कोरोना काल में 4618 बच्चों का टूटा ‘सुरक्षा चक्र’

Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 23 Sep 2021 12:44 AM IST
4618 children's 'safety cycle' broken during the Corona period
4618 children's 'safety cycle' broken during the Corona period
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कोरोना काल में पहले लॉकडाउन और फिर टीकाकरण बंद होने की वजह से शून्य से दो साल तक के 4618 बच्चों का टीकाकरण का चक्र टूट गया। सर्विलांस अभियान में यह बात सामने आने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग ने सभी का टीकाकरण शुरू करा दिया है। समय पर टीका नहीं लगने से बच्चों को टीबी, डिप्थीरिया, टिटनेस, हेपेटाइटिस, डायरिया का खतरा बढ़ गया है।
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बच्चों को अलग-अलग महीने में छह बार बीमारियों से बचाव के लिए टीके लगाए जाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चों का समय पर टीकाकरण बहुत जरूरी है। जिन बीमारियों के टीके बच्चों को नहीं लग पाते हैं, उन बीमारियों के होने की संभावना बढ़ जाती है।

सात से 16 सितंबर तक स्वास्थ्य विभाग का सर्विलांस अभियान चला। अभियान के दौरान आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की टीमों ने 3.57 लाख घरों का डोर-टू-डोर सर्वे किया। सर्वे में शून्य से दो साल तक के 4618 बच्चों का रुटीन टीकाकरण प्रभावित होना पाया गया।
किसी का डेढ़ महीने तो किसी का साल भर वाला टीकाकरण का चक्र टूट गया। सर्विलांस अभियान में यह बात सामने आने के बाद अब इनका टीकाकरण शुरू कर दिया गया है। डिप्टी सीएमओ डॉ. हिंदप्रकाश मणि ने बताया कि डोर-टू-डोर सर्वे में 4618 बच्चे टीके से वंचित रह गए हैं। इन्हें टीका लगाया जा रहा है।
2086 गर्भवतियों को समय पर नहीं लगा टिटनेस इंजेक्शन
कोरोना काल में बच्चे ही नहीं गर्भवती महिलाओं का भी टीकाकरण प्रभावित हुआ था। बताते चलें कि गर्भवती महिलाओं को दो बार टिटनेस का इंजेक्शन लगाया जाता है। सर्विलांस अभियान में सामने आया कि 2086 गर्भवती को समय पर टिटनेस का इंजेक्शन नहीं लग सका।
कोरोना के चलते एक तरफ बच्चों, गर्भवती का रुटीन टीकाकरण जहां प्रभावित हुआ वहीं, 45 साल से अधिक आयु के 42 हजार 343 लोगों ने कोरोना की वैक्सीन नहीं लगवाई। सर्वे में यह बात सामने आने पर अब स्वास्थ्य विभाग ने इन लोगों को पहली डोज का टीकाकरण शुरू कराया है।
कब लगता है कौन सा टीका
जन्म के 24 घंटे में: बीसीजी, हेपेटाइटिस-बी, ओरल पोलिया वैक्सीन (ओपीवी-0)
छह हफ्ते पर: डीपीटी-1, इनएक्टिवेटिड पोलियो वैक्सीन (आईपीवी-1), ओपीवी-1, रोआवायरस-1, न्यूमोकॉकल कॉन्जुगेट वैक्सीन (पीसीवी-1)
दस हफ्तों पर: डीपीटी-2, ओपीवी-2, रोटावायरस-2
14 हफ्तों पर: डीपीटी-3, ओपीसी-3, रोटावायरस-3, आईपीवी-2, पीसीवी-2
9 से 12 महीनों पर: खसरा और रूबेला-1
16 से 24 महीनों पर: खसरा-2, डीपीटी बूस्टर-1, ओपीवी बूस्टर

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