। दिव्या के छोटे भाई दिव्यांशु मिश्रा सेना में लेफ्टीनेंट हैं। इनकी तैनाती मध्यप्रदेश में है। दिव्या कानपुर में पली-बढ़ी हैं। इनकी 12वीं तक की पढ़ाई उन्नाव के जवाहर नवोदय विद्यालय में हुई है। दिव्या शुरुआती पढ़ाई से ही टॉपर रहीं।


वर्ष 2006 में 10वीं की परीक्षा में यूपी और उत्तराखंड के नवोदय विद्यालयों की टॉपर रहीं। एकेटीयू लखनऊ से बीटेक किया तो यूनिवर्सिटी स्तर पर कांस्य पदक हासिल किया। इसके बाद वर्ष 2020 में आईआईएम लखनऊ से स्ट्रेटेजिक मैनेजमेंट में पीएचडी की। साथ ही वह सिविल सर्विसेज की तैयारी करती रहीं। तीसरे प्रयास में वह आईएएस पद के लिए चयनित हुईं। दिव्या का कहना है कि सिविल सेवा की परीक्षा में अब भाषा की सीमा खत्म होती जा रही है।

नवोदय विद्यालयों में नौवीं के बाद अंग्रेजी पढ़ाई जाती है। वे शुरुआत से ही कॉन्वेंट स्कूल की छात्रा नहीं थीं। उनकी अंग्रेजी भी अन्य हिंदी भाषी छात्रों की तरह सामान्य है। हिंदी पट्टी में युवाओं को सिविल सेवा की तैयारी से पीछे नहीं हटना चाहिए। बस पढ़ाई के लिए एक रणनीति होनी चाहिए, जिस विषय से तैयारी कर रहे हैं, उसकी अच्छी समझ होनी चाहिए। 

सफलता के लिए सोशल मीडिया से बनाई दूरी 
जीवन में कुछ बनने की चाहत रखने वाली दिव्या ने सफलता हासिल करने के लिए सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखी। उन्होंने बताया कि उनका आज भी ट्विटर, फेसबुक या इंस्टाग्राम जैसे किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर एकाउंट नहीं है। पढ़ने की मंशा रखने वाले युवाओं के लिए यह जहर है। इसमें समय की बर्बादी के अलावा कुछ नहीं। हालांकि, पढ़ाई ऑनलाइन ही की। इसके लिए कभी कोई कोचिंग नहीं की।

मन लगाकर छह घंटे पढ़ना बहुत 
दिव्या ने पीएचडी के साथ ही सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की। इसके लिए दर्शनशास्त्र विषय चुना। बताया कि वे 24 घंटे में मात्र छह से सात घंटे पढ़ती थीं। इस दौरान सिर्फ पढ़ाई होती थी और कुछ नहीं। ठीक से मन लगाया जाए तो इतनी देर की पढ़ाई से भी सफलता मिल सकती है। दिव्या ने बताया कि पहले प्रयास में वे चार नंबर से चूक गई थीं। दूसरे में 312वीं रैंक हासिल की, लेकिन तीसरे प्रयास में वे 28वीं रैंक पाकर आईएएस बन गई हैं।
 
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